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पंजाब में गहराया बिजली संकट: अधिकतम मांग पहुंची 8500 मेगावाट, कोयले की कमी से लग रहे 12 घंटे तक के कट
Sat, 30 Apr 2022 01:36 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 30 Apr 2022 01:36 PM IST
सार
बिजली सप्लाई व्यवस्था में सुधार लाने के लिए पावरकॉम ने शुक्रवार को रोपड़ की बंद पड़ी आखिरी व चौथी यूनिट को शाम को चला दिया। देर शाम तक 210 मेगावाट की इस यूनिट से केवल 68 मेगावाट बिजली ही मिल पा रही थी।
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- फोटो : amar ujala
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विस्तार
पंजाब में बिजली संकट से हाहाकार मचा हुआ है। इस साल के गर्मी के सीजन की अब तक की सबसे अधिक 8500 मेगावाट की मांग शुक्रवार को दर्ज की गई लेकिन इसके मुकाबले पावरकॉम के पास बिजली की उपलबधता केवल 4800 मेगावाट की रही।
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वहीं बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए पावरकॉम ने शाम को अपने रोपड़ प्लांट की बंद पड़ी चौथी यूनिट को भी चालू कर दिया। वहीं तलवंडी साबो की एक यूनिट को भी शुक्रवार को चला दिया गया। हालांकि थर्मल प्लांटों में कोयले का संकट बना हुआ है। शुक्रवार को भी बिजली सप्लाई में कमी के चलते पंजाब के विभिन्न जिलों में चार से पांच घंटे तक के कट लगे। वहीं अर्बन इंडस्ट्री में 9 घंटे और गांवों में 10 से 12 घंटे के कट लगे।
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जानकारी के मुताबिक रोपड़ प्लांट में सात, लहरा मुहब्बत में तीन, तलवंडी साबो में सात, राजपुरा में 18 और गोइंदवाल में दो दिनों का कोयला शेष है। जहां थर्मलों में कोयले का संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। उधर, भीषण गर्मी में शुक्रवार को इस सीजन की अब तक की सबसे अधिक 8500 मेगावाट की मांग दर्ज की गई। लेकिन इस मांग के मुकाबले पावरकॉम के पास बिजली की उपलब्धता 4800 मेगावाट की रही। इसमें से पावरकॉम को अपने रोपड़ व लहरा मुहब्बत प्लांटों से 1438 मेगावाट, प्राइवेट के तलवंडी साबो, राजपुरा व गोइंदवाल से 2743 मेगावाट, हाइड्रो से 516 मेगावाट, सोलर प्रोजेक्टों से 38 मेगावाट समेत अन्य स्रोतों से करीब 4800 मेगावाट बिजली मिली।
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हालांकि बिजली सप्लाई व्यवस्था में सुधार लाने के लिए पावरकॉम ने शुक्रवार को रोपड़ की बंद पड़ी आखिरी व चौथी यूनिट को शाम को चला दिया। देर शाम तक 210 मेगावाट की इस यूनिट से केवल 68 मेगावाट बिजली ही मिल पा रही थी। तलवंडी साबो की भी एक यूनिट को शुक्रवार को चला दिया गया। इस तरह अब रोपड़ व लहरा के सभी आठ, राजपुरा के दो, तलवंडी साबो के तीन में से दो और गोइंदवाल के दो में से एक यूनिट चल रही है। मांग के हिसाब से बिजली की सप्लाई में कमी के चलते पावरकॉम को बाहर से 2900 मेगावाट बिजली खरीदनी पड़ी। लेकिन 800 मेगावाट की कमी के चलते लोगों को कटों का सामना करना पड़ा। शहरों से लेकर गांवों और इंडस्ट्री तक लंबे-लंबे कट लगे।
पीएसईबी इंजीनियरिंग एसोसिएशन ने पंजाब में चल रहे गंभीर बिजली संकट को लेकर चिंता जताई है। अमर उजाला से बात करते हुए एसोसिएशन के प्रधान इंजीनियर जसवीर सिंह धीमान, महासचिव इंजीनियर अजयपाल सिंह अटवाल ने कहा कि रोपड़ थर्मल प्लांट वाली जगह पर सुपर क्रिटिकल थर्मल प्लांटों को भविष्य की बिजली की जरूरत को ध्यान में रखते हुए लगाया जाए। जिससे पंजाब की दूसरे राज्यों के प्लांटों पर निर्भरता कम हो। साथ ही बठिंडा प्लांट की खाली जमीन पर पावरकॉम की ओर से 250 मेगावाट का सौर ऊर्जा का यूनिट स्थापित किया जाए। इस प्रोजेक्ट को बहुत कम लागत व कम समय में चलाया जा सकता है। साथ ही मांग की कि पचवारा कोयला खान से कोयले की सप्लाई को जल्द यकीनी बनाया जाए, जिससे थर्मलों में चल रहा कोयले का संकट समाप्त हो सके।