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आधे दिन से लेकर 15  दिन का कोयला बचा, थर्मलों की तकरीबन सभी यूनिट चलाने से समस्या गहराई

Mon, 28 Mar 2022 10:42 PM IST
Punjab Bureau पंजाब ब्‍यूरो
Updated Mon, 28 Mar 2022 10:42 PM IST
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Half a day's to 15'days of coal left, the problem deepens due to running almost all the units of thermals
पटियाला। प्रदेश के थर्मलों की तकरीबन सभी यूनिट चलाने से कोयले का संकट गहरा गया है। इस समय थर्मलों में मात्र आधे दिन से लेकर 15 दिनों का कोयला शेष है, जबकि तय नियमों के मुताबिक हर थर्मल में 25 से 30 दिनों का कोयला होना जरूरी है। जिससे बिजली सप्लाई प्रभावित होने कारण पावरकॉम को सोमवार को भी बाहर से महंगे दामों पर बिजली की खरीद करनी पड़ी।
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पंजाब में बिजली की बढ़ी मांग के चलते और बाहर से महंगे दाम पर बिजली मिलने के मद्देनजर पावरकॉम ने हाल ही में अपने दोनों थर्मलों के आठ में से सात यूनिटों को चला लिया है। सोमवार को रोपड़ के चार में से तीन और लहरा मुहब्बत के चारों यूनिट चालू रहे। इनसे पावरकॉम को 1413 मेगावाट बिजली की सप्लाई हुई। जबकि प्राइवेट में राजपुरा के दो में से एक, तलवंडी साबो के तीनों यूनिट और गोइंदवाल साहिब का एक यूनिट सोमवार को भी चालू रहा। इनसे पावरकॉम को 1922 मेगावाट और हाइडल प्रोजेक्टों से 371 मेगावाट बिजली उपलब्ध हुई। इस तरह से पावरकॉम को सोमवार को अपने सभी स्रोतों से कुल 3869 बिजली मिली, लेकिन बिजली की मांग 7190 मेगावाट के करीब रही। जिसे पूरा करने के लिए पावरकॉम को बाहर से 3321 मेगावाट बिजली आठ रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से लेनी पड़ी। लेकिन खास बात यह है कि तकरीबन सभी यूनिटों को चलाने के चलते थर्मलों में जो कोयले का स्टाक पहले ही काफी कम था, वह अब बिल्कुल खत्म होने की कगार पर है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक तलवंडी साबो में मात्र आधे दिन, राजपुरा में आठ दिनों, गोइंदवाल साहिब में एक दिन का, रोपड़ में 14 और लहरा मुहब्बत में 15 दिनों का कोयला ही बचा है। कोयले के इस कम होते स्टाक को देखते हुए पावरकाम प्रशासन इस समय काफी चिंता में है। शायद यही वजह है कि सोमवार को खुद बिजली मंत्री पटियाला पहुंचे और थर्मलों में कोयले के संकट को लेकर सीएमडी इंजीनियर बलदेव सिंह सरां समेत अन्य अधिकारियों साथ बैठक की। लेकिन माहिर मानते हैं कि अगर स्थिति आने वाले कुछ दिनों तक यही बनी रही, तो पंजाब में बिजली की बड़ी किल्लत हो सकती है। गौरतलब है कि कोल इंडिया से कोयले की सप्लाई तो हो रही है, लेकिन काफी कम व धीमी रफ्तार से हो रही है। जिस कारण समस्या हुई है।
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