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किसान आंदोलन: गृहमंत्री पर बरसे डल्लेवाल, कहा-संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को गलत जानकारी नहीं देनी चाहिए
Tue, 17 Dec 2024 08:19 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 17 Dec 2024 08:19 AM IST
सार
पंजाब के किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल खनाैरी बाॅर्डर पर आमरण अनशन पर बैठे हैं। उनकी सेहत में लगातार गिरावट जारी है।
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खनाैरी बाॅर्डर पर जगजीत डल्लेवाल।
- फोटो : फाइल
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विस्तार
खनौरी बाॅर्डर पर किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल का आमरण अनशन मंगलवार को 22वें दिन में प्रवेश कर गया। बिगड़ती सेहत के बावजूद डल्लेवाल ने सोमवार को मंच से गृह मंत्री अमित शाह पर हमला बोला।
डल्लेवाल ने कहा कि एमएसपी को लेकर संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को गलत जानकारी नहीं देनी चाहिए। डल्लेवाल ने कहा कि शाह कह रहे हैं कि किसानों को साढ़े तीन गुणा एमएसपी से बढ़कर रेट दिए जा रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि साल 2014 से लेकर अब तक मोदी सरकार के राज में गेहूं के रेट में केवल 825 रुपये की वृद्धि की है। यह 56 फीसदी की वृद्धि है। इसके मुकाबले खेती लागत 56.53 फीसदी तक बढ़ गई है।
डल्लेवाल ने कहा कि इससे साफ है कि किसानों को अपनी जेब से खर्च करना पड़ रहा है। अगर केंद्र की ओर से किसानों को एमएसपी से ज्यादा दिया जा रहा है, तो फिर एमएसपी की कानूनी गारंटी देने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। डल्लेवाल ने मंडियों में धान की खरीद न होने का मुद्दा उठाते इस पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि किसान देश के अन्नदाता हैं, उनके साथ केंद्र को जबर करने की बजाय मांगों को तुरंत स्वीकार करना चाहिए।
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डल्लेवाल ने कहा कि एमएसपी को लेकर संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को गलत जानकारी नहीं देनी चाहिए। डल्लेवाल ने कहा कि शाह कह रहे हैं कि किसानों को साढ़े तीन गुणा एमएसपी से बढ़कर रेट दिए जा रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि साल 2014 से लेकर अब तक मोदी सरकार के राज में गेहूं के रेट में केवल 825 रुपये की वृद्धि की है। यह 56 फीसदी की वृद्धि है। इसके मुकाबले खेती लागत 56.53 फीसदी तक बढ़ गई है।
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डल्लेवाल ने कहा कि इससे साफ है कि किसानों को अपनी जेब से खर्च करना पड़ रहा है। अगर केंद्र की ओर से किसानों को एमएसपी से ज्यादा दिया जा रहा है, तो फिर एमएसपी की कानूनी गारंटी देने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। डल्लेवाल ने मंडियों में धान की खरीद न होने का मुद्दा उठाते इस पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि किसान देश के अन्नदाता हैं, उनके साथ केंद्र को जबर करने की बजाय मांगों को तुरंत स्वीकार करना चाहिए।
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