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अब सरकार बनेगी बुढ़ापे की लाठी
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मोहाली। वीआईपी सिटी समेत राज्य के दस जिलों में अब बुजुर्गों को अपने जीवन के आखिरी साल सड़कों और गलियों में धक्के खाकर नहीं काटने पड़ेंगे। राज्य सरकार अब ऐसे लोगों की बुढ़ापे की लाठी बनेगी। सरकार ने बुजुर्गों की मदद के लिए मोहाली समेत दस जिलों में वृद्धाश्रम बनाने की तैयारी की है। वहां पर उनकी दवाई से लेकर खाने-पीने तक सारा ख्याल रखा जाएगा। बुजुर्गों को ऐसा अहसास दिलाया जाएगा कि वे अपने परिवारों से दूर नहीं हैं। यह सारा काम निजी संस्थाओं के सहयोग से किया जा रहा है। अगर सबकुछ सही रहा तो दिवाली तक यह सुविधा लोगों को मिल सकती है।
राज्य में वृद्धाश्रम के लिए जंग करीब चार साल से चल रही है। मामला पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट तक पहुंचा था। इस मामले पर पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों की सरकार को उस समय हाईकोर्ट से फटकार भी लगी थी। अदालत में उस समय की सरकार ने खुद बताया था कि राज्य में 40 वृद्धाश्रम हैं। इसमें एक को सरकार व शेष निजी संस्थाओं द्वारा चलाए जाते हैं। ऐसे में हाईकोर्ट ने राज्य को इस दिशा में पहल के आधार पर कार्रवाई करने आदेश दिए थे। ऐसे में नई सरकार ने अब वृद्धाश्रम खोलने या चलाने की तैयारी की है। संस्थाओं से 25 सितंबर तक आवेदन मांगे हैं। हालांकि आवेदन के लिए कई शर्तें रखी हैं। उसमें से एक शर्त यह भी है कि कोई संस्था जो 25 लोगों का वृद्धाश्रम चला रही हो। साथ ही एक साल में इन्हें 50 से 150 लोगों के रहने के लिए बनाने में सक्षम हो। सारी प्रक्रिया ऑनलाइन की जाएगी। इसके बाद विभाग द्वारा सारी चीजों का सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद उम्मीद जताई जा रही है कि इस दिशा में कार्रवाई शुरू हो जाएगी।
इन जिलों में खुलेंगे आश्रम
राज्य सरकार के मुताबिक मोहाली, बठिंडा, फतेहगढ़ साहिब, जालंधर, कपूरथला, पटियाला, तरनतारन, गुरदासपुर, शहीद भगत सिंह नगर व मलेरकोटला में वृद्धाश्रम बनेंगे। सरकार को उम्मीद है कि इससे बुजुर्गों को जहां अच्छा जीवन मिल पाएगा। इनमें से कुछ जिलों में तो वृद्धाश्रम बनने तक शुरू हो गए हैं। समाजसेवी वेद प्रकाश सोनी बताते हैं कि वृद्धाश्रम समय की जरूरत है क्योंकि समय बदल गया है। किताबों में परिवार की परिभाषा तक बदल गई है। ऐसे में बुजुर्गों की तरफ सोचना जरूरी हो गया है।
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डिप्टी मेयर ने लड़ी थी वृद्धाश्रम के लिए लंबी जंग
मोहाली के डिप्टी मेयर कुलजीत सिंह बेदी ने इस संबंधी याचिका दायर की थी। उन्होंने याचिका में कहा था कि मोहाली समेत पंजाब के अन्य जिलों में सरकार ने जिम्मेदारी का सही ढंग से निर्वाह न करते हुए वृद्धाश्रम नहीं बनाए हैं। सीनियर सिटीजन एक्ट के प्रावधानों के तहत हर जिले में वृद्धाश्रम बनाने का प्रावधान है। इसके बावजूद पंजाब इसे लागू नहीं कर रहा। इसके बाद इस दिशा में फैसला हुआ था।
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राज्य में वृद्धाश्रम के लिए जंग करीब चार साल से चल रही है। मामला पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट तक पहुंचा था। इस मामले पर पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों की सरकार को उस समय हाईकोर्ट से फटकार भी लगी थी। अदालत में उस समय की सरकार ने खुद बताया था कि राज्य में 40 वृद्धाश्रम हैं। इसमें एक को सरकार व शेष निजी संस्थाओं द्वारा चलाए जाते हैं। ऐसे में हाईकोर्ट ने राज्य को इस दिशा में पहल के आधार पर कार्रवाई करने आदेश दिए थे। ऐसे में नई सरकार ने अब वृद्धाश्रम खोलने या चलाने की तैयारी की है। संस्थाओं से 25 सितंबर तक आवेदन मांगे हैं। हालांकि आवेदन के लिए कई शर्तें रखी हैं। उसमें से एक शर्त यह भी है कि कोई संस्था जो 25 लोगों का वृद्धाश्रम चला रही हो। साथ ही एक साल में इन्हें 50 से 150 लोगों के रहने के लिए बनाने में सक्षम हो। सारी प्रक्रिया ऑनलाइन की जाएगी। इसके बाद विभाग द्वारा सारी चीजों का सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद उम्मीद जताई जा रही है कि इस दिशा में कार्रवाई शुरू हो जाएगी।
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इन जिलों में खुलेंगे आश्रम
राज्य सरकार के मुताबिक मोहाली, बठिंडा, फतेहगढ़ साहिब, जालंधर, कपूरथला, पटियाला, तरनतारन, गुरदासपुर, शहीद भगत सिंह नगर व मलेरकोटला में वृद्धाश्रम बनेंगे। सरकार को उम्मीद है कि इससे बुजुर्गों को जहां अच्छा जीवन मिल पाएगा। इनमें से कुछ जिलों में तो वृद्धाश्रम बनने तक शुरू हो गए हैं। समाजसेवी वेद प्रकाश सोनी बताते हैं कि वृद्धाश्रम समय की जरूरत है क्योंकि समय बदल गया है। किताबों में परिवार की परिभाषा तक बदल गई है। ऐसे में बुजुर्गों की तरफ सोचना जरूरी हो गया है।
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डिप्टी मेयर ने लड़ी थी वृद्धाश्रम के लिए लंबी जंग
मोहाली के डिप्टी मेयर कुलजीत सिंह बेदी ने इस संबंधी याचिका दायर की थी। उन्होंने याचिका में कहा था कि मोहाली समेत पंजाब के अन्य जिलों में सरकार ने जिम्मेदारी का सही ढंग से निर्वाह न करते हुए वृद्धाश्रम नहीं बनाए हैं। सीनियर सिटीजन एक्ट के प्रावधानों के तहत हर जिले में वृद्धाश्रम बनाने का प्रावधान है। इसके बावजूद पंजाब इसे लागू नहीं कर रहा। इसके बाद इस दिशा में फैसला हुआ था।