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घर का इकलौता चिराग था गुरप्रीत... बनना चाहता था पीसीएस, हादसे ने किसी के सपने तोड़े तो किसी की रोजी का सहारा छीना
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पटियाला। पटियाला के निकटवर्ती गांव जगतपुरा में वीरवार को देर रात दो बजे हुए भीषण सड़क हादसे में पांच मौतों से किसी के सपने चकनाचूर हो गए तो किसी का रोजी-रोटी कमाने वाला एकमात्र सहारा छिन गया।
हादसे में मरने वाले पंजाबी यूनिवर्सिटी के एमटेक स्टूडेंट गुरप्रीत सिंह के पिता जगरूप सिंह ने बताया कि वह खेतीबाड़ी करते हैं, लेकिन बेटा शुरू से ही पढ़ाई में होशियार था। इसलिए एमटेक में दाखिला दिलाया। उन्होंने बताया कि गुरप्रीत उनका इकलौता लड़का था। वह पीसीएस बनना चाहता था। उनका अब यही सपना था कि बेटा पीसीएस बनकर पूरे परिवार व गांव का नाम रोशन करे। लेकिन वाहेगुरु को शायद कुछ और ही मंजूर था।
जगरूप सिंह ने बताया कि उनकी बेटी कनाडा में रहती है। जब से भाई की मौत का पता चला है, आंखों से आंसू नहीं थम रहे हैं। उधर, कर्मजोत सिंह भी अपने घर का इकलौता चिराग था। उसकी मौत से भी परिवार में मातम का माहौल है।
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वहीं, हादसे में मरने वाले सोनू व निक्का अपने परिवारों के लिए रोजी-रोटी कमाने वाले एकमात्र सहारा थे। दोनों की मौत से परिवारों का गुजारा भी मुश्किल हो जाएगा। दोस्त अरुण ने बताया कि सोनू के परिवार में चार बेटे व पत्नी हैं। निक्का के परिवार में दो बेटे व पत्नी हैं।
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हादसे में मरने वाले पंजाबी यूनिवर्सिटी के एमटेक स्टूडेंट गुरप्रीत सिंह के पिता जगरूप सिंह ने बताया कि वह खेतीबाड़ी करते हैं, लेकिन बेटा शुरू से ही पढ़ाई में होशियार था। इसलिए एमटेक में दाखिला दिलाया। उन्होंने बताया कि गुरप्रीत उनका इकलौता लड़का था। वह पीसीएस बनना चाहता था। उनका अब यही सपना था कि बेटा पीसीएस बनकर पूरे परिवार व गांव का नाम रोशन करे। लेकिन वाहेगुरु को शायद कुछ और ही मंजूर था।
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जगरूप सिंह ने बताया कि उनकी बेटी कनाडा में रहती है। जब से भाई की मौत का पता चला है, आंखों से आंसू नहीं थम रहे हैं। उधर, कर्मजोत सिंह भी अपने घर का इकलौता चिराग था। उसकी मौत से भी परिवार में मातम का माहौल है।
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वहीं, हादसे में मरने वाले सोनू व निक्का अपने परिवारों के लिए रोजी-रोटी कमाने वाले एकमात्र सहारा थे। दोनों की मौत से परिवारों का गुजारा भी मुश्किल हो जाएगा। दोस्त अरुण ने बताया कि सोनू के परिवार में चार बेटे व पत्नी हैं। निक्का के परिवार में दो बेटे व पत्नी हैं।