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सरकार से वितीय सहायता न मिलने के कारण किसानों की मुश्किलें बढ़ीं-प्रोफेसर सुखपाल सिंह
Updated Sat, 24 Feb 2018 10:40 PM IST
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सरकार से वित्तीय सहायता न मिलने से किसानों की मुश्किलें बढ़ीं : प्रो. सुखपाल
मोदी कॉलेज में पंजाब के खेतीबाड़ी संकट पर लेक्चर का आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला।
मुल्तानी मल मोदी कॉलेज के पोस्ट ग्रेजुएट कामर्स विभाग की ओर से पंजाब के खेतीबाड़ी संकट-मसले और नीतियां विषय पर लेक्चर करवाया गया। इस दौरान पंजाब खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी लुधियाना के प्रोफेसर डॉ. सुखपाल सिंह ने कहा कि सूबे में खेतीबाड़ी संकट से निकलने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
सरकार से जरूरी वित्तीय सहायता न मिलने से किसानों की मुश्किलें और बढ़ रही हैं। उन्होंने किसानों के बारे में फैली गलत धारणाओं के बारे में कहा कि किसान विवाह शादियों पर जरूरत से ज्यादा खर्चा नहीं करते हैं और न ही वह बेवजह फालतू बैठते हैं। असल में फसलों के मौसमी स्वभाव होने से उनके पास साल में काफी समय के लिए कोई काम नहीं होता है।
प्रिंसिपल डॉ. खुशविंदर कुमार ने कहा कि हरित क्रांति के साथ शुरू में पंजाब बहुत खुशहाल हुआ, लेकिन बदकिस्मती के साथ हम खुशहाली का यह दौर कायम न रख सके। वाइस प्रिंसिपल प्रोफेसर निर्मल सिंह ने कहा कि सूबे में खेतीबाड़ी ही हमारा मुख्य व्यवसाय है। हमारी सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक जिंदगी खेतीबाड़ी के आसपास घूमती है। अगर इस क्षेत्र में कोई संकट पैदा होता है, तो हमारी जिंदगी के सारे पक्ष बुरी तरह से प्रभावित होते हैं। इस दौरान डॉ. दीपिका सिंगला ने भी अपने विचार व्यक्त किए। अंत में प्रिंसिपल ने आए सारे मेहमानों को सम्मानित किया।
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मोदी कॉलेज में पंजाब के खेतीबाड़ी संकट पर लेक्चर का आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला।
मुल्तानी मल मोदी कॉलेज के पोस्ट ग्रेजुएट कामर्स विभाग की ओर से पंजाब के खेतीबाड़ी संकट-मसले और नीतियां विषय पर लेक्चर करवाया गया। इस दौरान पंजाब खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी लुधियाना के प्रोफेसर डॉ. सुखपाल सिंह ने कहा कि सूबे में खेतीबाड़ी संकट से निकलने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
सरकार से जरूरी वित्तीय सहायता न मिलने से किसानों की मुश्किलें और बढ़ रही हैं। उन्होंने किसानों के बारे में फैली गलत धारणाओं के बारे में कहा कि किसान विवाह शादियों पर जरूरत से ज्यादा खर्चा नहीं करते हैं और न ही वह बेवजह फालतू बैठते हैं। असल में फसलों के मौसमी स्वभाव होने से उनके पास साल में काफी समय के लिए कोई काम नहीं होता है।
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प्रिंसिपल डॉ. खुशविंदर कुमार ने कहा कि हरित क्रांति के साथ शुरू में पंजाब बहुत खुशहाल हुआ, लेकिन बदकिस्मती के साथ हम खुशहाली का यह दौर कायम न रख सके। वाइस प्रिंसिपल प्रोफेसर निर्मल सिंह ने कहा कि सूबे में खेतीबाड़ी ही हमारा मुख्य व्यवसाय है। हमारी सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक जिंदगी खेतीबाड़ी के आसपास घूमती है। अगर इस क्षेत्र में कोई संकट पैदा होता है, तो हमारी जिंदगी के सारे पक्ष बुरी तरह से प्रभावित होते हैं। इस दौरान डॉ. दीपिका सिंगला ने भी अपने विचार व्यक्त किए। अंत में प्रिंसिपल ने आए सारे मेहमानों को सम्मानित किया।
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