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Punjab: पिता का दर्द, अब मेरा बेटा कभी चल नहीं पाएगा: लुधियाना में युवक को बदमाशों ने चलती ट्रेन से फेंका

Thu, 27 Jun 2024 06:52 PM IST
अंकेश ठाकुर संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना (पंजाब) Published by: अंकेश ठाकुर Updated Thu, 27 Jun 2024 06:52 PM IST
सार

ट्रेन में बदमाशों को सिगरेट पीने से रोकने पर उन्होंने युवक को चलती ट्रेन से बाहर फेंक दिया। जम्मू का तुषार ठाकुर एसएसबी के इंटरव्यू के लिए अहमदाबाद जा रहा था। अब वह लुधियाना के डीएमसी अस्पताल में भर्ती है। 

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Passenger thrown out from moving train in Ludhiana
डीएमसी में भर्ती तुषार ठाकुर। - फोटो : संवाद

विस्तार

पंजाब के लुधियाना में ट्रेनों में बेखौफ घूमते बदमाशों ने युवक को चलती ट्रेन से धक्का देकर बाहर फेंक दिया। युवक का कसूर बस इतना था कि उसने ट्रेन में सिगरेट पी रहे बदमाशों को धूम्रपान करने से रोका था। इस घटना की वजह से युवक की रीढ़ की हड्डी की टूट गई और वह जिंदगी भर के लिए अपाहिज हो गया। इस वारदात को लगभग डेढ़ महीना बीतने के बावजूद जीआरपी ने आरोपियों को पकड़ने की कोशिश नहीं की और एफआईआर दर्ज करने के बाद पीड़ित के अनफिट होने का बहाना बनाकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया।

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डीएमसी अस्पताल में भर्ती जम्मू के ग्रेटर कैलाश निवासी तुषार ठाकुर (23) को लगभग एक माह बाद होश आया तो उसने पुलिस को ई-मेल भेजकर आपबीती बताई। इसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। वहीं बेटे की हालत देख पिता के आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा कि अब मेरा बेटा कभी चल नहीं पाएगा। यह खौफनाक वारदात तुषार ठाकुर के साथ लुधियाना स्टेशन के आसपास हुई है। वह बीती 19 मई को एसएसबी (सेवा चयन बोर्ड) का इंटरव्यू देने जम्मू से अहमदाबाद जा रहा था। ट्रेन में सफर के दौरान कुछ युवक टॉयलेट के पास सिगरेट पी रहे थे।
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तुषार ने युवकों को धूम्रपान करने से रोका तो आरोपियों ने उसे चलती ट्रेन से धक्का देकर बाहर फेंक दिया। ट्रेन से बाहर गिरने के बाद तुषार को कुछ पता नहीं चला। उसने करीब डेढ़ महीने के बाद थोड़ा होश आने पर खुद को डीएमसी अस्पताल के वेंटिलेटर पर पाया। तुषार की रीढ़ की हड्डी टूट चुकी थी। नाक और गर्दन में भोजन व ऑक्सीजन की पाइप लगी थी। तुषार ने अपने बयान टाइप करके पुलिस को ई-मेल किए। डॉक्टरों के मुताबिक शरीर के निचले हिस्से में पैरालाइज होने के कारण तुषार अब जिंदगी भर बिस्तर पर रहेगा और चल फिर नहीं पाएगा।

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सेना में बनना चाहता था अफसर
तुषार के पिता वीरेंद्र सिंह ने बताया कि उनका बेटे सेना में अफसर बनना चाहता था। यही कारण था कि वह एयर फोर्स का पेपर और इंटरव्यू पास होने के बावजूद एसएसबी का इंटरव्यू देने अहमदाबाद जा रहा था, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। अब उनका बेटा कभी चल नहीं पाएगा। बेखौफ बदमाशों ने तुषार के करियर के साथ उसका जीवन भी खत्म कर दिया।

पुलिस को ई-मेल की शिकायत में बताई पूरी आपबीती
पुलिस को ई-मेल की शिकायत में तुषार ने पूरी आपबीती बताई। उसने बताया कि वह ट्रेन में वॉशरूम गया था। वहां पर एक पगड़ीधारी युवक सहित 3 नौजवान सिगरेट पी रहे थे। मैंने उनको ट्रेन में धूम्रपान न करने को कहा और वॉशरूम के अंदर चला गया। जब बाहर निकला तो तीनों ने मुझे पकड़ लिया और चलती ट्रेन से धक्का देकर बाहर फेंक दिया। गिरने के बाद मुझे कुछ याद नहीं रहा। तुषार के मुताबिक उसका बैग भी ट्रेन में ही छूट गया, जिसमें उसके शैक्षणिक प्रमाण पत्र थे।
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