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Mohali News: ऑटिज्म बच्चों को खेल-खेल में दी जाएगी थेरेपी, एम्स में बनेगा सेंसरी पार्क

Sat, 12 Sep 2026 02:02 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 12 Sep 2026 02:02 AM IST
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Children with autism to receive therapy through play; sensory park to be built at AIIMS
मोहाली। एम्स मोहाली के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ऑटिज्म एंड न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर्स में एक सेंसरी पार्क विकसित किया जाएगा। इस पार्क पर करीब 20 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इसका उद्देश्य ऑटिज्म और अन्य न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर वाले बच्चों को खेल-खेल में थेरेपी देना है। अभिभावकों को भी बच्चों के साथ घर पर सुरक्षित खेल गतिविधियों का प्रशिक्षण मिलेगा।
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यह पार्क बच्चों को अलग-अलग संवेदी अनुभवों के प्रति बेहतर प्रतिक्रिया देना सिखाएगा। संरचित गतिविधियों के माध्यम से बच्चे शांत रहना और ध्यान केंद्रित करना सीखेंगे। इससे उन्हें अपने शरीर को व्यवस्थित करने में भी मदद मिलेगी। थेरेपी और सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सकेगी। कई बच्चों में अधिक सक्रियता या संवेदी-सीकिंग व्यवहार होता है। ऐसे बच्चों को दौड़ने, चढ़ने और कूदने की अधिक जरूरत महसूस होती है। सामान्य पार्क में चोट लगने का जोखिम रहता है, इसलिए थेरेप्यूटिक एरिया सुरक्षित वातावरण देगा। इस पार्क में इंडोर और आउटडोर थेरेप्यूटिक एरिया विकसित किए जाएंगे। उम्मीद है कि इस परियोजना पर जल्द ही काम शुरू कर दिया जाएगा।
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मोटर कौशल और शारीरिक जागरूकता



पार्क में बच्चों के मोटर डेवलपमेंट और शारीरिक जागरूकता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। संतुलन बनाने, चढ़ने, कूदने और झूला झूलने जैसी गतिविधियां कराई जाएंगी। क्रॉलिंग और अलग-अलग सतहों पर चलने का अभ्यास भी कराया जाएगा। इससे बच्चों को शरीर की गतिविधियों का बेहतर समन्वय करने में मदद मिलेगी। वे किसी कार्य को क्रमबद्ध तरीके से करना भी सीखेंगे। सेंसरी पार्क में खेल को केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रखा जाएगा। बच्चों को अपनी जरूरतें बताने का अभ्यास कराया जाएगा। वे बारी का इंतजार करना और चीजें साझा करना सीखेंगे। दूसरे बच्चों के साथ मिलकर गतिविधियां करने का अवसर मिलेगा। इससे उनके संचार और सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा मिलेगा।
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विशेषज्ञों की राय और अभिभावकों का प्रशिक्षण



वरिष्ठ डॉक्टर और बच्चों के विकास संबंधी विशेषज्ञ छाया प्रसाद ने इस पहल का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि पार्क बच्चों की विकासात्मक जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार होगा। खेल आधारित गतिविधियों से संवेदी विनियमन, मोटर कौशल और सामाजिक व्यवहार पर काम होगा। उनका प्रयास है कि बच्चों को सुरक्षित और अनुकूल वातावरण में थेरेपी का लाभ मिले। अभिभावकों को भी घर पर बच्चों के साथ सुरक्षित खेल आधारित गतिविधियां सिखाने पर जोर दिया जाएगा। इससे थेरेपी का अभ्यास घर के माहौल में भी जारी रखा जा सकेगा।




क्या कहते हैं अधिकारी



सेंसरी पार्क को बच्चों की विकासात्मक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाएगा। खेल आधारित गतिविधियों के माध्यम से सेंसरी रेगुलेशन, मोटर स्किल, बॉडी अवेयरनेस और सामाजिक व्यवहार जैसे पहलुओं पर व्यवस्थित तरीके से काम किया जा सकेगा। हमारा प्रयास है कि बच्चों को सुरक्षित और अनुकूल वातावरण में थेरेपी का लाभ मिले। - डॉ. छाया प्रसाद, वरिष्ठ डॉक्टर और बच्चों के विकास संबंधी विशेषज्ञ
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