फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Punjab ›   Patiala News ›   Ground reality on claim of government about adequate machines for stubble management in Punjab

Ground Report: पंजाब में निकल रहा गेहूं बिजाई का समय, पराली प्रबंधन के लिए किसानों को नहीं मिल रहीं मशीनें

Fri, 10 Nov 2023 12:34 PM IST
निवेदिता वर्मा रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 10 Nov 2023 12:34 PM IST
सार

पटियाला के किसान रणजीत सिंह सवाजपुर ने कहा कि हर किसान सब्सिडी पर पराली प्रबंधन मशीनें नहीं खरीद सकता है। सरकार को चाहिए कि सहकारी समितियों और जिला खेतीबाड़ी दफ्तरों को पर्याप्त गिनती में पराली प्रबंधन के लिए मशीनें मुहैया कराई जाती हैं, लेकिन ऐसा नहीं है।

विज्ञापन
Ground reality on claim of government about adequate machines for stubble management in Punjab
पंजाब में जलती पराली - फोटो : ANI

विस्तार

पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं बढ़ती जा रहीं हैं। पंजाब सरकार दावे कर रही है कि किसानों को पराली प्रबंधन व निस्तारण के लिए पर्याप्त मशीनें मुहैया करवाई गई हैं, लेकिन जमीनी हकीकत काफी अलग है। किसानों को इस बात की चिंता है कि गेहूं की बिजाई का समय निकल रहा है और मशीनें न मिलने से उन्हें देरी हो सकती है। 
विज्ञापन


किराये पर मिलने वाली मशीनों के लिए मोटी रकम चुकानी पड़ रही है। किसानों को कहना है कि वह पहले ही आर्थिक दिक्कतों से जूझ रहे हैं, ऐसे में महंगे किराये पर मशीनें लेकर पराली प्रबंधन नहीं कर सकते हैं। मजबूरन उन्हें पराली जलाकर खेतों को गेहूं की बिजाई के लिए तैयार करना पड़ रहा है, क्योंकि इसके लिए उनके पास केवल 20 दिन का समय होता है।
विज्ञापन


यह भी पढ़ें: Bathinda: छत पर चढ़ व्यक्ति ने बंदूक से अंधाधुंध फायरिंग कर ली दो की जान, फिर कर ली आत्महत्या
विज्ञापन
विज्ञापन


हर किसान नहीं खरीद सकता मशीनें
पटियाला के किसान रणजीत सिंह सवाजपुर ने कहा कि हर किसान सब्सिडी पर पराली प्रबंधन मशीनें नहीं खरीद सकता है। सरकार को चाहिए कि सहकारी समितियों और जिला खेतीबाड़ी दफ्तरों को पर्याप्त गिनती में पराली प्रबंधन के लिए मशीनें मुहैया कराई जाती हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। मशीनें थोड़ी हैं और किसानों की गिनती ज्यादा, जिसका फायदा प्राइवेट लोग उठा रहे हैं। वह प्रति एकड़ 2200 से लेकर 2300 रुपये तक किराया लेकर मशीन दे रहे हैं। जिसे देना हर किसी किसान के बस की बात नहीं है। पहले ही खेती के खर्च काफी हैं, ऐसे में महंगा किराया दिया तो किसान के पास क्या बचेगा। 

डीजल का खर्च कहां से लाएं
उन्होंने आगे कहा कि जिन किसानों को मुफ्त मशीनें मिल भी पा रही हैं, उन्हें भी काफी खर्च पड़ रहा है। क्योंकि मशीनें चलाने के लिए बड़े ट्रैक्टरों का इस्तेमाल होता है, जिसमें काफी डीजल की खपत हो जाती है। ऐसे में इस टेक्नोलॉजी को अपनाने में किसान गुरेज कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसान खेतों में पराली जलाते हैं, तो प्रदूषण फैलता है। लेकिन अगर वही पराली इंडस्ट्री में जलाई जाएगी, तब क्या प्रदूषण नहीं फैलेगा।

पराली को काटने और गांठें बनाने में लगता है समय
किसान अवतार सिंह कौरजीवाला ने कहा कि गेहूं की बिजाई के लिए किसानों के पास 25 अक्तूबर से लेकर 15 नवंबर तक समय है। इस दौरान पूरे खेत को साफ करने से लेकर जमीन में बीज डालने तक का काम रहता है। ऐसे में किसान अब मशीनें मिलने का इंतजार तो नहीं कर सकते। वैसे भी नई खेतीबाड़ी मशीनों से खेत को गेहूं की बिजाई के लिए तैयार करने में समय लग जाता है। पहले पैडी चॉपर से पराली को काटने, फिर इन्हें इकट्ठा करके गांठें बनाने में काफी समय लगता है। इसलिए किसानों को मजबूरन पराली में आग लगानी पड़ती है।

लाखों ने किया आवेदन, हजारों को मिलीं
किसान नेता जगमोहन सिंह ने कहा कि सब्सिडी वाली मशीनें भी किसानों को नहीं मिल पा रही हैं। लाखों की संख्या में किसानों ने मशीनें लेने के लिए अप्लाई किया, लेकिन मिली हजारों में। फिर सरकार कैसे किसानों को प्रदूषण फैलाने का दोषी बना रही है। उन्होंने कहा कि सहकारी समितियों के जरिये भी किसानों को मशीनें नहीं मिल पा रही हैं।

अधिकारी ने माना- जरूरत के हिसाब से मशीनें कम
मुख्य खेतीबाड़ी अधिकारी डा. गुरनाम सिंह ने माना कि जरूरत के हिसाब से मशीनें कम हैं। इसलिए किसानों को निजी तौर पर किराये पर लेने को मजबूर होना पड़ता है। साथ ही कहा कि अगर वातावरण को दूषित होने से बचाना है, तो किसानों को भी अपने स्तर पर कदम उठाने ही होंगे। वहीं, पंजाब खेतीबाड़ी विभाग के डायरेक्टर जसवंत सिंह ने माना कि विभाग के पोर्टल पर सब्सिडी पर पराली प्रबंधन मशीनें लेने के लिए 96 हजार से अधिक ने आवेदन किया था। उन्होंने बताया कि अब तक 18800 मशीनें दी गई हैं, जिनमें से 10800 की वेरिफिकेशन हो गई है कि मशीन सही व्यक्ति के पास पहुंची है। डायरेक्टर ने कहा कि सहकारी समितियों के जरिये किसान पूरी तरह मुफ्त में मशीन लेकर पराली प्रबंधन कर सकते हैं। उन्हें प्राइवेट से लेने की जरूरत नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed