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संगीत सब बंधनों से होता है मुक्त : पम्मी बाई
ब्यूरो, अमर उजाला, पटियाला
Updated Sun, 06 Nov 2016 02:58 PM IST
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पटियाला के खालसा कालेज में आयोजित नेशनल कांफ्रेंस में पीयू के डा. गुरनाम सिंह को सम्मानित करते कालेज प्रिंसिपल डा. धरमिंदर सिंह ऊभा।
- फोटो : अमर उजाला
जानेमाने लोक गायक परमजीत सिंह सिद्धू उर्फ पम्मी बाई ने कहा कि संगीत की हदें-सरहदें नहीं होती हैं, यह सब बंधनों से मुक्त होता है। संगीत विरासत में मिलता है, यह अकादमिक बंदिशों का मोहताज नहीं होता है। उन्होंने लोक संगीत की महत्ता संबंधी कहा कि सूफी संगीत, गुरमत संगीत, शास्त्रीय संगीत सभी की ही बुनियाद लोक संगीत है। वह खालसा कालेज के संगीत गायन विभाग की ओर से यूजीसी स्पांसर एक दिवसीय नेशनल कांफ्रेंस को संबोधित कर रहे थे।
इस मौके पर पंजाबी यूनिवर्सिटी के डीन अकादमिक और गुरमत संगीत के माहिर डा. गुरनाम सिंह मुख्य मेहमान रहे। उन्होंने कहा कि आज के समय में संगीत घरानों का प्रभाव कम होकर अकादमिक संगीत का दौर चल गया है। इसलिए बेहद जरूरी है कि विभिन्न शैलियों से जुड़े संगीत को पुर्नप्रभाषित किया जाए। कालेज के प्रिंसिपल डा. धरमिंदर सिंह ऊभा ने डा. गुरनाम सिंह और पम्मी बाई के जीवन संघर्ष और प्राप्तियों संबंधी जानकारी दी। विभाग के प्रमुख डा. जगजीत सिंह ने कान्फ्रेंस के विषय पर प्रकाश डाला।
इस मौके पर पंडित जवाहर लाल नेहरू सरकारी पीजी कालेज फरीदाबाद से प्रोफेसर भुपिंदर मल्होत्रा, अंबाला से रिटायर प्रिंसिपल डा. अमृतपाल सिंह, सरकारी कालेज फार गर्ल्स गुरुग्राम हरियाणा से डा. लोकेश शर्मा और सरकारी कालेज दौलतपुर चौक हिमाचल से डा. नीरज गांधी ने संगीत की पेशकारी दी। इस मौके पर डा. मधुरेश पाठक और डा. भैरवी शर्मा ने तबला और सितार की जुगलबंदी पेश की, जिसे सभी ने काफी पसंद किया। कान्फ्रेंस में पंजाब व अन्य राज्यों से विद्वानों ने अपने शोध पत्र पेश किए और विचार चर्चा की।
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इस मौके पर पंजाबी यूनिवर्सिटी के डीन अकादमिक और गुरमत संगीत के माहिर डा. गुरनाम सिंह मुख्य मेहमान रहे। उन्होंने कहा कि आज के समय में संगीत घरानों का प्रभाव कम होकर अकादमिक संगीत का दौर चल गया है। इसलिए बेहद जरूरी है कि विभिन्न शैलियों से जुड़े संगीत को पुर्नप्रभाषित किया जाए। कालेज के प्रिंसिपल डा. धरमिंदर सिंह ऊभा ने डा. गुरनाम सिंह और पम्मी बाई के जीवन संघर्ष और प्राप्तियों संबंधी जानकारी दी। विभाग के प्रमुख डा. जगजीत सिंह ने कान्फ्रेंस के विषय पर प्रकाश डाला।
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इस मौके पर पंडित जवाहर लाल नेहरू सरकारी पीजी कालेज फरीदाबाद से प्रोफेसर भुपिंदर मल्होत्रा, अंबाला से रिटायर प्रिंसिपल डा. अमृतपाल सिंह, सरकारी कालेज फार गर्ल्स गुरुग्राम हरियाणा से डा. लोकेश शर्मा और सरकारी कालेज दौलतपुर चौक हिमाचल से डा. नीरज गांधी ने संगीत की पेशकारी दी। इस मौके पर डा. मधुरेश पाठक और डा. भैरवी शर्मा ने तबला और सितार की जुगलबंदी पेश की, जिसे सभी ने काफी पसंद किया। कान्फ्रेंस में पंजाब व अन्य राज्यों से विद्वानों ने अपने शोध पत्र पेश किए और विचार चर्चा की।
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