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सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरीं आशा वर्कर
ब्यूरो, अमर उजाला, पटियाला
Updated Tue, 17 May 2016 09:15 PM IST
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पटियाला में सीएमओ आफिस के बाहर सरकार खिलाफ धरना देतीं आशा वर्कर।
- फोटो : अमर उजाला
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तपती गरमी में मंगलवार को प्रदेश के कोने-कोने से इकट्ठा हुईं आशा वर्करों ने सिविल सर्जन दफ्तर के बाहर सरकार के खिलाफ धरना दिया। उन्होंने नारेबाजी कर सरकार से मांग की कि आशा वर्करों को सरकारी मुलाजिम घोषित कर उन्हें रेगुलर किया जाए। साथ ही आशा वर्करों का बीमा कराया जाए। उन्होंने कई अन्य जायज मांगें पूरी न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।
प्रधान किरनदीप पंजोला ने कहा कि साल 2008 में आशा वर्करों के अस्तित्व में आने के बाद भ्रूण हत्या पर काफी हद तक रोक के साथ ही नवजन्मे बच्चे की मौत दर भी कम हुई है लेकिन सरकारी सेहत सुविधाएं घर-घर पहुंचाने के बाद भी आशा वर्करों को बेहद कम इनसेंटिव दिया जा रहा है। इससे आने-जाने का किराया भी पूरा नहीं होता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि आशा वर्करों को सरकारी मुलाजिम घोषित करके रेगुलर ग्रेड दिया जाए। कम से कम 15 हजार प्रति माह तनख्वाह लागू की जाए। आने-जाने के दौरान आशा वर्करों के सड़क हादसों का शिकार बनने का खतरा अकसर बना रहता है।
बनूड़ में आशा वर्करों की सड़क हादसे में मौत भी हो गई थी लेकिन परिवार को सरकार की ओर से कोई आर्थिक मदद नहीं दी जा रही है। उन्होंने मांग की कि आशा वर्करों का बीमा किया जाए। माहिर दाइयों और आशा वर्करों को सेहत विभाग में खाली पड़े पदों पर नियुक्त किया जाए। सरकार को चेतावनी दी कि अगर जल्द मांगें पूरी न कीं तो संघर्ष तेज किया जाएगा। इसके तहत पूरे राज्य में सरकार के खिलाफ धरने व रोष मार्च निकाले जाएंगे। इसका नतीजा आने वाले विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ेगा।
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प्रधान किरनदीप पंजोला ने कहा कि साल 2008 में आशा वर्करों के अस्तित्व में आने के बाद भ्रूण हत्या पर काफी हद तक रोक के साथ ही नवजन्मे बच्चे की मौत दर भी कम हुई है लेकिन सरकारी सेहत सुविधाएं घर-घर पहुंचाने के बाद भी आशा वर्करों को बेहद कम इनसेंटिव दिया जा रहा है। इससे आने-जाने का किराया भी पूरा नहीं होता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि आशा वर्करों को सरकारी मुलाजिम घोषित करके रेगुलर ग्रेड दिया जाए। कम से कम 15 हजार प्रति माह तनख्वाह लागू की जाए। आने-जाने के दौरान आशा वर्करों के सड़क हादसों का शिकार बनने का खतरा अकसर बना रहता है।
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बनूड़ में आशा वर्करों की सड़क हादसे में मौत भी हो गई थी लेकिन परिवार को सरकार की ओर से कोई आर्थिक मदद नहीं दी जा रही है। उन्होंने मांग की कि आशा वर्करों का बीमा किया जाए। माहिर दाइयों और आशा वर्करों को सेहत विभाग में खाली पड़े पदों पर नियुक्त किया जाए। सरकार को चेतावनी दी कि अगर जल्द मांगें पूरी न कीं तो संघर्ष तेज किया जाएगा। इसके तहत पूरे राज्य में सरकार के खिलाफ धरने व रोष मार्च निकाले जाएंगे। इसका नतीजा आने वाले विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ेगा।
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