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पीएम उम्मीदवारी से पहले ये है मोदी की नई चुनौती
अमर उजाला/चंडीगढ़
Updated Thu, 12 Sep 2013 12:03 AM IST
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गुजरात के पंजाबी किसानों के मुद्दे पर नरेंद्र मोदी फूंक फूंक कर पैर रख रहे हैं।
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वहां गुजराती बनाम पंजाबी के तौर पर उठे मुद्दे के कारण वे खुलेआम पंजाबी किसानों की सहायता करके गुजराती वोट बैंक को नाराज नहीं करना चाहते हैं।
पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उनके साथ गए अधिकारियों ने ऐसे महसूस किया है।
सूत्रों के अनुसार मोदी ने बादल के साथ पहले ही सहमति बना ली थी कि गुजरात के पंजाबी किसानों के मुद्दे को खुले मंच पर न उठाया जाए। इसके बाद पंजाबी और हरियाणवी किसानों को अलग से मिल कर बात की जाएगी।
दोनों मुख्यमंत्रियों के साथ किसानों की बैठक के दौरान मोदी ने उनको भरोसा दिलाया कि जो भी अधिकारी किसानों को जमीन से बाहर करेगा पहले उसकी छुट्टी होगी।
पंजाब सरकार के समक्ष गुजरात सरकार द्वारा रखे तथ्यों के अनुसार बंबे सक्यूरिटी आफ लैंड टैन्यूर एक्ट के अधीन गैर कृषि काश्तकार कृषि भूमि नही खरीद सकते। इस में गुजराती या गैर गुजराती का कोई मामला नहीं है।
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1955 में लाल बहादुर शास्त्री के कृषि मंत्री होने के मौके उन्होंने 600 के करीब पंजाबी, हरियाणवी, यूपी, मध्यप्रदेश और अन्य राज्यों के किसानों को गैर उत्पादिक कच्छ क्षेत्र में जमीनें दे दी। जमीनों की तबदीली भी इन किसानों के नाम हो गई।
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परन्तू इस में एक शर्त जरूरी थी कि जमीन किसानों के नाम करने से पहले सरकार की मंजूरी नहीं ली गई। इस आधार पर एक कुलैक्टर ने 784 अकाऊंट फ्रीज करने का आदेश जारी कर दिया।
इनमें 245 पंजाब और हरियाणा के और अन्य विभिन्न राज्यों से हैं। किसानों ने इसको गुजरात हाईकोर्ट में चुनौति दी और फैसला उनके हक में हो गया। इस दौरान मुद्दा गुजराती और गैर गुजराती के तौर पर उबरा तो मोदी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौति दे दी।