पंजाब की फुलकारी: पटियाला की गलियों से निकली शानदार कसीदाकारी ने दुनिया में बिखेर दी चमक
लाजवंती फुलकारी की कला को हजारों महिलाओं को सिखाकर उन्हें आत्मनिर्भर बना चुकी हैं। वर्तमान में भी उनके साथ पंजाब, हरियाणा, यूपी व राजस्थान तक की करीब 700 महिलाएं जुड़ी हैं।
विस्तार
पंजाब की फुलकारी पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इसकी जड़ें पाकिस्तान के मुल्तान से जुड़ी हैं। त्रिपड़ी इलाके में रहने वाली लाजवंती (65) बताती हैं कि बंटवारे के बाद भारत आई मेरी नानी के साथ यह कला पाकिस्तान से आई थी। पांच साल की उम्र में नानी की देखादेखी मेरे भी हाथ में क्रोशिया आ गया। शौक कब जुनून बन गया मैं जान भी न सकी। डेढ़ साल में ही इतनी माहिर हो गई कि फुलकारी के तरह तरह के डिजाइन बनाने लगी। मेरे डिजाइन देख लोग दंग रह जाते। यकीन नहीं करते कि इतनी छोटी उम्र में कोई ऐसी कसीदाकारी कर सकता है। इसी कला की बदौलत मैंने न केवल पद्मश्री अवार्ड पाया बल्कि सैकड़ों महिलाओं को आत्मनिर्भर भी बनाया।
लाजवंती कहती हैं कि पढ़ाई लिखाई में उनकी खास दिलचस्पी नहीं थी। क्रोशिये पर नाचती नानी की अंगुलियां उन्हें हैरान करती थीं। उनकी फुलकारी के रंग अपनी ओर खींचते थे। बस सबकुछ भूलकर उन्होंने भी फुलकारी को अपना जीवन बना लिया। थोड़े समय में ही उनकी कला को पहचान मिलने लगी। शुरू में यह कला पटियाला की गलियों तक ही सीमित थी। इसे परवाज मिली 1988 में सूरजकुंड मेले से। यहां उनकी फुलकारी की सुंदर कढ़ाई से सजे कपड़ों को बिक्री के लिए रखा गया। कुछ ही घंटे में सारे कपड़े बिक गए। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
कला ने किया जरूरतमंद महिलाओं का भला
लाजवंती बताती हैं कि फुलकारी की कला को हजारों महिलाओं को सिखाकर उन्हें आत्मनिर्भर बना चुकी हूं। वर्तमान में भी मेरे साथ पंजाब, हरियाणा, यूपी व राजस्थान तक की करीब 700 महिलाएं जुड़ी हैं। ज्यादातर जरूरतमंद थीं, जिनका गुजारा मुश्किल से होता था। आज इस कला की बदौलत वह अच्छी रोजी-रोटी तो कमा ही रही हैं, अन्य महिलाओं को भी सिखा रही हैं। लाजवंती ने बताया कि फुलकारी विदेशी महिलाएं भी खूब पसंद करती हैं। मैं अर्जेंटीना, कोलंबिया, चिली, जर्मनी में अपने कपड़ों की प्रदर्शनी लगा चुकी हूं। वहां इसे काफी पसंद किया गया। फुलकारी वाले कपड़ों की आज भी अच्छी खासी मांग है।
फुलकारी को नए कलेवर में लाने की कोशिश
लाजवंती बताती हैं कि लड़कियां सूट व साड़ी पहनना ज्यादा पसंद नहीं करती हैं। उन्हें स्टाल, क्रॉप टॉप व शार्ट कुर्ती ज्यादा पसंद है। इसलिए उनके हिसाब से इन कपड़ों पर फुलकारी के नए नए डिजाइन बना रही हूं। पहले केवल रेशम के धागों से फुलकारी की कढ़ाई होती थी, लेकिन अब इसमें स्टोन, मोती, जरकन और गोटा वगैरह का इस्तेमाल भी होने लगा है।
गैरों ने प्यार लुटाया, अपनों ने दर्द न जाना
लाजवंती को मलाल है कि केंद्र सरकार और कला के कद्रदानों ने भले ही उन्हें सराहा। मान सम्मान दिया। लेकिन पंजाब सरकार ने कभी पूछा तक नहीं। कैप्टन सरकार हो या वर्तमान की चन्नी सरकार, किसी ने भी पद्मश्री मिलने के बाद बधाई देने को फोन तक नहीं किया। वह कुछ भावुक भी हो जाती हैं। आंखें गीली हो जाती हैं। बताती हैं कि दोनों बेटे और दोनों बेटियां फुलकारी की कला में नेशनल मेरिट सर्टिफिकेट जीत चुके हैं।
पीढ़ियों के लिए संरक्षित रहनी चाहिए कला
लाजवंती का सपना है कि फुलकारी को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने व इसे जीवित रखने के लिए पटियाला में केंद्र सरकार एक आर्ट स्कूल स्थापित करे। जरूरत पड़ी तो इसके लिए जगह भी देने को तैयार हैं। बाकी मदद सरकार करे। जहां विभिन्न राज्यों से आकर युवा फुलकारी सीख सकें। इस कला के बल पर आत्मनिर्भर बन सकें। लाजवंती कहती हैं कि हस्तकला को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार इस पर लगाए 5 प्रतिशत जीएसटी को खत्म कर दे।
रुतबा खास, जीवन आम
1994 में लाजवंती को फुलकारी कला के क्षेत्र में काम के लिए पहला राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। अन्य कई तरह के प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित लाजवंती को पिछले महीने दिसंबर 2021 में महात्मा ज्योति राव फूले विश्वविद्यालय जयपुर की ओर से मानद उपाधि से नवाजा गया है। नवंबर 2021 में उन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किया गया।
रब ने बना दी जोड़ी में अनुष्का ने पहनी फुलकारी
बॉलीवुड फिल्म रब ने बना दी जोड़ी में अनुष्का शर्मा ने लाजवंती के हाथों से बने फुलकारी के कपड़े पहने थे। लाजवंती कंचन, परांठा बूटी, चोप, सूरजमुखी जैसे फुलकारी के 52 डिजाइन कपड़ों पर उतारने में माहिर हैं।