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सेहत कर्मियों ने जाम लगाकर दिया धरना
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पटियाला के सरकारी राजिंदरा अस्पताल के बाहर जाम लगाकर प्रदर्शन करते सेहत कर्मचारी। अमर उजाला
- फोटो : PATIALA
अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। सरकारी राजिंदरा अस्पताल के बाहर पटियाला-संगरूर रोड पर शुक्रवार को दूसरे दिन भी जाम लगाकर राजिंदरा, टीबी अस्पताल, मेडिकल व डेंटल कालेजों के पैरामेडिकल व क्लेरिकल स्टाफ ने जोरदार रोष प्रदर्शन किया। साथ ही सेहत परिवार कल्याण पंजाब और खोज मेडिकल शिक्षा पंजाब के कामन कैडर को अलग-अलग करने व कई श्रेणियों के पदों को खत्म करने का विरोध किया गया।
मुलाजिम नेता जतिंदर, गुरप्रीत सिंह आदि ने कहा कि जिस तरह केंद्र की मोदी सरकार ने किसानों पर खेती कानून थोपे हैं। उसी तर्ज पर पंजाब सरकार की ओर से सेहत कर्मियों पर गलत फैसले थोपे जा रहे हैं। मेडिकल शिक्षा और डायरेक्टर सेहत व परिवार भलाई के केेडरों को अलग-अलग किया जा रहा है। जिसका सेहत कर्मी विरोध करते हैं।
मांग की गई कि पहले की तरह इन केडरों को एक ही रखा जाए। साथ ही पंजाब सरकार की ओर से बड़ी संख्या में पदों को खत्म करने का भी विरोध किया गया। सेहत कर्मियों ने कहा कि सरकार ने खाली पद तो क्या भरने थे, बल्कि जो थे, उन पदों को भी खत्म कर दिया है। इससे पंजाब सरकार के घर-घर रोजगार देने के दावों की पोल खुलती है। इसके अलावा मांग की गई कि कच्चे कर्मचारियों समेत कोरोना योद्धाओं को पक्का किया जाए।
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पटियाला। सरकारी राजिंदरा अस्पताल के बाहर पटियाला-संगरूर रोड पर शुक्रवार को दूसरे दिन भी जाम लगाकर राजिंदरा, टीबी अस्पताल, मेडिकल व डेंटल कालेजों के पैरामेडिकल व क्लेरिकल स्टाफ ने जोरदार रोष प्रदर्शन किया। साथ ही सेहत परिवार कल्याण पंजाब और खोज मेडिकल शिक्षा पंजाब के कामन कैडर को अलग-अलग करने व कई श्रेणियों के पदों को खत्म करने का विरोध किया गया।
मुलाजिम नेता जतिंदर, गुरप्रीत सिंह आदि ने कहा कि जिस तरह केंद्र की मोदी सरकार ने किसानों पर खेती कानून थोपे हैं। उसी तर्ज पर पंजाब सरकार की ओर से सेहत कर्मियों पर गलत फैसले थोपे जा रहे हैं। मेडिकल शिक्षा और डायरेक्टर सेहत व परिवार भलाई के केेडरों को अलग-अलग किया जा रहा है। जिसका सेहत कर्मी विरोध करते हैं।
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मांग की गई कि पहले की तरह इन केडरों को एक ही रखा जाए। साथ ही पंजाब सरकार की ओर से बड़ी संख्या में पदों को खत्म करने का भी विरोध किया गया। सेहत कर्मियों ने कहा कि सरकार ने खाली पद तो क्या भरने थे, बल्कि जो थे, उन पदों को भी खत्म कर दिया है। इससे पंजाब सरकार के घर-घर रोजगार देने के दावों की पोल खुलती है। इसके अलावा मांग की गई कि कच्चे कर्मचारियों समेत कोरोना योद्धाओं को पक्का किया जाए।
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