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देशद्रोह के केस से माओवादी नेता कोबाद गांधी बरी
ब्यूरो, अमर उजाला, पटियाला
Updated Wed, 19 Oct 2016 03:49 PM IST
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Court
- फोटो : डेमो फोटो
प्रतिबंधित जत्थेबंदी कम्युनिस्ट पार्टी माओवादी का मेंबर बताकर पटियाला पुलिस की ओर से छह साल पहले थाना सदर में देशद्रोह के मामले में नामजद कोबाद गांधी को पटियाला की अदालत ने बरी कर दिया। पुलिस की ओर से सख्त सुरक्षा प्रबंध के अधीन यहां एडिशनल सेशन जज मोहम्मद गुलजार की अदालत में अल्पसंख्यक पारसी धर्म के साथ संबंधित 70 साल के कोबाद गांधी को पेश किया गया।
कोबाद गांधी के खिलाफ देश भर में देशद्रोह जैसे 15 मामले दर्ज हुए थे और इनमें से दो में वह बरी हो गया है। अब उसको तेलंगाना ले जाया जाएगा। तत्कालीन डीएसपी देहाती हरदविंदर सिंह संधू की शिकायत पर थाना सदर में 23 जनवरी 2010 को 10, 13, 18, 20 अनला फुल एक्टिविटी प्रीवेंशन एक्ट 2008 और भारतीय दंडावली की धारा 419 और 120-बी तहत दर्ज किए गए मामले में कोबाद गांधी को नामजद किया गया था।
इस केस में पुलिस का तर्क था कि गांधी ने 2009 दौरान पंजाबी यूनिवर्सिटी में भड़काऊ भाषण देते हुए लोकतंत्रीय सरकार तबदील किए जाने बाबत लोगों को भड़काया था। कोबाद गांधी की पेशी के दौरान बचाव पक्ष के वकील बरजिंदर सिंह सोढी मौजूद रहे। उन्होंने तर्क दिया कि पुलिस गांधी की माओवादी जत्थेबंदी की मेंबरशिप साबित नहीं कर सकी। उसको पंजाबी नहीं आती और भाषण किया गया साबित नहीं हुआ।
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साथ ही तर्क दिया कि इस मामले मेंशिकायतकर्ता डीएसपी हरदविंदर सिंह संधू ही जांच अधिकारी था, जबकि ऐसा कानूनी तौर पर सही नहीं। दूसरा जिस दिल्ली वाले देश द्रोह के मामले के आधार पर गांधी खिलाफ पटियाला में पर्चा दर्ज किया गया। उस केस में वह दिल्ली से बरी हो चुका है। मुख्य गवाह बलजिंदर भारद्वाज भी अपने बयानों से मुकर चुका है। इसके अलावा एक अन्य गवाह अमरीक सिंह ढीलवाल सजायाफ्ता व्यक्ति है और गवाहों के बयान आपस में मेल नहीं खाते हैं।
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कोबाद गांधी के खिलाफ देश भर में देशद्रोह जैसे 15 मामले दर्ज हुए थे और इनमें से दो में वह बरी हो गया है। अब उसको तेलंगाना ले जाया जाएगा। तत्कालीन डीएसपी देहाती हरदविंदर सिंह संधू की शिकायत पर थाना सदर में 23 जनवरी 2010 को 10, 13, 18, 20 अनला फुल एक्टिविटी प्रीवेंशन एक्ट 2008 और भारतीय दंडावली की धारा 419 और 120-बी तहत दर्ज किए गए मामले में कोबाद गांधी को नामजद किया गया था।
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इस केस में पुलिस का तर्क था कि गांधी ने 2009 दौरान पंजाबी यूनिवर्सिटी में भड़काऊ भाषण देते हुए लोकतंत्रीय सरकार तबदील किए जाने बाबत लोगों को भड़काया था। कोबाद गांधी की पेशी के दौरान बचाव पक्ष के वकील बरजिंदर सिंह सोढी मौजूद रहे। उन्होंने तर्क दिया कि पुलिस गांधी की माओवादी जत्थेबंदी की मेंबरशिप साबित नहीं कर सकी। उसको पंजाबी नहीं आती और भाषण किया गया साबित नहीं हुआ।
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साथ ही तर्क दिया कि इस मामले मेंशिकायतकर्ता डीएसपी हरदविंदर सिंह संधू ही जांच अधिकारी था, जबकि ऐसा कानूनी तौर पर सही नहीं। दूसरा जिस दिल्ली वाले देश द्रोह के मामले के आधार पर गांधी खिलाफ पटियाला में पर्चा दर्ज किया गया। उस केस में वह दिल्ली से बरी हो चुका है। मुख्य गवाह बलजिंदर भारद्वाज भी अपने बयानों से मुकर चुका है। इसके अलावा एक अन्य गवाह अमरीक सिंह ढीलवाल सजायाफ्ता व्यक्ति है और गवाहों के बयान आपस में मेल नहीं खाते हैं।