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सौगात : अब स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए नहीं जाना होगा दूर.. गांव छत की डिस्पेंसरी में होगा एक्सरे, लगेंगी मशीनें
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जीरकपुर। गांव छत के निवासियों को अब स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए अन्य जगह जाने की जरूरत नहीं रहेगी। अब गांव की सरकारी डिस्पेंसरी में एक्स-रे और अन्य मशीनें लगाई जाएंगी।
बता दें कि पंजाब के सेहतमंत्री बलबीर सिंह सिद्धू जीरकपुर एक कार्यक्रम में उपस्थित हुए थे, जिन्हें वार्ड-24 के पार्षद सुरिंदर सिंह काला ने ज्ञापन सौंपकर डिस्पेंसरी में मशीनें लगाने की मांग की थी।
जीरकपुर-पटियाला हाईवे पर स्थित गांव छत की आबादी 3500 से अधिक है। गांव की सरकारी डिस्पेंसरी में स्टाफ दोपहर 3 बजे तक मौजूद रहता है। इसके बाद इलाज के लिए आने वाले मरीजों को कई किलोमीटर दूर डेराबस्सी या ढकोली सिविल अस्पताल में जाना पड़ता है।
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मामूली बीमारी की मिलती है दवाई
डिस्पेंसरी आने वाले मरीज को सर्दी, जुकाम, बुखार आदि से संबंधित बीमारियों की दवाई तो मिल जाती है, लेकिन गंभीर बीमारियों का इलाज करवाने के लिए अन्य अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। मध्यम वर्गीय परिवार जो निजी अस्पतालों का खर्च नहीं उठा सकते हैं उन्हें ढकोली या डेराबस्सी में इलाज करवाना पड़ता है।
निजी लैब में लगते हैं हजारों रुपये
गांव छत में रहने वाले अधिकतर परिवार खेतीबाड़ी करते हैं। उन्हें स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए सरकारी अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता है। गांव की डिस्पेंसरी में सुविधाएं न मिलने के कारण लोगों को दूर दराज के इलाकों में स्थित अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। कई बार निजी लैब में टेस्ट करवाना पड़े तो हजारों रुपये खर्च हो जाते हैं।
सोमवार को उदयवीर ढिल्लों के कार्यक्रम के दौरान गांव छत की डिस्पेंसरी में एक्स-रे व अन्य मशीनें लगवाने संबंधी ज्ञापन मिला था। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को रिपोर्ट बनाकर भेजने के लिए निर्देश दिए गए हैं। - बलबीर सिंह सिद्धू, सेहतमंत्री पंजाब
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बता दें कि पंजाब के सेहतमंत्री बलबीर सिंह सिद्धू जीरकपुर एक कार्यक्रम में उपस्थित हुए थे, जिन्हें वार्ड-24 के पार्षद सुरिंदर सिंह काला ने ज्ञापन सौंपकर डिस्पेंसरी में मशीनें लगाने की मांग की थी।
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जीरकपुर-पटियाला हाईवे पर स्थित गांव छत की आबादी 3500 से अधिक है। गांव की सरकारी डिस्पेंसरी में स्टाफ दोपहर 3 बजे तक मौजूद रहता है। इसके बाद इलाज के लिए आने वाले मरीजों को कई किलोमीटर दूर डेराबस्सी या ढकोली सिविल अस्पताल में जाना पड़ता है।
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मामूली बीमारी की मिलती है दवाई
डिस्पेंसरी आने वाले मरीज को सर्दी, जुकाम, बुखार आदि से संबंधित बीमारियों की दवाई तो मिल जाती है, लेकिन गंभीर बीमारियों का इलाज करवाने के लिए अन्य अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। मध्यम वर्गीय परिवार जो निजी अस्पतालों का खर्च नहीं उठा सकते हैं उन्हें ढकोली या डेराबस्सी में इलाज करवाना पड़ता है।
निजी लैब में लगते हैं हजारों रुपये
गांव छत में रहने वाले अधिकतर परिवार खेतीबाड़ी करते हैं। उन्हें स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए सरकारी अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता है। गांव की डिस्पेंसरी में सुविधाएं न मिलने के कारण लोगों को दूर दराज के इलाकों में स्थित अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। कई बार निजी लैब में टेस्ट करवाना पड़े तो हजारों रुपये खर्च हो जाते हैं।
सोमवार को उदयवीर ढिल्लों के कार्यक्रम के दौरान गांव छत की डिस्पेंसरी में एक्स-रे व अन्य मशीनें लगवाने संबंधी ज्ञापन मिला था। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को रिपोर्ट बनाकर भेजने के लिए निर्देश दिए गए हैं। - बलबीर सिंह सिद्धू, सेहतमंत्री पंजाब