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आज भी मजदूरों की हालत ठीक नहींः निर्मल सिंह
ब्यूरो, अमर उजाला, पटियाला
Updated Tue, 03 May 2016 03:08 PM IST
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पटियाला में मजदूर दिवस के कार्यक्रम में मांगों को लेकर नारेबाजी करती पीआरटीसी वर्कर्स यूनियन एटक के सदस्य।
- फोटो : अमर उजाला
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शहर में मजदूर दिवस को समर्पित विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इनमें सबसे पहले अमेरिका के शिकागों में 130 साल पहले इस दिन शहीद हुए मजदूर लीडरों को श्रद्धांजलि भेंट की गई। साथ ही चिंता जताई गई कि आज भी देश में मजदूरों की हालत में कोई ज्यादा सुधार नहीं है। केंद्र व राज्य सरकारों की ओर से लेबर कानूनों की अनदेखी की जा रही है।
पीआरटीसी वर्कर्स यूनियन एटक की ओर से मई दिवस को समर्पित कार्यक्रम में यूनियन का झंडा फहराया गया। इसके बाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कामरेड निर्मल सिंह धालीवाल ने कहा कि आज भी मजदूरों की हालत अच्छी नहीं है। मजदूरों ने पिछले समय में हड़तालें करके जो लेबर कानून बनाए, वह उन्हें कुछ राहत देते हैं। लेकिन मौजूदा केंद्र व राज्य सरकारों की ओर से इन लेबर कानूनों की भी अनदेखी की जा रही है। ठेकेदारी सिस्टम के जरिये मजदूरों का शोषण किया जा रहा है। मजदूरों से 12 से लेकर 14 घंटे तक काम लिया जा रहा है। सरकारी विभागों में रेगुलर भर्ती बंद है। मिल-जुलकर सरकार के अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाकर मजदूर वर्ग बच सकता है और अपनी मांगें मनवाई जा सकती हैं।
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पीआरटीसी वर्कर्स यूनियन एटक की ओर से मई दिवस को समर्पित कार्यक्रम में यूनियन का झंडा फहराया गया। इसके बाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कामरेड निर्मल सिंह धालीवाल ने कहा कि आज भी मजदूरों की हालत अच्छी नहीं है। मजदूरों ने पिछले समय में हड़तालें करके जो लेबर कानून बनाए, वह उन्हें कुछ राहत देते हैं। लेकिन मौजूदा केंद्र व राज्य सरकारों की ओर से इन लेबर कानूनों की भी अनदेखी की जा रही है। ठेकेदारी सिस्टम के जरिये मजदूरों का शोषण किया जा रहा है। मजदूरों से 12 से लेकर 14 घंटे तक काम लिया जा रहा है। सरकारी विभागों में रेगुलर भर्ती बंद है। मिल-जुलकर सरकार के अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाकर मजदूर वर्ग बच सकता है और अपनी मांगें मनवाई जा सकती हैं।
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