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गैंगस्टर लारेंस बिश्नोई व राजू बसोदिया गैंग के दो गुर्गे हथियारों समेत काबू
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मोहाली। गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और राजू बिसौदी गैंग के दो शातिरों को बुधवार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ समेत कई राज्यों की पुलिस को इनकी तलाश थी। हत्या, लूट आदि के कई मामले इन पर दर्ज हैं। आरोपी विजय कुमार निवासी गांव महमदपुर, डेराबस्सी और मनप्रीत सिंह उर्फ भाऊ निवासी थाना जिला जैतों का रहने वाला है।
एसएसपी सतिंदर सिंह ने बताया कि दोनों से पूछताछ में कई मामले सुलझे हैं जबकि कई और भी सुलझने की उम्मीद है। दोनों गुर्गों के बारे में पुलिस को पहले ही सूचना मिल गई थी। इसके बाद ही उन्हें कुराली से गिरफ्तार किया गया है। उनके पास से प्वाइंट 32 बोर की पिस्तौल बरामद की गई। जांच में पता चला कि 2015 में विजय जेल गया था। वहां उसकी मुलाकात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से हुई। दोनों की दोस्ती हो गई। 2016 में विजय जेल से रिहा होने के बाद बंगलूरू चला गया। कई मामलों में फरार चल रहे गैंगस्टर दीपक टीनू व संपत नेहरा को 2017 में उसने बंगलूरू में छिपने की जगह दी। इसके बाद दीपक टीनू को हरियाणा पुलिस ने धर दबोचा था।
मलयेशिया से संपत नेहरा के आदेश पर करता था लोगों को फोन
कई राज्यों की पुलिस जब विजय के पीछे पड़ गई तो साल 2018 में वह कुआलालंपुर के कुछ ट्रैवल एजेंटों की मदद से मलयेशिया भाग गया। वहां से वह लॉरेंस व राजू बिसौदी के कहने पर लोगों को धमकी भरे फोन करता था। उसने अंबाला व चंडीगढ़ में 2018 व 2019 में डकैती की साजिश रची थी। इतना ही नहीं अंबाला में सराफा बाजार में गहनों की दुकान के एक मालिक की हत्या भी की थी। इन वारदातों में गैंगस्टर अंकित भादू भी शामिल था, जिसे पुलिस ने जीरकपुर में मुठभेड़ के दौरान मार गिराया था।
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फिर बंगलूरू को बनाया था अड्डा
अगस्त 2019 में विजय ऑस्ट्रेलिया गया था। लेकिन जाली दस्तावेजों के चलते ऑस्ट्रेलिया की इमीग्रेशन अथॉरिटी ने वापस भेज दिया था। इसके बाद उसने बंगलूरू को ही अपना ठिकाना बनाया। साथ ही गिरोह की आपराधिक वारदातों को अंजाम देने लगा।
मनप्रीत लॉरेंस का पुराना साथी
एसएसपी ने बताया कि मनप्रीत सिंह उर्फ भाऊ लॉरेंस बिश्नोई का पुराना साथी है। गिरोह की कई आपराधिक गतिविधियों में वह शामिल है। दिसंबर 2020 में थाना सिटी फरीदकोट में उस पर हत्या की कोशिश का केस दर्ज हुआ था। उसने लॉरेंस के इशारे पर कई शूटरों को छिपने की जगह दी थी।
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एसएसपी सतिंदर सिंह ने बताया कि दोनों से पूछताछ में कई मामले सुलझे हैं जबकि कई और भी सुलझने की उम्मीद है। दोनों गुर्गों के बारे में पुलिस को पहले ही सूचना मिल गई थी। इसके बाद ही उन्हें कुराली से गिरफ्तार किया गया है। उनके पास से प्वाइंट 32 बोर की पिस्तौल बरामद की गई। जांच में पता चला कि 2015 में विजय जेल गया था। वहां उसकी मुलाकात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से हुई। दोनों की दोस्ती हो गई। 2016 में विजय जेल से रिहा होने के बाद बंगलूरू चला गया। कई मामलों में फरार चल रहे गैंगस्टर दीपक टीनू व संपत नेहरा को 2017 में उसने बंगलूरू में छिपने की जगह दी। इसके बाद दीपक टीनू को हरियाणा पुलिस ने धर दबोचा था।
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मलयेशिया से संपत नेहरा के आदेश पर करता था लोगों को फोन
कई राज्यों की पुलिस जब विजय के पीछे पड़ गई तो साल 2018 में वह कुआलालंपुर के कुछ ट्रैवल एजेंटों की मदद से मलयेशिया भाग गया। वहां से वह लॉरेंस व राजू बिसौदी के कहने पर लोगों को धमकी भरे फोन करता था। उसने अंबाला व चंडीगढ़ में 2018 व 2019 में डकैती की साजिश रची थी। इतना ही नहीं अंबाला में सराफा बाजार में गहनों की दुकान के एक मालिक की हत्या भी की थी। इन वारदातों में गैंगस्टर अंकित भादू भी शामिल था, जिसे पुलिस ने जीरकपुर में मुठभेड़ के दौरान मार गिराया था।
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फिर बंगलूरू को बनाया था अड्डा
अगस्त 2019 में विजय ऑस्ट्रेलिया गया था। लेकिन जाली दस्तावेजों के चलते ऑस्ट्रेलिया की इमीग्रेशन अथॉरिटी ने वापस भेज दिया था। इसके बाद उसने बंगलूरू को ही अपना ठिकाना बनाया। साथ ही गिरोह की आपराधिक वारदातों को अंजाम देने लगा।
मनप्रीत लॉरेंस का पुराना साथी
एसएसपी ने बताया कि मनप्रीत सिंह उर्फ भाऊ लॉरेंस बिश्नोई का पुराना साथी है। गिरोह की कई आपराधिक गतिविधियों में वह शामिल है। दिसंबर 2020 में थाना सिटी फरीदकोट में उस पर हत्या की कोशिश का केस दर्ज हुआ था। उसने लॉरेंस के इशारे पर कई शूटरों को छिपने की जगह दी थी।