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डिजिटल जाल की कहानी: कैसे जालसाजों ने पूर्व आईजी को फंसाया... 8.10 करोड़ की धोखाधड़ी के बाद खुद को मारी गोली

Wed, 24 Dec 2025 01:48 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, पटियाला
अमर उजाला नेटवर्क, पटियाला Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 24 Dec 2025 01:48 PM IST
सार

पूर्व आईजी अमर चहल से 8.10 करोड़ की धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। वहीं, धोखाधड़ी के शिकार होने के बाद खुद को गोली मारने वाले पूर्व आईजी की सर्जरी सफल रही है, लेकिन अगले 48 से 72 घंटे काफी अहम रहेंगे। 

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former IG shot himself In Patiala case Registered in matter of fraud amounting to Rs 8.10 crore of Amar Chahal
amar singh chahal - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पंजाब के पूर्व आईजी अमर सिंह चहल के साथ हुई 8.10 करोड़ की धोखाधड़ी के मामले में पटियाला पुलिस ने जालसाजी, आईटी एक्ट व अन्य आरोपों के तहत साइबर ठगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। यह कार्रवाई पूर्व आईजी के लिखे नोट के आधार पर कार्रवाई हुई। 
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उधर, अस्पताल में उपचाराधीन चहल की सोमवार रात सर्जरी की गई है। डॉक्टरों के अनुसार, चहल की छाती में गोली लगी थी। अस्पताल लाए जाने से पहले उनका काफी खून बह चुका था। उन्होंने बताया कि सर्जरी सफल रही है लेकिन अगले 48 से 72 घंटे काफी अहम रहेंगे। 
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वहीं, पुलिस ने साइबर सेल की मदद के साथ पूर्व आईजी के बैंक खातों की डिटेल की जांच शुरू कर दी है। साथ ही उनका मोबाइल फोन भी कब्जे में लेकर इसकी भी जांच कराई जा रही है। एसएसपी वरुण शर्मा ने कहा कि जल्द ही इस ठगी से जुड़े आरोपियों की पहचान करके उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा।
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नोट में पीएम मोदी और गृहमंत्री से की थी ये अपील
बता दें कि पूर्व आईजी चहल ने सोमवार को पटियाला स्थित अपने आवास पर खुद को गोली मार ली थी। मौके से पुलिस को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अलावा पंजाब के डीजीपी गौरव यादव के नाम पर सुसाइड नोट मिला था। 
 

जिसमें चहल ने लिखा था कि उनके साथ 8.10 करोड़ की साइबर ठगी हुई है जिसमें से 7.5 करोड़ रुपये उन्होंने अपने रिश्तेदारों व दोस्तों से उधार लिए थे। यह पैसे वह अपनी पूरी संपत्ति को बेचकर भी चुका नहीं सकते हैं। 
 

वह अपना चेहरा किसी को दिखाने के लायक नहीं रहे हैं। इसलिए उनके पास अब अपनी जान लेने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा है। नोट में पूर्व आईजी ने पंजाब के डीजीपी से मामले की सीबीआई से जांच कराने की अपील की थी। 
 

उन्होंने लिखा था कि आरोपियों की धरपकड़ के बाद पैसे की वसूली करके परिवार को लौटाया जाए. ताकि आगे वह उन लोगों को दे सकें, जिनसे उन्होंने उधार लिया है।
 

निवेश के नाम पर रची गई ठगी की साजिश
सुसाइड नोट में पूर्व आईजी ने लिखा है कि वह एक संगठित ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार हुए। ठगों ने खुद को 'वेल्थ इक्विटी एडवाइजर' बताते हुए निवेश का झांसा दिया। एक व्यक्ति ने खुद की पहचान डीबीएस बैंक के सीईओ डॉ. रजत वर्मा के रूप में कराई और शेयर बाजार, आईपीओ व ट्रेडिंग से जुड़े टिप्स देने शुरू किए।
 

डिजिटल डैशबोर्ड पर दिखाया जाता था मुनाफा
उसकी प्रोफाइल पर सीईओ की फोटो लगी थी, जिससे भरोसा और गहरा हुआ। एक ऑनलाइन ग्रुप बनाया गया, जहां निवेश से जुड़े सवाल पूछने पर तुरंत जवाब मिलते थे। कुछ समय बाद निवेशकों को एक डिजिटल डैशबोर्ड दिखाया गया, जिसमें भारी मुनाफा दर्शाया जा रहा था।
 

आईपीओ, ओटीसी ट्रेड और क्वांट फंड्स का लालच
सुसाइड नोट के मुताबिक डैशबोर्ड पर चार तरह की स्कीमें दिखाई गईं- डेली ट्रेड स्टॉक्स, ओटीसी ट्रेड, आईपीओ और क्वांटिटेटिव फंड्स। हर नई स्कीम में पिछली से ज्यादा रिटर्न दिखाया जाता था। ठगों ने दावा किया कि डीबीएस ग्रुप को आईपीओ में डिस्काउंटेड रेट पर शेयर मिलते हैं। ओटीसी ट्रेड में 30–40 फीसदी और क्वांटिटेटिव फंड्स में 50 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दिखाकर उन्हें निवेश के लिए लगातार उकसाया गया।

तीन खातों से 8 करोड़ से ज्यादा रुपये ट्रांसफर
अमर सिंह चहल ने सुसाइड नोट में लिखा है कि वह इस जाल में इस कदर फंस गए कि बाहर निकलने का रास्ता नहीं दिखा। उन्होंने अपने तीन बैंक खातों- एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक से आठ करोड़ 10 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसमें से करीब सात करोड़ रुपये उन्होंने उधार लेकर निवेश किए थे। सुसाइड नोट में उन्होंने बैंक डिटेल्स, आईएफएससी कोड और ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड तक दर्ज किए हैं। 

यहां से आया मानसिक तनाव
जब उन्होंने पैसे निकालने की कोशिश की, तो मुनाफा दिखाने वाला डैशबोर्ड फर्जी साबित हुआ और ठगों की ओर से उगाही व दबाव शुरू हो गया। यहीं से उनका मानसिक तनाव और बढ़ता चला गया।
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