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पंजाब की राजनीति में नई सरगर्मी: शिअद-भाजपा गठबंधन पर सर्वे कर ली जा रही जनता की राय
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लखवीर सिंह लक्की
फतेहगढ़ साहिब। पंजाब की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर हलचल तेज हो गई है। जहां राज्य की प्रमुख राजनीतिक पार्टियां अपनी चुनावी रणनीतियां बनाने में जुटी हुई हैं, वहीं शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संभावित पुनः गठबंधन को लेकर चर्चा भी गर्म हो गई है। इसके लिए सर्वे कर लोगों से टेली कॉलिंग के जरिये उनकी राय ली जा रही है।
वर्ष 2020-21 में किसान आंदोलन के दौरान शिअद ने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ केंद्र सरकार के निर्णय का विरोध किया था और 27 सितंबर 2020 को अपना दशकों पुराना गठबंधन भाजपा से तोड़ लिया था। उस वक्त शिअद ने जट सिख वोटों के टूटने और केंद्र सरकार के खिलाफ बढ़ते आक्रोश को देखते हुए यह निर्णय लिया था। इससे पंजाब की राजनीति में बड़ा बदलाव आया था। इस सर्वे में मतदाताओं से उनके राजनीतिक दृष्टिकोण के बारे में राय ली जा रही है। हालांकि यह सर्वे किस पार्टी की ओर से करवाया जा रहा है इसकी जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है। फिर भी, यह स्पष्ट है कि यह सर्वे गठबंधन की संभावना और पंजाब की राजनीतिक दिशा को समझने का प्रयास है।
सर्वे में दिए जा रहे विकल्प
इस सर्वे में मतदाताओं को अलग-अलग विकल्प दिए जा रहे हैं। 1 नंबर आम आदमी पार्टी की सरकार के समर्थन में, 2 नंबर कांग्रेस की सरकार के पक्ष में और 3 नंबर अकाली-भाजपा गठबंधन के समर्थन में। यह सर्वे पार्टी के साथ-साथ वोटरों के रुझान को जानने का एक तरीका है। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार इस सर्वे का उद्देश्य आने वाले चुनावों के लिए ज़मीनी हालात और मतदाताओं की मानसिकता को समझना है। यदि शिअद और भाजपा का गठबंधन फिर से बनता है, तो यह पंजाब की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर सकता है। इस समय राजनीतिक गलियारों में इस सर्वे को लेकर चर्चाएं गर्म हैं, और आम जनता भी इस संभावित गठबंधन को लेकर अपनी-अपनी राय बना रही है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि जनता का रुख किस दिशा में जाता है और पंजाब की राजनीति किस करवट बैठती है। फिलहाल यह सर्वे गठबंधन की संभावनाओं को लेकर चर्चा का नया विषय बन चुका है। संवाद
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फतेहगढ़ साहिब। पंजाब की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर हलचल तेज हो गई है। जहां राज्य की प्रमुख राजनीतिक पार्टियां अपनी चुनावी रणनीतियां बनाने में जुटी हुई हैं, वहीं शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संभावित पुनः गठबंधन को लेकर चर्चा भी गर्म हो गई है। इसके लिए सर्वे कर लोगों से टेली कॉलिंग के जरिये उनकी राय ली जा रही है।
वर्ष 2020-21 में किसान आंदोलन के दौरान शिअद ने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ केंद्र सरकार के निर्णय का विरोध किया था और 27 सितंबर 2020 को अपना दशकों पुराना गठबंधन भाजपा से तोड़ लिया था। उस वक्त शिअद ने जट सिख वोटों के टूटने और केंद्र सरकार के खिलाफ बढ़ते आक्रोश को देखते हुए यह निर्णय लिया था। इससे पंजाब की राजनीति में बड़ा बदलाव आया था। इस सर्वे में मतदाताओं से उनके राजनीतिक दृष्टिकोण के बारे में राय ली जा रही है। हालांकि यह सर्वे किस पार्टी की ओर से करवाया जा रहा है इसकी जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है। फिर भी, यह स्पष्ट है कि यह सर्वे गठबंधन की संभावना और पंजाब की राजनीतिक दिशा को समझने का प्रयास है।
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सर्वे में दिए जा रहे विकल्प
इस सर्वे में मतदाताओं को अलग-अलग विकल्प दिए जा रहे हैं। 1 नंबर आम आदमी पार्टी की सरकार के समर्थन में, 2 नंबर कांग्रेस की सरकार के पक्ष में और 3 नंबर अकाली-भाजपा गठबंधन के समर्थन में। यह सर्वे पार्टी के साथ-साथ वोटरों के रुझान को जानने का एक तरीका है। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार इस सर्वे का उद्देश्य आने वाले चुनावों के लिए ज़मीनी हालात और मतदाताओं की मानसिकता को समझना है। यदि शिअद और भाजपा का गठबंधन फिर से बनता है, तो यह पंजाब की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर सकता है। इस समय राजनीतिक गलियारों में इस सर्वे को लेकर चर्चाएं गर्म हैं, और आम जनता भी इस संभावित गठबंधन को लेकर अपनी-अपनी राय बना रही है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि जनता का रुख किस दिशा में जाता है और पंजाब की राजनीति किस करवट बैठती है। फिलहाल यह सर्वे गठबंधन की संभावनाओं को लेकर चर्चा का नया विषय बन चुका है। संवाद
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