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सरकार के खिलाफ बिजली मुलाजिमों का धरना
ब्यूरो, अमर उजाला, पटियाला
Updated Fri, 01 Jul 2016 02:37 PM IST
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Protest
- फोटो : डेमो फोटो
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स्टेट कमेटी के आह्वान पर टेक्निकल सर्विस यूनियन के बैनर तले पश्चिम मंडल और कर्मिशयल मंडल के बिजली मुलाजिमों ने संयुक्त धरना दिया। इस दौरान डिसमिस मुलाजिमों के बहाली, उन पर दायर पुलिस व कोर्ट केस वापस लेने समेत और कई मांगें उठाई गईं।
धरने को संबोधित करते हुए बिजली मुलाजिम नेताओं परमजीत सिंह, कुलदीप सिंह ने कहा कि बिजली निगमों में आउट सोर्सिंग व निजीकरण के बढ़ रहे चलन को बंद किया जाए। इससे कर्मचारी हितों का हनन हो रहा है। डिसमिस कर्मचारियों को बहाल किया जाए। उन पर डाले पुलिस व कोर्ट केस वापस लिए जाएं। पेंशनों में की 33 फीसदी की कटौती रद की जाए। पावरकाम व ट्रांसको में खाली पड़े पदों पर रेगुलर भरती की जाए। पे बैंड दिसंबर 2011 से लागू किया जाए। डीए की किश्त का एरियर अदा किया जाए। उन्होंने बताया कि हरियाणा के बिजली मुलाजिमों की ओर से अपनी मांगों को लेकर किए जा रहे आंदोलन के समर्थन में यह धरना दिया गया है।
बिजली मुलाजिम लीडरों ने हरियाणा सरकार को चेतावनी दी कि बिजली कर्मचारियों पर अस्मा लगाकर उन्हें डराने की कोशिश न की जाए। मांग की कि हरियाणा में 23 सब डिवीजनों को तोड़ने का आदेश वापस लिया जाए और सरप्लस कर्मचारियों को ड्यूटी पर वापस लिया जाए। मुख्यमंत्री के खिलाफ फील्ड में आने पर काले झंडों के साथ रोष प्रदर्शन करने का ऐलान किया गया। इसके साथ ही पंजाब सरकार की ओर से नर्सिंग स्टाफ एसोसिएशन और अध्यापकों पर किए जा रहे अत्याचार की निंदा की गई। केंद्र सरकार की ओर से निजीकरण और महंगाई में हुई बढ़ोतरी की भी निंदा की गई।
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धरने को संबोधित करते हुए बिजली मुलाजिम नेताओं परमजीत सिंह, कुलदीप सिंह ने कहा कि बिजली निगमों में आउट सोर्सिंग व निजीकरण के बढ़ रहे चलन को बंद किया जाए। इससे कर्मचारी हितों का हनन हो रहा है। डिसमिस कर्मचारियों को बहाल किया जाए। उन पर डाले पुलिस व कोर्ट केस वापस लिए जाएं। पेंशनों में की 33 फीसदी की कटौती रद की जाए। पावरकाम व ट्रांसको में खाली पड़े पदों पर रेगुलर भरती की जाए। पे बैंड दिसंबर 2011 से लागू किया जाए। डीए की किश्त का एरियर अदा किया जाए। उन्होंने बताया कि हरियाणा के बिजली मुलाजिमों की ओर से अपनी मांगों को लेकर किए जा रहे आंदोलन के समर्थन में यह धरना दिया गया है।
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बिजली मुलाजिम लीडरों ने हरियाणा सरकार को चेतावनी दी कि बिजली कर्मचारियों पर अस्मा लगाकर उन्हें डराने की कोशिश न की जाए। मांग की कि हरियाणा में 23 सब डिवीजनों को तोड़ने का आदेश वापस लिया जाए और सरप्लस कर्मचारियों को ड्यूटी पर वापस लिया जाए। मुख्यमंत्री के खिलाफ फील्ड में आने पर काले झंडों के साथ रोष प्रदर्शन करने का ऐलान किया गया। इसके साथ ही पंजाब सरकार की ओर से नर्सिंग स्टाफ एसोसिएशन और अध्यापकों पर किए जा रहे अत्याचार की निंदा की गई। केंद्र सरकार की ओर से निजीकरण और महंगाई में हुई बढ़ोतरी की भी निंदा की गई।
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