{"_id":"6160629d8ebc3e47160809b7","slug":"farmers-put-locks-on-the-gates-of-powercom-head-office-for-not-getting-full-power-patiala-news-pkl4294017156","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसानों ने पूरी बिजली न मिलने पर पावरकॉम हेडआफिस के गेटों पर जड़े ताले","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किसानों ने पूरी बिजली न मिलने पर पावरकॉम हेडआफिस के गेटों पर जड़े ताले
विज्ञापन
शुक्रवार को पटियाला में पावरकॉम के हेडआफिस के आगे धरना-प्रदर्शन करते किसान।
- फोटो : PATIALA
पंजाब के थर्मल प्लांटों में एक बार फिर कोयला स्टाक खत्म होने की कगार पर है और इससे बिजली संकट फिर से गहरा गया है। किसानों को धान की फसलों को आखिरी पानी देने के लिए आठ घंटे के बजाय मात्र चार से पांच घंटे ही बिजली सप्लाई मिल रही है। इस कारण उनकी पकी फसलों के खराब होने का खतरा पैदा हो गया है। इससे भड़के किसानों ने शुक्रवार को क्रांतिकारी किसान यूनियन के बैनर तले पावरकॉम के हेडआफिस के तीनों गेटों पर ताले जड़कर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। बाद में पावरकॉम मैनेजमेंट ने किसान नेताओं के साथ बैठक कर रोजाना छह घंटे बिजली सप्लाई देने का भरोसा दिलाया। इसके बाद ही धरना समाप्त किया गया।
जानकारी के मुताबिक सरकारी रोपड़ थर्मल प्लांट में इस समय मात्र चार, जबकि लहरां मुहब्बत में पांच दिनों का, जबकि प्राइवेट तलवंडी साबो थर्मल प्लांट में मात्र एक, राजपुरा में दो और गोइंदवाल साहिब में एक दिन का कोयला शेष है। पावरकॉम के अधिकारियों के मुताबिक बारिश के कारण कोयला खानों में काम प्रभावित होने से कोल इंडिया की तरफ कोयले की सप्लाई बेहद कम आ रही है।
कोयले की भारी कमी के कारण पावरकॉम ने रोपड़ के तीन और लहरां मुहब्बत प्लांट के एक यूनिट को फिलहाल बंद कर दिया है। सरकारी थर्मलों से शुक्रवार को पावरकॉम को 768 मेगावाट, प्राइवेट थर्मल प्लांटों से 3408 मेगावाट और हाइडलों से 239 मेगावाट बिजली मिली। पावरकॉम का खुद का उत्पादन 4518 मेगावाट रही, जबकि 2600 मेगावाट से ज्यादा बिजली पावरकॉम ने बाहर से खरीदी। शुक्रवार को बिजली की मांग 7200 मेगावाट के करीब रही।
विज्ञापन
दिन में मात्र चार से पांच घंटे बिजली सप्लाई मिलने के विरोध में शुक्रवार को क्रांतिकारी किसान यूनियन ने किसान नेता सुखविंदर सिंह तुलेवाल की अगुवाई में पावरकॉम हेडआफिस के तीनों गेटों को ताले जड़ दिए। किसानों ने इस मौके पर गेटों के बाहर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। किसानों ने कहा कि उनकी फसलें पकने को हैं और ऐसे में फसलों को अगर पानी न मिला तो फसलें बर्बाद हो जाएंगी। लेकिन पावरकॉम की ओर से खेतीबाड़ी मोटरों के लिए दिन में चार से पांच घंटे ही सप्लाई दी जा रही है, जबकि वादा 8 घंटे का था।
उन्होंने मांग की कि 20 अक्तूबर तक किसानों को रोजाना आठ घंटे निर्विघ्न बिजली सप्लाई दी जाए। दो दिन पहले किसानों ने इस संबंध में पावरकॉम मैनेजमेंट को नोटिस भी दिया था, लेकिन फिर भी कोई गौर नहीं किया गया। इस कारण मजबूर होकर किसानों को हेडआफिस के गेटों को बंद करना पड़ा। बाद में पावरकॉम मैनेजमेंट ने दिन में छह घंटे बिजली सप्लाई देने का वादा किया तो किसानों ने धरना समाप्त कर दिया।
विज्ञापन
जानकारी के मुताबिक सरकारी रोपड़ थर्मल प्लांट में इस समय मात्र चार, जबकि लहरां मुहब्बत में पांच दिनों का, जबकि प्राइवेट तलवंडी साबो थर्मल प्लांट में मात्र एक, राजपुरा में दो और गोइंदवाल साहिब में एक दिन का कोयला शेष है। पावरकॉम के अधिकारियों के मुताबिक बारिश के कारण कोयला खानों में काम प्रभावित होने से कोल इंडिया की तरफ कोयले की सप्लाई बेहद कम आ रही है।
विज्ञापन
कोयले की भारी कमी के कारण पावरकॉम ने रोपड़ के तीन और लहरां मुहब्बत प्लांट के एक यूनिट को फिलहाल बंद कर दिया है। सरकारी थर्मलों से शुक्रवार को पावरकॉम को 768 मेगावाट, प्राइवेट थर्मल प्लांटों से 3408 मेगावाट और हाइडलों से 239 मेगावाट बिजली मिली। पावरकॉम का खुद का उत्पादन 4518 मेगावाट रही, जबकि 2600 मेगावाट से ज्यादा बिजली पावरकॉम ने बाहर से खरीदी। शुक्रवार को बिजली की मांग 7200 मेगावाट के करीब रही।
विज्ञापन
दिन में मात्र चार से पांच घंटे बिजली सप्लाई मिलने के विरोध में शुक्रवार को क्रांतिकारी किसान यूनियन ने किसान नेता सुखविंदर सिंह तुलेवाल की अगुवाई में पावरकॉम हेडआफिस के तीनों गेटों को ताले जड़ दिए। किसानों ने इस मौके पर गेटों के बाहर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। किसानों ने कहा कि उनकी फसलें पकने को हैं और ऐसे में फसलों को अगर पानी न मिला तो फसलें बर्बाद हो जाएंगी। लेकिन पावरकॉम की ओर से खेतीबाड़ी मोटरों के लिए दिन में चार से पांच घंटे ही सप्लाई दी जा रही है, जबकि वादा 8 घंटे का था।
उन्होंने मांग की कि 20 अक्तूबर तक किसानों को रोजाना आठ घंटे निर्विघ्न बिजली सप्लाई दी जाए। दो दिन पहले किसानों ने इस संबंध में पावरकॉम मैनेजमेंट को नोटिस भी दिया था, लेकिन फिर भी कोई गौर नहीं किया गया। इस कारण मजबूर होकर किसानों को हेडआफिस के गेटों को बंद करना पड़ा। बाद में पावरकॉम मैनेजमेंट ने दिन में छह घंटे बिजली सप्लाई देने का वादा किया तो किसानों ने धरना समाप्त कर दिया।