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गुरु तेग बहादुर ने कुर्बानी देकर मिसाल कायम की
ब्यूरो, अमर उजाला, पटियाला
Updated Fri, 22 Apr 2016 03:15 PM IST
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पटियाला की पंजाबी यूनिवर्सिटी में डा. बलवंत सिंह ढिल्लों को सम्मानित करते वीसी डा. जसपाल सिंह।
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाबी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डा. जसपाल सिंह ने कहा कि गुरु तेग बहादुर साहिब की वाणी में वैराग को प्रमुखता दी गई है। इस वैराग का अर्थ सांसारिक मोह को त्यागना नहीं है, बल्कि समाज में रहकर अपनी सारी जिम्मेदारियों को निभाना है। वीसी ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी की शहादत से पहले दूसरों की बलि देने की परंपरा थी, लेकिन गुरु साहिब ने मुगल हुकूमत की ओर से हिंदू धर्म पर किए जा रहे जुल्म से टक्कर लेने के लिए अपनी कुर्बानी देकर मिसाल कायम की।
वीसी जसपाल सिंह पंजाबी यूनिवर्सिटी की श्री गुरु तेग बहादुर राष्ट्रीय एकता चेयर की ओर से श्री गुरु तेग बहादुर साहिब के जीवन, फिलोसफी और यात्राओं विषय पर आयोजित विशेष लेक्चर के मौके पर बोल रहे थे। इस मौके पर वीसी ने गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी अमृतसर के पूर्व प्रोफेसर डा. बलवंत सिंह ढिल्लों को सम्मानित किया। डा. ढिल्लों ने अपने संबोधन में विभिन्न स्रोतों द्वारा श्री गुरु तेग बहादुर के जीवन संबंधी जुटाई जानकारियों से मौजूद लोगों को अवगत कराया।
उन्होंने गुरु साहिब के गद्दी संभालने से पहले के हालातों के बारे में बताया कि उस समय किसानों की हालत काफी दयनीय थी। मुगलों के खिलाफ हुई बगावतें उनकी राजनीतिक, धार्मिक व आर्थिक नीतियों का ही नतीजा थीं। उन्होंने गुरु साहिब की वाणी बारे बताया कि उनकी वाणी सरल व स्पष्ट है, जो आत्मिक बल धारण करने पर जोर देती है। सभ्याचारक व्यवस्था को कायम रखते हमें हिंद की चादर, गुरु तेग बहादुर साहिब की कुर्बानी को सदैव याद रखना चाहिए। इससे पहले डीन सोशल साइंसेज डा. इंद्रजीत सिंह ने आए मेहमानों का स्वागत किया।
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वीसी जसपाल सिंह पंजाबी यूनिवर्सिटी की श्री गुरु तेग बहादुर राष्ट्रीय एकता चेयर की ओर से श्री गुरु तेग बहादुर साहिब के जीवन, फिलोसफी और यात्राओं विषय पर आयोजित विशेष लेक्चर के मौके पर बोल रहे थे। इस मौके पर वीसी ने गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी अमृतसर के पूर्व प्रोफेसर डा. बलवंत सिंह ढिल्लों को सम्मानित किया। डा. ढिल्लों ने अपने संबोधन में विभिन्न स्रोतों द्वारा श्री गुरु तेग बहादुर के जीवन संबंधी जुटाई जानकारियों से मौजूद लोगों को अवगत कराया।
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उन्होंने गुरु साहिब के गद्दी संभालने से पहले के हालातों के बारे में बताया कि उस समय किसानों की हालत काफी दयनीय थी। मुगलों के खिलाफ हुई बगावतें उनकी राजनीतिक, धार्मिक व आर्थिक नीतियों का ही नतीजा थीं। उन्होंने गुरु साहिब की वाणी बारे बताया कि उनकी वाणी सरल व स्पष्ट है, जो आत्मिक बल धारण करने पर जोर देती है। सभ्याचारक व्यवस्था को कायम रखते हमें हिंद की चादर, गुरु तेग बहादुर साहिब की कुर्बानी को सदैव याद रखना चाहिए। इससे पहले डीन सोशल साइंसेज डा. इंद्रजीत सिंह ने आए मेहमानों का स्वागत किया।
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