{"_id":"63a6a68c394dd201f836066e","slug":"naib-subedar-onkar-singh-of-pathankot-martyred-in-sikkim-accident","type":"story","status":"publish","title_hn":"Punjab: सिक्किम हादसे में पठानकोट का नायब सूबेदार शहीद, कल सैन्य सम्मान से होगा अंतिम संस्कार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Punjab: सिक्किम हादसे में पठानकोट का नायब सूबेदार शहीद, कल सैन्य सम्मान से होगा अंतिम संस्कार
Sat, 24 Dec 2022 12:43 PM IST
निवेदिता वर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, पठानकोट (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, पठानकोट (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 24 Dec 2022 12:43 PM IST
सार
नायब सूबेदार ओंकार सिंह अपने माता-पिता के इकलौते बेटे हैं। गांव नाजोवल के नजदीक कानवां में रविवार को सैन्य सम्मान से उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
विज्ञापन
नायब सूबेदार ओंकार सिंह लालोत्रा
- फोटो : फाइल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सिक्किम में शुक्रवार को हुए हादसे में सेना के तीन जेसीओ समेत 16 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए। इनमें पठानकोट के गांव नाजोवाल के नायब सूबेदार ओंकार सिंह भी शामिल थे। जिन्होंने 35 वर्ष की आयु में बलिदान देकर अपना नाम शहीदों की श्रेणी में स्वर्ण अक्षरों में अंकित करवा लिया। उनकी शहादत की खबर सुनते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
विज्ञापन
नायब सूबेदार ओंकार सिंह अपने माता-पिता के इकलौता बेटे थे। बचपन से ही वे पढ़ाई में बहुत होशियार थे। उनके दादा व चाचा-ताया भी भारतीय सेना में सेवाएं दे चुके हैं। उन्हीं से प्रेरणा लेकर ओंकार सिंह भी सेना में भर्ती हुए। इनके पिता ठाकुर रघुबीर सिंह छोटे किसान हैं और बड़ी मुश्किल से उन्होंने परिवार का पालन पोषण किया। उनके इस संघर्ष में ओंकार ने भी उनका पूरा साथ दिया तथा परिवार चलाने के लिए मजदूरी तक की। बारहवीं कक्षा पास करने के बाद 2005 में वे सेना की आरटी रेजीमेंट में भर्ती हो गए तथा नौकरी के दौरान ही इन्होंने एमएबीएड कर ली। नायब सूबेदार ओंकार सिंह पढ़ाई में इतने होशियार थे कि नौकरी के दौरान ही उन्होंने दो बार लेफ्टिनेंट का टेस्ट भी पास कर लिया। हालांकि इंटरव्यू में वे कुछ अंकों से रह गए।
विज्ञापन
मां बोली- मेरा श्रवण बेटा चला गया, अब किसके सहारे काटूंगी जिंदगी
बेटे की शहादत की खबर सुनते ही मां सरोज बाला ने बिलखते हुए कहा कि मेरा श्रवण बेटा चला गया। अब मैं किस के सहारे जिंदगी काटूंगी, मेरे बुढ़ापे की लाठी टूट गई अब मुझे कौन सहारा देगा। ओंकार सिंह तीन बहनों का इकलौता भाई था। बहन सीमा, बंदना और ममता ने रोते हुए बताया कि उनका भाई हमेशा कहता था कि उसके रहते उनकी बहनों को किसी भी चीज की कमी नहीं आएगी। अब उसने अपना बलिदान देकर पूरे परिवार को जिस गम के समंदर में धकेल दिया है उससे हम कभी बाहर नहीं निकल पाएंगे।
विज्ञापन
परिषद परिवार को टूटने नहीं देगी- कुंवर विक्की
इस अवसर पर बलिदानी नायब सूबेदार ओंकार सिंह के परिजनों को दिलासा देने पहुंचे शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविंदर सिंह विक्की ने बताया कि ओंकार के चले जाने से परिवार पर जो दुखों का पहाड़ टूटा है। शायद ही यह परिवार उस दुख से उभर पाए मगर उनकी परिषद इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ खड़ी है और वो इन्हें टूटने नहीं देंगे। कुंवर विक्की ने बताया कि नायब सूबेदार अपने पीछे अपने माता-पिता, तीन बहनों सहित पत्नी सपना व चार साल के बेटे मुकुंद को छोड़ गए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी भी पिछले चार महीनों से अपने पति ओंकार सिंह के साथ सिक्किम में ही है। कुंवर विक्की ने बताया कि शहीद नायब सूबेदार ओंकार सिंह की पार्थिव देह 25 दिसंबर को उनके गांव नाजोवाल में पहुंचेगी जहां पूरे सैन्य सम्मान से उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।