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पाबंदी के बाद भी धान की बिजाई जोरों पर
ब्यूरो, अमर उजाला, संगरूर
Updated Tue, 14 Jun 2016 05:47 PM IST
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संगरूर जिले के सुनाम इलाके में धान की बिजाई करते खेत मजदूर।
- फोटो : अमर उजाला
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सरकार के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए जिले के किसान 15 जून से पहले ही धान की बिजाई में जुट गए हैं। हालांकि सरकार ने 15 जून से पहले धान की बिजाई करने पर पाबंदी लगाई हुई है, लेकिन भाकियू एकता उग्राहां के आह्वान तथा मौसम के मिलते साथ के मद्देनजर किसानों ने व्यापक स्तर पर 10 जून से ही धान ही बिजाई शुरू कर दी है। पिछले दो दिन से हो रही बारिश के चलते अधिकांश किसान पूरे जोरशोर से बिजाई में जुट गए।
गौरतलब है कि सरकार ने गिरते भूजल को नियंत्रित करने के उद्देश्य से 15 जून से पहले धान की बिजाई करने पर पाबंदी लगाई है। सरकार का तर्क है कि 15 जून के बाद पंजाब में मानसून सक्रिय होगा और ऐसी स्थिति में जमीन के नीचे से पानी निकालने की आवश्यकता कम हो जाएगी। इस संबंधी जिला प्रशासन ने भी आदेश जारी किए हैं कि इन आदेश का उल्लंघना नहीं होना चाहिए।
भाकियू का यह है तर्क
भाकियू के जिला सचिव दरबारा सिंह छाजला ने कहा कि धान की कुछ किस्में पकने में ज्यादा समय लेती हैं। ऐसे में 15 जून के बाद बिजाई करने पर धान में नमी की मात्रा ज्यादा आती है और फिर धान को बेचने में भारी दिक्कत आती है। इसके अलावा समय से पहले बारिश भी हो रही है और किसानों को इस बारिश का लाभ लेना चाहिए। सबसे अहम है कि 15 जून के बाद एकदम धान की बिजाई करने का दबाव बढ़ जाता है और लेबर भी महंगी मिलती है। सरकार को इन तमाम पहलुओं को ध्यान में रखते हुए फैसला करना चाहिए। यूनियन प्रशासन की कार्रवाई का विरोध करेगी।
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गौरतलब है कि सरकार ने गिरते भूजल को नियंत्रित करने के उद्देश्य से 15 जून से पहले धान की बिजाई करने पर पाबंदी लगाई है। सरकार का तर्क है कि 15 जून के बाद पंजाब में मानसून सक्रिय होगा और ऐसी स्थिति में जमीन के नीचे से पानी निकालने की आवश्यकता कम हो जाएगी। इस संबंधी जिला प्रशासन ने भी आदेश जारी किए हैं कि इन आदेश का उल्लंघना नहीं होना चाहिए।
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भाकियू का यह है तर्क
भाकियू के जिला सचिव दरबारा सिंह छाजला ने कहा कि धान की कुछ किस्में पकने में ज्यादा समय लेती हैं। ऐसे में 15 जून के बाद बिजाई करने पर धान में नमी की मात्रा ज्यादा आती है और फिर धान को बेचने में भारी दिक्कत आती है। इसके अलावा समय से पहले बारिश भी हो रही है और किसानों को इस बारिश का लाभ लेना चाहिए। सबसे अहम है कि 15 जून के बाद एकदम धान की बिजाई करने का दबाव बढ़ जाता है और लेबर भी महंगी मिलती है। सरकार को इन तमाम पहलुओं को ध्यान में रखते हुए फैसला करना चाहिए। यूनियन प्रशासन की कार्रवाई का विरोध करेगी।
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