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अपने घर में भी है रोटी: कनाडा की पीआर छोड़ घर लाैटे मनमीत को बहन ने कहा था पागल, अब खेती से तबड़ा मुनाफा
Sat, 22 Feb 2025 03:29 PM IST
निवेदिता वर्मा
रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला
रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 22 Feb 2025 03:29 PM IST
सार
पटियाला के गांव अलीपुर के 37 साल के मनमीत सिंह 2014 में कनाडा गए थे। उनकी बहन वहीं रहती है। कुछ माह बाद ही उन्हें पीआर मिल गई थी। अच्छी कमाई के बावजूद मन में एक खालीपन था। जिस कारण 2019 में मनमीत वापस लाैट आए।
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मनमीत सिंह
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कनाडा की पीआर और वहां हर घंटे डाॅलरों के रूप में होने वाली मोटी कमाई के बावजूद दिल में कसक थी कि विदेश सरजमीं पर अपने देश जैसा अपनापन नहीं है और पंजाब की मिट्टी की वो सौंधी-सौंधी खुशबू के लिए भी मन तरसता था। बस फिर क्या था कि पटियाला के गांव अलीपुर के युवा किसान मनमीत सिंह ने एक ही झटके में डाॅलरों की चकाचौंध को त्यागा और अपने वतन की वापसी कर ली।
37 साल के मनमीत सिंह बताते हैं कि उनकी बहन कनाडा में रहती थी। साल 2014 में कनाडा का वीजा लगने के बाद जब वह वहां गए, तो कुछ ही महीनों के बाद उन्हें पीआर मिल गई थी। पीआर मिलने के बाद कनाडा के नागरिकों की तरह उन्हें सारी सुविधाएं मिलने लगी थीं। शुरुआत में उन्होंने एक फैक्टरी में काम किया, लेकिन बाद में ट्रक ड्राइवरी करने लगे और इससे वह एक घंटे का 28 डाॅलर तक कमा लेते थे। सब अच्छा जा रहा था और बढि़या कमाई हो रही थी। गांव अलीपुर में अपनी पत्नी व बेटे को हर महीने काफी डाॅलर भेज पा रहे थे, लेकिन आसपास के लोगों में अपनेपन की कमी देख दिल में टीस उठती थी, अपने खेतों की बहुत याद आती थी। पंजाब की मिट्टी की सौंधी-सौंधी खुशबू के लिए मन तरसता था।
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37 साल के मनमीत सिंह बताते हैं कि उनकी बहन कनाडा में रहती थी। साल 2014 में कनाडा का वीजा लगने के बाद जब वह वहां गए, तो कुछ ही महीनों के बाद उन्हें पीआर मिल गई थी। पीआर मिलने के बाद कनाडा के नागरिकों की तरह उन्हें सारी सुविधाएं मिलने लगी थीं। शुरुआत में उन्होंने एक फैक्टरी में काम किया, लेकिन बाद में ट्रक ड्राइवरी करने लगे और इससे वह एक घंटे का 28 डाॅलर तक कमा लेते थे। सब अच्छा जा रहा था और बढि़या कमाई हो रही थी। गांव अलीपुर में अपनी पत्नी व बेटे को हर महीने काफी डाॅलर भेज पा रहे थे, लेकिन आसपास के लोगों में अपनेपन की कमी देख दिल में टीस उठती थी, अपने खेतों की बहुत याद आती थी। पंजाब की मिट्टी की सौंधी-सौंधी खुशबू के लिए मन तरसता था।
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बहन ने कहा, तू पागल है
मनमीत सिंह बताते हैं कि बस फिर क्या था बहन से बात की कि वह वापस अपने गांव जाकर खेतीबाड़ी करना चाहते हैं। बहन ने कहा कि तू पागल है, जो पीआर छोड़कर अब वापस जाकर खेतीबाड़ी करेगा। इससे तुझे क्या बचेगा। आगे जाकर बेटे को अच्छी शिक्षा कैसे देगा। मनमीत ने बताया कि अमेरिका में बसे उससे ममेरे भाई ने भी फोन करके कहा कि अगर कनाडा में नहीं रहना है तो अमेरिका आ जा। कुछ सालों में अमेरिका की पीआर मिल जाएगी, लेकिन मनमीत ने अपने दिल की सुनी और पंजाब की सरजमीं पर 2019 में लौट आए।खेती में लगाया मन और अब अच्छा मुनाफा
इसके बाद उन्होंने मुड़कर कनाडा या फिर अमेरिका का रुख नहीं किया। वर्ष 2028 तक का उनका अमेरिका का वीजा लगा हुआ है। मनमीत सिंह पिछले छह सालों से अब अपने गांव अलीपुर में रहकर 40 किला जमीन पर खेतीबाड़ी कर रहे हैं। मनमीत सिंह बताते हैं कि उनकी खुद की 15 किला जमीन है, बाकी उन्होंने ठेके पर ले रखी है। इस जमीन पर वह आलू, मक्की, धान व गेहूं की खेती करते हैं और सालाना अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।मनमीत कहते हैं कि भले ही वह कनाडा जितना कमाई यहां न कर सकें, लेकिन इतना संतोष है कि वह खेतीबाड़ी करके इज्जत की रोटी कमा रहे हैं। इतना मुनाफा कमा रहे हैं कि अपने बेटे व पत्नी को अच्छी जिंदगी दे पा रहे हैं। आजकल के युवा होड़ में विदेशों का रुख कर रहे हैं। विदेश जाने की चाह में वह अपनी खेतीबाड़ी योग्य जमीन व घर बेच रहे हैं और लाखों रुपये खर्च करके डंकी लगाकर भी अमेरिका जाने को तैयार हैं। उनकी युवाओं से यही अपील है कि अपने घर में भी रोटी है। यहीं खेतीबाड़ी करके इज्जत की रोटी खाएं। गैरकानूनी ढंग से इस तरह से विदेश जाकर अपने देश का नाम बदनाम न करें।