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सरकारी महिंदरा कॉलेज में स्टूडेंट्स ने निकाली रोष रैली
ब्यूरो, अमर उजाला, पटियाला
Updated Wed, 07 Sep 2016 03:08 PM IST
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पटियाला के सरकारी महिंदरा कालेज में सरकार के खिलाफ रैली निकालते स्टूडेंट्स।
- फोटो : अमर उजाला
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शिक्षा के निजीकरण के खिलाफ पंजाब स्टूडेंट्स यूनियन ने सरकारी महिंदरा कॉलेज में रैली की। साथ ही सरकार के खिलाफ पंजाब के सभी शिक्षण संस्थानों में क्लासों का बायकॉट करने का एलान किया गया।
स्टू़डेंट लीडर रवि रसूलपुर, अरमान ने कहा कि यह हड़ताल स्टूडेंट्स की जायज मांगों को लेकर की जा रही है। इसमें सेमेस्टर सिस्टम बंद करने की मांग प्रमुखता से शामिल है ताकि स्टूडेंट्स की मानसिक व आर्थिक लूट को रोका जा सके। ढाई लाख से कम आमदनी वाले सभी वर्गों के स्टूडेंट्स की फीस माफ की जाए क्योंकि किसानी लगातार संकट में है।
किसान लगातार खुदकुशी कर रहे हैं। साथ ही निजीकरण व उदारीकरण की नीतियों से छोटे दुकानदार और छोटे व्यापारियों के कामकाज भी ठप हो चुके हैं। इस कारण उनके बच्चे लगातार शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। साथ ही मांग की गई कि लड़कियों की सारी पढ़ाई मुफ्त की जाए। पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ की ओर से फीसों में की बढ़ोतरी वापस ली जाए।
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पंजाब की तीनों विवि का कैलेंडर साझा होना चाहिए। अच्छा खेल प्रबंध होना चाहिए ताकि अच्छे खिलाड़ी पैदा किए जा सकें। एससी स्टूडेंट्स से फीस लेने वाली मैनेजमेंट के खिलाफ पर्चे दर्ज किए जाएं। स्टूडेंट्स के रोके वजीफे जल्द जारी हों। अगर मांगें जल्द न मानी गईं तो संघर्ष तेज किया जाएगा।
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स्टू़डेंट लीडर रवि रसूलपुर, अरमान ने कहा कि यह हड़ताल स्टूडेंट्स की जायज मांगों को लेकर की जा रही है। इसमें सेमेस्टर सिस्टम बंद करने की मांग प्रमुखता से शामिल है ताकि स्टूडेंट्स की मानसिक व आर्थिक लूट को रोका जा सके। ढाई लाख से कम आमदनी वाले सभी वर्गों के स्टूडेंट्स की फीस माफ की जाए क्योंकि किसानी लगातार संकट में है।
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किसान लगातार खुदकुशी कर रहे हैं। साथ ही निजीकरण व उदारीकरण की नीतियों से छोटे दुकानदार और छोटे व्यापारियों के कामकाज भी ठप हो चुके हैं। इस कारण उनके बच्चे लगातार शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। साथ ही मांग की गई कि लड़कियों की सारी पढ़ाई मुफ्त की जाए। पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ की ओर से फीसों में की बढ़ोतरी वापस ली जाए।
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पंजाब की तीनों विवि का कैलेंडर साझा होना चाहिए। अच्छा खेल प्रबंध होना चाहिए ताकि अच्छे खिलाड़ी पैदा किए जा सकें। एससी स्टूडेंट्स से फीस लेने वाली मैनेजमेंट के खिलाफ पर्चे दर्ज किए जाएं। स्टूडेंट्स के रोके वजीफे जल्द जारी हों। अगर मांगें जल्द न मानी गईं तो संघर्ष तेज किया जाएगा।