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सरकार के खिलाफ भूख हड़ताल पर बैठे मुलाजिम
ब्यूरो, अमर उजाला, पटियाला
Updated Wed, 16 Mar 2016 02:41 PM IST
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सरकार के खिलाफ भूख हड़ताल पर बैठे मुलाजिम
- फोटो : amarujala
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द क्लास फोर्थ गवर्नमेंट इंप्लाइज यूनियन के आह्वान पर मंगलवार को मिनी सचिवालय में विभिन्न सरकारी व अर्द्ध सरकारी विभागों के दर्जा चार मुलाजिमों ने 72 घंटों के लिए श्रृंखलाबद्ध भूख हड़ताल शुरू की।
केंद्रीय सातवें वेतन आयोग की ओर से चौथा दर्जा कर्मचारियों को ओहदा खत्म करने की सिफारिश करने, तनख्वाह भत्तों की सिफारिश न करने का विरोध किया गया।
साथ ही मुलाजिमों की कई जायज मांगें भी उठाई गईं। मौके पर मुलाजिमों ने केंद्र व राज्य सरकारों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और धरना दिया।
यूनियन के प्रधान दर्शन सिंह लुबाना, महासचिव मोहन सिंह नेगी ने कहा कि मुलाजिमों व वर्किंग क्लास को केंद्रीय व पंजाब के बजट से बहुत उम्मीदें थीं लेकिन सरमायेदारों के पक्ष वाले बजट को पेश किया गया है।
मजदूरों के मिनीमम वेज में बढ़ोतरी करने, कांट्रेक्ट व आउट सोर्सिंग सिस्टम के तहत वर्करों की हो रही लूट बंद करने, पब्लिक सेक्टर का निजीकरण रोकने, बेरोजगारी की समस्या के खात्मे के लिए विभागों में नई भरती रेगुलर करने की मांग की गई। साथ ही दिहाड़ीदार, वर्कचार्ज, पार्ट टाइम और ठेकेदारी प्रथा के तहत लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारियों की सेवाएं नियमित करने, कर्मचारियों के 23 माह के डीए का बकाया देने की भी मांग की गई। मांगें पूरी न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी गई।
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केंद्रीय सातवें वेतन आयोग की ओर से चौथा दर्जा कर्मचारियों को ओहदा खत्म करने की सिफारिश करने, तनख्वाह भत्तों की सिफारिश न करने का विरोध किया गया।
साथ ही मुलाजिमों की कई जायज मांगें भी उठाई गईं। मौके पर मुलाजिमों ने केंद्र व राज्य सरकारों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और धरना दिया।
यूनियन के प्रधान दर्शन सिंह लुबाना, महासचिव मोहन सिंह नेगी ने कहा कि मुलाजिमों व वर्किंग क्लास को केंद्रीय व पंजाब के बजट से बहुत उम्मीदें थीं लेकिन सरमायेदारों के पक्ष वाले बजट को पेश किया गया है।
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मजदूरों के मिनीमम वेज में बढ़ोतरी करने, कांट्रेक्ट व आउट सोर्सिंग सिस्टम के तहत वर्करों की हो रही लूट बंद करने, पब्लिक सेक्टर का निजीकरण रोकने, बेरोजगारी की समस्या के खात्मे के लिए विभागों में नई भरती रेगुलर करने की मांग की गई। साथ ही दिहाड़ीदार, वर्कचार्ज, पार्ट टाइम और ठेकेदारी प्रथा के तहत लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारियों की सेवाएं नियमित करने, कर्मचारियों के 23 माह के डीए का बकाया देने की भी मांग की गई। मांगें पूरी न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी गई।
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