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मानसून: जुलाई से बेहतर रहेगा अगस्त, लेकिन सामान्य से ज्यादा नहीं होगी बारिश

Sat, 03 Aug 2024 08:50 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 03 Aug 2024 08:50 PM IST
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Monsoon: August will be better than July, but there will not be more rain than normal
-डायरेक्टर सुरिंदर पाल बोले- इस बार बंगाल की खाड़ी रही कमजोर, वहां अच्छे से नहीं बन पाईं हवाएं
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-बारिश कम रहने के कारण उमस से फसलों को लग रहीं बीमारियां, भू-जल का अधिक हो रहा इस्तेमाल
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अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। पंजाब में मानसून के लिहाज से जुलाई महीना भले ही ठीक न रहा हो और सामान्य के मुकाबले 44 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई हो, लेकिन अगस्त महीना इससे बेहतर रहने की संभावना जताई जा रही है। फिर भी चालू महीने में भी बारिश सामान्य से अधिक दर्ज नहीं की जाएगी, जबकि मौसम विभाग ने इस बार पंजाब में मानसून की बारिश सामान्य से अधिक रहने की भविष्यवाणी की थी।
मौसम विभाग के चंडीगढ़ केंद्र के डायरेक्टर सुरिंदर पाल के मुताबिक अगस्त के पहले सप्ताह में बारिश सामान्य रहने का अनुमान है, लेकिन दूसरे हफ्ते में बारिश कम दर्ज की जा सकती है। वहीं, तीसरे व चौथे हफ्ते में भी ज्यादा बारिश की संभावना नहीं है। उन्होंने बताया कि बंगाल की खाड़ी काफी कमजोर रही। वहां अच्छे से हवाएं बन नहीं पाईं। इस कारण पंजाब में मानसून अब तक कमजोर ही रहा है। इसके साथ ही इस बार मानसून में अब तक पंजाब में कोई पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय नहीं हुआ। इससे ज्यादा बारिश हो सकती थी। हालांकि, अगस्त महीने के इन तीन दिनों में पंजाब में सामान्य से 30 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई है।
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क्या होता है... जब कमजोर रहता है मानसून
डायरेक्टर ने बताया कि जब मानसून कमजोर रहता है। ऐसे में बड़े बादल नहीं बन पाते हैं। छोटे बादल ही बनते हैं और हवाएं भी कम तेज रहती हैं। यह बादल उन्हीं जगहों पर बरसते हैं, जहां वाटर बाॅडीज होती हैं या फिर पहाड़ या हरियाली अधिक रहती है। इससे कुछ खास पाॅकेट में ही बारिश हो जाती है। खेतीबाड़ी माहिरों के मुताबिक बारिश की कमी के चलते फसलों की सिंचाई में भू-जल का अधिक इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे में पंजाब में पानी का संकट और गहरा सकता है। पंजाब के कई इलाके पहले ही डार्क जोन में हैं। बारिश की कमी से जमीन के नीचे वाटर रिचार्जिंग भी नहीं हो पाती है। उमस भरी इस गरमी में फसलों को बीमारियां होने का खतरा बढ़ रहा है। यही वजह है कि पंजाब के कई जिलों में धान के पौधे बौनेपन का शिकार हो रहे हैं। फसलें वायरस की मार में आ गई हैं। सफेद पीठ वाले टिड्डे के कारण होने वाली इस बीमारी का प्रमुख कारण माहिर उमस भरी गरमी को मान रहे हैं। खेतीबाड़ी विभाग पंजाब के डायरेक्टर जसवंत सिंह ने खुद इसकी पुष्टि की है। मौसम विभाग के चंडीगढ़ केंद्र के डायरेक्टर सुरिंदर पाल ने माना कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण मौसम में अनिशचितता आ रही है। इस बार संभावना के विपरीत मानसून अच्छा नहीं जा रहा है। जबकि पिछले साल उम्मीद के विपरीत जुलाई में काफी अधिक बारिश पड़ने से पंजाब के कइ जिलों में बाढ़ आ गई थी।
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