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थर्मल में कोयले का संकट, सात दिनों का कोयला बचा
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पटियाला। पंजाब के थर्मल प्लांटों में मंगलवार को भी कोयले का संकट बरकरार रहा। अब यहां तीन से सात दिनों का ही कोयला बचा है। जिसके चलते सरकारी थर्मल तो बंद पड़े हैं और प्राइवेट में गोइंदवाल साहिब बंद है। सरकारी थर्मल में पिछले तीन दिनों से कोयले की सप्लाई नहीं हो सकी है, जबकि प्राइवेट में कुछ मात्रा में कोयले का स्टाक पहुंचा है।
सरकारी थर्मल प्लांट रोपड़ में सात दिनों का, लहरा मुहब्बत में छह दिनों का और तलवंडी साबो में तीन, राजपुरा में चार और गोइंदवाल साहिब में तीन दिनों का ही कोयला शेष है। जबकि तय नियमों के मुताबिक थर्मल प्लांटों में 25 से 30 दिनों का कोयला होना चाहिए। कोयले के इस संकट के चलते रोपड़ व लहरा मुहब्बत सरकारी थर्मल प्लांटों को बंद किया हुआ है, वहीं प्राइवेट में गोइंदवाल साहिब भी बंद पड़ा है। जबकि तलवंडी साबो के चालू हालत वाले दोनों यूनिटों को आधी क्षमता पर चलाया जा रहा है। इन दिनों पंजाब के विभिन्न इलाकों में बारिश के चलते बिजली की मांग में कमी के चलते पावरकाम को तीन थर्मल प्लांट बंद होने के बावजूद सप्लाई में दिक्कत नहीं हो रही है। पंजाब में मंगलवार को बिजली की मांग साढ़े आठ हजार मेगावाट दर्ज की गई, जिसे पूरा करने के लिए पावरकाम ने बाहर से करीब 6000 मेगावाट बिजली बाहर से खरीदी। जबकि प्राइवेट प्लांटों से 1808 मेगावाट, हाइडलों से 567 मेगावाट बिजली की सप्लाई हुई।
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सरकारी थर्मल प्लांट रोपड़ में सात दिनों का, लहरा मुहब्बत में छह दिनों का और तलवंडी साबो में तीन, राजपुरा में चार और गोइंदवाल साहिब में तीन दिनों का ही कोयला शेष है। जबकि तय नियमों के मुताबिक थर्मल प्लांटों में 25 से 30 दिनों का कोयला होना चाहिए। कोयले के इस संकट के चलते रोपड़ व लहरा मुहब्बत सरकारी थर्मल प्लांटों को बंद किया हुआ है, वहीं प्राइवेट में गोइंदवाल साहिब भी बंद पड़ा है। जबकि तलवंडी साबो के चालू हालत वाले दोनों यूनिटों को आधी क्षमता पर चलाया जा रहा है। इन दिनों पंजाब के विभिन्न इलाकों में बारिश के चलते बिजली की मांग में कमी के चलते पावरकाम को तीन थर्मल प्लांट बंद होने के बावजूद सप्लाई में दिक्कत नहीं हो रही है। पंजाब में मंगलवार को बिजली की मांग साढ़े आठ हजार मेगावाट दर्ज की गई, जिसे पूरा करने के लिए पावरकाम ने बाहर से करीब 6000 मेगावाट बिजली बाहर से खरीदी। जबकि प्राइवेट प्लांटों से 1808 मेगावाट, हाइडलों से 567 मेगावाट बिजली की सप्लाई हुई।
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