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पंजाब में मिलेगी सस्ती बिजली, पावरकाम ने सुप्रीम कोर्ट में जीता केस प्रति यूनिट 25 से 30 पैसे बिजली के रेट कम होने की संभावना अब
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पटियाला। पंजाब में बिजली के रेट में कटौती से आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को झारखंड की पछवाड़ा कोयला खान चलाने संबंधी फैसला पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड (पावरकाम) के हक में सुना दिया। जिससे अब पावरकाम को सस्ते दामों में इस खान से कोयला मिल सकेगा, जबकि बाहर से खरीदने में कोयला काफी महंगा पड़ता है। इससे कोयला खरीद में अतिरिक्त खर्च कम होने से प्रदेश में बिजली सस्ती मिल सकेगी।
जानकारी के मुताबिक पछवाड़ा खान पंजाब राज्य बिजली बोर्ड (पीएसईबी) को अलाट हुई थी। जिसे चलाने के लिए बोर्ड ने एमटा कंपनी साथ मिलकर पानेम कंपनी बनाई थी। जिसका 25 नवंबर 2004 को झारखंड सरकार के साथ समझौता हुआ था। इस कंपनी में पीएसईबी का 26 फीसदी और एमटा का 74 फीसदी हिस्सा था। साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने 1993 से 2011 तक की कोयला खानों की अलाटमेंट रद कर दी थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2015 को फिर से कोयला खान पीएसईबी को भंग करके बनाए पावरकाम को अलाट कर दी थी। बाद में जब खान को चलाने के लिए पावरकाम ने टेंडर लगाया, तो 2015 में ही एमटा कंपनी ने टेंडर को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दे दी। इस मामले में हाईकोर्ट ने 2018 में एमटा के हक में फैसला दे दिया था। इसके खिलाफ पावरकाम ने सुप्रीम कोर्ट में पटीशन दायर कर दी थी।
सुप्रीम कोर्ट की बैंच ने मंगलवार को पावरकाम के हक में फैसला सुनाया, जिससे पावरकाम को बड़ी राहत मिली है। पावरकाम वर्तमान में कोल इंडिया लिमिटेड से कोयला ले रहा है। अधिकारियों के मुताबिक पछवाड़ा कोयला खान शुरू होने से पावरकाम को यहां से सस्ता कोयला मिल सकेगा। इससे पावरकाम को सालाना 500 से 600 करोड़ का फायदा होगा। यह पैसा उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली देने पर खर्च होगा। संभावना है कि आने वाले दिनों में पंजाब में 25 से 30 पैसे प्रति यूनिट बिजली सस्ती हो सकती है। इस खान से पावरकाम को सालाना 70 मिलियन टन कोयला मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है।
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जानकारी के मुताबिक पछवाड़ा खान पंजाब राज्य बिजली बोर्ड (पीएसईबी) को अलाट हुई थी। जिसे चलाने के लिए बोर्ड ने एमटा कंपनी साथ मिलकर पानेम कंपनी बनाई थी। जिसका 25 नवंबर 2004 को झारखंड सरकार के साथ समझौता हुआ था। इस कंपनी में पीएसईबी का 26 फीसदी और एमटा का 74 फीसदी हिस्सा था। साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने 1993 से 2011 तक की कोयला खानों की अलाटमेंट रद कर दी थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2015 को फिर से कोयला खान पीएसईबी को भंग करके बनाए पावरकाम को अलाट कर दी थी। बाद में जब खान को चलाने के लिए पावरकाम ने टेंडर लगाया, तो 2015 में ही एमटा कंपनी ने टेंडर को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दे दी। इस मामले में हाईकोर्ट ने 2018 में एमटा के हक में फैसला दे दिया था। इसके खिलाफ पावरकाम ने सुप्रीम कोर्ट में पटीशन दायर कर दी थी।
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सुप्रीम कोर्ट की बैंच ने मंगलवार को पावरकाम के हक में फैसला सुनाया, जिससे पावरकाम को बड़ी राहत मिली है। पावरकाम वर्तमान में कोल इंडिया लिमिटेड से कोयला ले रहा है। अधिकारियों के मुताबिक पछवाड़ा कोयला खान शुरू होने से पावरकाम को यहां से सस्ता कोयला मिल सकेगा। इससे पावरकाम को सालाना 500 से 600 करोड़ का फायदा होगा। यह पैसा उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली देने पर खर्च होगा। संभावना है कि आने वाले दिनों में पंजाब में 25 से 30 पैसे प्रति यूनिट बिजली सस्ती हो सकती है। इस खान से पावरकाम को सालाना 70 मिलियन टन कोयला मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है।
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