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नंजीनियऊरों की भूख हड़ताल
Updated Tue, 17 Apr 2018 10:41 PM IST
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पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन की भूख हड़ताल
सहायक इंजीनियरों के मंजूर स्केल लागू करने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला।
पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन का मंगलवार को गुस्सा फूट पड़ा। एसोसिएशन के नुमाइंदे माल रोड पर पावरकॉम हेडआफिस के सामने एक दिवसीय भूख हड़ताल पर बैठ गए और उन्होंने धरना भी दिया। इंजीनियर्स एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि अगर उनकी मांगें जल्द न मानीं, तो सेवाएं प्रभावित होने से गर्मी में लोगों को कटों का सामना करना पड़ सकता है।
एसोसिएशन ने खास तौर से सरकारी थर्मलों को दोबारा चालू करने और सहायक इंजीनियरों के सरकार की ओर से पहले से मंजूर किए स्केल लागू करने की मांग की। इस दौरान और भी कई मांगें उठाई गईं। उनके पूरा न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी गई। इसके गंभीर परिणामों की जिम्मेदार सरकार खुद होगी। एसोसिएशन के प्रधान इंजीनियर संजीव सूद, सीनियर उप प्रधान इंजीनियर हरजिंदर बांसल, उप प्रधान इंजीनियर राजिंदर भगत, महासचिव इंजीनियर दविंदर गोयल ने कहा कि पावरकॉम मैनेजमेंट पहले सेे मानी मांगों को लागू करने से टाल मटोल कर रही है। खास तौर से सहायक इंजीनियरों में सरकार की ओर से पहले ही मंजूर किए स्केल लागू न होने से काफी रोष पाया जा रहा है। सरकारी थर्मलों को दोबारा चालू किया जाए, जिससे उपभोक्ताओं को वाजिब दामों पर बिजली मिल सके। प्राइवेट थर्मल प्लांटों से महंगी बिजली मिलती है, जिससे उपभोक्ताओं की जेबों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। मैनेजमेंट की ओर से इंजीनियरों की मांगों को जल्द पूरा किया जाए, नहीं तो संघर्ष और तेज किया जाएगा।
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सहायक इंजीनियरों के मंजूर स्केल लागू करने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला।
पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन का मंगलवार को गुस्सा फूट पड़ा। एसोसिएशन के नुमाइंदे माल रोड पर पावरकॉम हेडआफिस के सामने एक दिवसीय भूख हड़ताल पर बैठ गए और उन्होंने धरना भी दिया। इंजीनियर्स एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि अगर उनकी मांगें जल्द न मानीं, तो सेवाएं प्रभावित होने से गर्मी में लोगों को कटों का सामना करना पड़ सकता है।
एसोसिएशन ने खास तौर से सरकारी थर्मलों को दोबारा चालू करने और सहायक इंजीनियरों के सरकार की ओर से पहले से मंजूर किए स्केल लागू करने की मांग की। इस दौरान और भी कई मांगें उठाई गईं। उनके पूरा न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी गई। इसके गंभीर परिणामों की जिम्मेदार सरकार खुद होगी। एसोसिएशन के प्रधान इंजीनियर संजीव सूद, सीनियर उप प्रधान इंजीनियर हरजिंदर बांसल, उप प्रधान इंजीनियर राजिंदर भगत, महासचिव इंजीनियर दविंदर गोयल ने कहा कि पावरकॉम मैनेजमेंट पहले सेे मानी मांगों को लागू करने से टाल मटोल कर रही है। खास तौर से सहायक इंजीनियरों में सरकार की ओर से पहले ही मंजूर किए स्केल लागू न होने से काफी रोष पाया जा रहा है। सरकारी थर्मलों को दोबारा चालू किया जाए, जिससे उपभोक्ताओं को वाजिब दामों पर बिजली मिल सके। प्राइवेट थर्मल प्लांटों से महंगी बिजली मिलती है, जिससे उपभोक्ताओं की जेबों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। मैनेजमेंट की ओर से इंजीनियरों की मांगों को जल्द पूरा किया जाए, नहीं तो संघर्ष और तेज किया जाएगा।
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