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महिला दिवस : नन्हीं परियों की फौज जमीन पर लाने के लिए रोकी कन्या भ्रूणहत्या

Tue, 08 Mar 2022 01:32 AM IST
Mohali Bureau मोहाली ब्‍यूरो
Updated Tue, 08 Mar 2022 01:32 AM IST
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Women's Day: Stop female feticide to bring an army of little fairies to the ground
​परिवार के साथ डॉक्टर अलकजोत कौर। - फोटो : MOHALI
नयागांव। मेरी माता सरकारी स्कूल में अध्यापक थी। वह हमेशा ही लोगों की लड़कियों को पढ़ाने-लिखाने और कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए जागरूक करती थी। इतना ही नहीं उन्होंने मुझे भी बेटों की तरह पढ़ाया लिखाया। उन्हीं के प्रयास से मैं डॉक्टर बन पाई। इसके बाद उन्हीं की सोच को आगे बढ़ाते हुए मैंने ग्रामीण इलाकों में महिलाओं (आशा और आंगनबाड़ी वर्कर) की ऐसी फौज खड़ी कर दी कि नन्नी परियों के जमीन तक पहुंचने में कोई दिक्कत न आए। इसके अच्छे नतीजे आ रहे हैं और अब गांव के लोगों की सोच बदल रही है। इतना ही नहीं लिंगानुपात भी बढ़ रहा है। यह अनुभव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बूथगढ़ की सीएमओ डॉक्टर अलकजोत कौर ने साझा किए हैं।
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डॉ. अलकजोत कौर ने बताया कि गुरु नानक पब्लिक स्कूल चंडीगढ़ से अपनी प्रारंभिक शिक्षा की पढ़ाई की। फिर 1990 में पटियाला स्थित राजेंद्रा मेडिकल कॉलेज में मेडिकल में दाखिला लिया था और इसके बाद से अब तक उनका जीवन नौकरी के दौरान महिलाओं की भलाई में ही बीत रहा है और यहीं उनका उद्देश्य भी है। ग्रामीण इलाकों में आज भी कुछ परिवार बेटी के जन्म पर तरह-तरह की बातें करते हैं, लेकिन मैंने ग्रामीण इलाकों में नौकरी करते हुए लोगों को इसके लिए जागरूक किया है। मैं लोगों को खुद का भी उदाहरण देती हूं कि आजकल लड़के और लड़की में कोई फर्क नहीं है। जो काम एक लड़का कर सकता है, वह लड़की भी कर सकती है। उनके साथ पूरे ग्रामीण इलाके में करीब 150 महिला कर्मचारी हैं। इनमें से 92 आशा वर्कर, एएनएम, सामुदायिक स्वास्थ्य कर्मचारी और अन्य कर्मचारी हैं। सभी महिलाओं के लिए काम कर रही हैं।
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आसान नहीं है लोगों की सोच बदलना
महिला की नौकरी के साथ-साथ अपने परिवार की जिम्मेदारी भी होती है। कई बार नौकरी और परिवार की जिम्मेदारियों में संतुलन बनाना काफी मुश्किल हो जाता है। मैं हमेशा मेरे साथ काम करने वाली सभी महिला कर्मचारियों को प्रोत्साहित करती हूं कि वह महिला होते हुए खुद को किसी से कम न समझें। जन्म से लेकर अंतिम क्षणों तक हर इंसान के जीवन में महिला का महत्व होता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों के साथ मिलकर इलाके में कन्या भ्रूणहत्या को रोकने के लिए जगह-जगह सेमिनार लगाए जाते हैं। स्कूलों में जाकर लड़कियों को उनके दायित्व और अधिकारों की जानकारी भी दी जाती है।
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