{"_id":"6299178121b2b976f819cb36","slug":"two-arrested-including-district-forest-officer-for-taking-bribe-in-farm-house-case-mohali-news-pkl452530611","type":"story","status":"publish","title_hn":"फार्म हाउस मामले में रिश्वत लेने के आरोप में जिला वन अधिकारी समेत दो गिरफ्तार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फार्म हाउस मामले में रिश्वत लेने के आरोप में जिला वन अधिकारी समेत दो गिरफ्तार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नयागांव/मोहाली। अवैध फार्म हाउस से जुड़े रिश्वत लेने के मामले में विजिलेंस ब्यूरो ने कार्रवाई करते हुए जिला वन अधिकारी गुरअमनप्रीत सिंह एवं ठेकेदार हरमहिंदर सिंह उर्फ हम्मी के खिलाफ केस दर्ज किया है। साथ ही वीरवार को दोनों को गिरफ्तार कर लिया। इन्हें देर शाम अदालत में पेश करके दो दिन का रिमांड हासिल किया है।
वन अफसर पर रिश्वत के रूप में दो लाख रुपये लेने एवं मोटी रकम मांगने व ठेकेदार पर बिचौलिए की भूमिका निभाने आरोप है। रिश्वत लेने संबंधी हुई बातचीत व लेनदेन की करीब डेढ़ घंटे की वीडियो रिकॉर्डिंग भी विजिलेंस को सौंपी है। विजिलेंस को इस संबंधी चंडीगढ़ के सेक्टर-दस निवासी देविंदर सिंह संधू ने शिकायत दी थी। दूसरी तरफ चीफ कंजरवेटर (हिल्स) भी इस मामले में विजिलेंस जांच की मांग कर चुके हैं।
शिकायतकर्ता ने बताया कि गांव मसोल में उनकी करीब 100 एकड़ जमीन कंपनी के नाम पर है। इसके कुछ हिस्से पर पंजाब भूमि संरक्षण एक्ट 1900 की धारा 4 लगी हुई है। उसकी आड़ में वन विभाग के अधिकारियों के द्वारा रिश्वत लेने के लिए परेशान किया जाता था। 2016 में वन विभाग के अधिकारियों ने उनके दोस्त सुखजिंदर सिंह एवं 2017 में पिता के खिलाफ पेड़ काटने के आरोप में नुकसान रिपोर्ट तैयार की थी लेकिन हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान दोनों रिपोर्टों पर कार्यवाई से रोक लगा दी थी। अब रेंज अधिकारी रणजोत सिंह ने 24 अप्रैल को पिता बीएस संधू एवं तरसेम सिंह के खिलाफ नयागांव पुलिस को शिकायत दी थी । 27 अप्रैल को रेंज अधिकारी रणजोत सिंह एवं पटवारी अमन के साथ ठेकेदार के मोहाली ऑफिस में आकर मिले थे। उन्होंने मामले को निपटाने के लिए जिला वन अधिकारी गुरअमनप्रीत सिंह के साथ पैसे की लेनदेन करने की बात कही थी। 30 अप्रैल को ठेकेदार हरमहिंदर सिंह उर्फ हम्मी ने गुरअमनप्रीत के साथ मुलाकात के लिए अपने ऑफिस में बुलाया और साथ में 2 लाख रुपये लाने को कहा था। मुलाकात के अंत में जिला वन अधिकारी ने दो लाख रुपये उनसे ले लिए। फिर उन्हें मुख्य वनपाल विशाल चौहान से बात कर आगे की कार्रवाई की बात कही।
विज्ञापन
पैसे नहीं दिए तो दर्ज करवाया केस
डब्लूडब्लूआईसीएस के डायरेक्टर देवेंद्र संधू ने बताया कि मुलाकात के दो दिन बाद जिला वन अधिकारी ने ठेकेदार के जरिए एक करोड़ रुपये रिश्वत के रूप में मांगे। साथ ही दस लाख रुपये मासिक रूप से एवं हर फार्म हाउस की बिक्री पर पांच लाख रुपये हिस्सा देने की मांग की थी। देवेंद्र ने बताया कि जब उन्होंने पैसे देने से मना कर दिया तो वन विभाग के अधिकारियों ने उनके परिजनों के खिलाफ नयागांव थाने में चौबीस अप्रैल को दी गई शिकायत के आधार पर नौ मई को केस दर्ज करवाया था।
डीएफओ से मुलाकात की वीडियो रिकॉर्डिंग की
देवेंद्र संधू ने 30 अप्रैल को जिला वन अधिकारी गुरअमनप्रीत सिंह के साथ हुई करीब 1 घंटा 30 मिनट की मुलाकात को एक खुफिया डिवाइस के जरिए रिकॉर्ड किया गया था। इसका खुलासा उन्होंने 29 मई को चंडीगढ़ प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता के दौरान किया था। उनकी प्रेस वार्ता के तुरंत बाद 29 मई को ही डीएफओ गुरअमनप्रीत सिंह ने भी प्रेस वार्ता कर अपना पक्ष रखा था। इस मौके गुरअमनप्रीत ने इस वीडियो को खारिज किया था। साथ कहा था कि इससे छेड़छाड़ की गई है।
राष्ट्रपति को भी दी शिकायत
देवेंद्र संधू ने कहा कि वह इस मामले की शिकायत देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया, गवर्नर पंजाब, मुख्यमंत्री पंजाब, चीफ सेक्रेटरी, विजिलेंस एवं दूसरे अन्य करीब 19 विभागों को भी की गई थी । उन्हें उम्मीद है कि अब वहां से सरकार से पूछा जाएगा। साथ ही उन्हें इंसाफ मिलेगा।
चीफ कंजरवेटर भी कर चुके हैं डीएफओ के खिलाफ जांच की मांग
चीफ कंजरवेटर (हिल्स) हर्ष कुमार ने 27 मई को सरकार को एक पत्र लिखकर जिला वन अधिकारी गुरअमनप्रीत सिंह के तबादले की सिफारिश की थी। यही नहीं उन्होंने विजिलेंस के डीआईजी को भी वीडियो संबंधी जांच के लिए एक पत्र लिखा था। उन्होंने बताया कि मेरे पास गुरअमनप्रीत के खिलाफ शिकायत आई थी। इसकी प्रारंभिक जांच में वह आरोपी साबित हो रहा था। उसी के आधार पर मैंने कार्रवाई की थी।
यह था मामला
गांव टांडी एवं मसोल के बीच में कुछ फार्म हाउस बनाए जाने संबंधी शिकायत डीएफओ ने नयागांव पुलिस को 24 अप्रैल को दी थी। उसके बाद 27 अप्रैल को विभाग के दो कर्मचारियों ने देवेंद्र संधू से मुलाकात कर डीएफओ से मुलाकात का संदेश दिया था। वायरल वीडियो के अनुसार 30 अप्रैल को डीएफओ एवं देवेंद्र संधू की मुलाकात हुई थी लेकिन 9 मई को वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम 1900 धारा 4 एवं 5 के तहत देवेंद्र संधू के पिता रिटायर्ड कर्नल बीएस संधू एवं तरसेम सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवा दिया था। इसके बाद 26 मई को उस इलाके में कार्रवाई करते हुए वन विभाग ने दस हजार पेड़ लगाए गए थे। साथ ही देवेंद्र संधू द्वारा बनाया गया मुख्य द्वार एवं सड़क को जेसीबी मशीन के द्वारा गिरा दिया था। देवेंद्र संधू ने मामले की शिकायत वीडियो के साथ उच्च स्तर तक की थी। उसमें विजिलेंस ब्यूरो की जांच के बाद कार्रवाई की मांग की गई है।
क्या है पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम की धारा 4 एवं 5
इस अधिनियम की धारा 3 के तहत सरकार किसी भी इलाके में मिट्टी के कटाव को रोकने एवं पानी के उचित बहाव को बरकरार रखने के लिए किसी जमीन या जमीन के हिस्से पर इस अधिनियम को लागू कर सकती है। यह स्थायी या अस्थायी तौर पर हो सकता है । इस अधिनियम की धारा 4 सरकार को उस जमीन पर मिट्टी एवं पेड़ों के कटाव को रोकने का अधिकार देती है। वही धारा 5 एवं 5 ए के तहत नोटिफाई जमीन पर उल्लंघन के खिलाफ किसी भी व्यक्ति पर कार्रवाई का अधिकार देती है।
विज्ञापन
वन अफसर पर रिश्वत के रूप में दो लाख रुपये लेने एवं मोटी रकम मांगने व ठेकेदार पर बिचौलिए की भूमिका निभाने आरोप है। रिश्वत लेने संबंधी हुई बातचीत व लेनदेन की करीब डेढ़ घंटे की वीडियो रिकॉर्डिंग भी विजिलेंस को सौंपी है। विजिलेंस को इस संबंधी चंडीगढ़ के सेक्टर-दस निवासी देविंदर सिंह संधू ने शिकायत दी थी। दूसरी तरफ चीफ कंजरवेटर (हिल्स) भी इस मामले में विजिलेंस जांच की मांग कर चुके हैं।
विज्ञापन
शिकायतकर्ता ने बताया कि गांव मसोल में उनकी करीब 100 एकड़ जमीन कंपनी के नाम पर है। इसके कुछ हिस्से पर पंजाब भूमि संरक्षण एक्ट 1900 की धारा 4 लगी हुई है। उसकी आड़ में वन विभाग के अधिकारियों के द्वारा रिश्वत लेने के लिए परेशान किया जाता था। 2016 में वन विभाग के अधिकारियों ने उनके दोस्त सुखजिंदर सिंह एवं 2017 में पिता के खिलाफ पेड़ काटने के आरोप में नुकसान रिपोर्ट तैयार की थी लेकिन हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान दोनों रिपोर्टों पर कार्यवाई से रोक लगा दी थी। अब रेंज अधिकारी रणजोत सिंह ने 24 अप्रैल को पिता बीएस संधू एवं तरसेम सिंह के खिलाफ नयागांव पुलिस को शिकायत दी थी । 27 अप्रैल को रेंज अधिकारी रणजोत सिंह एवं पटवारी अमन के साथ ठेकेदार के मोहाली ऑफिस में आकर मिले थे। उन्होंने मामले को निपटाने के लिए जिला वन अधिकारी गुरअमनप्रीत सिंह के साथ पैसे की लेनदेन करने की बात कही थी। 30 अप्रैल को ठेकेदार हरमहिंदर सिंह उर्फ हम्मी ने गुरअमनप्रीत के साथ मुलाकात के लिए अपने ऑफिस में बुलाया और साथ में 2 लाख रुपये लाने को कहा था। मुलाकात के अंत में जिला वन अधिकारी ने दो लाख रुपये उनसे ले लिए। फिर उन्हें मुख्य वनपाल विशाल चौहान से बात कर आगे की कार्रवाई की बात कही।
विज्ञापन
पैसे नहीं दिए तो दर्ज करवाया केस
डब्लूडब्लूआईसीएस के डायरेक्टर देवेंद्र संधू ने बताया कि मुलाकात के दो दिन बाद जिला वन अधिकारी ने ठेकेदार के जरिए एक करोड़ रुपये रिश्वत के रूप में मांगे। साथ ही दस लाख रुपये मासिक रूप से एवं हर फार्म हाउस की बिक्री पर पांच लाख रुपये हिस्सा देने की मांग की थी। देवेंद्र ने बताया कि जब उन्होंने पैसे देने से मना कर दिया तो वन विभाग के अधिकारियों ने उनके परिजनों के खिलाफ नयागांव थाने में चौबीस अप्रैल को दी गई शिकायत के आधार पर नौ मई को केस दर्ज करवाया था।
डीएफओ से मुलाकात की वीडियो रिकॉर्डिंग की
देवेंद्र संधू ने 30 अप्रैल को जिला वन अधिकारी गुरअमनप्रीत सिंह के साथ हुई करीब 1 घंटा 30 मिनट की मुलाकात को एक खुफिया डिवाइस के जरिए रिकॉर्ड किया गया था। इसका खुलासा उन्होंने 29 मई को चंडीगढ़ प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता के दौरान किया था। उनकी प्रेस वार्ता के तुरंत बाद 29 मई को ही डीएफओ गुरअमनप्रीत सिंह ने भी प्रेस वार्ता कर अपना पक्ष रखा था। इस मौके गुरअमनप्रीत ने इस वीडियो को खारिज किया था। साथ कहा था कि इससे छेड़छाड़ की गई है।
राष्ट्रपति को भी दी शिकायत
देवेंद्र संधू ने कहा कि वह इस मामले की शिकायत देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया, गवर्नर पंजाब, मुख्यमंत्री पंजाब, चीफ सेक्रेटरी, विजिलेंस एवं दूसरे अन्य करीब 19 विभागों को भी की गई थी । उन्हें उम्मीद है कि अब वहां से सरकार से पूछा जाएगा। साथ ही उन्हें इंसाफ मिलेगा।
चीफ कंजरवेटर भी कर चुके हैं डीएफओ के खिलाफ जांच की मांग
चीफ कंजरवेटर (हिल्स) हर्ष कुमार ने 27 मई को सरकार को एक पत्र लिखकर जिला वन अधिकारी गुरअमनप्रीत सिंह के तबादले की सिफारिश की थी। यही नहीं उन्होंने विजिलेंस के डीआईजी को भी वीडियो संबंधी जांच के लिए एक पत्र लिखा था। उन्होंने बताया कि मेरे पास गुरअमनप्रीत के खिलाफ शिकायत आई थी। इसकी प्रारंभिक जांच में वह आरोपी साबित हो रहा था। उसी के आधार पर मैंने कार्रवाई की थी।
यह था मामला
गांव टांडी एवं मसोल के बीच में कुछ फार्म हाउस बनाए जाने संबंधी शिकायत डीएफओ ने नयागांव पुलिस को 24 अप्रैल को दी थी। उसके बाद 27 अप्रैल को विभाग के दो कर्मचारियों ने देवेंद्र संधू से मुलाकात कर डीएफओ से मुलाकात का संदेश दिया था। वायरल वीडियो के अनुसार 30 अप्रैल को डीएफओ एवं देवेंद्र संधू की मुलाकात हुई थी लेकिन 9 मई को वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम 1900 धारा 4 एवं 5 के तहत देवेंद्र संधू के पिता रिटायर्ड कर्नल बीएस संधू एवं तरसेम सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवा दिया था। इसके बाद 26 मई को उस इलाके में कार्रवाई करते हुए वन विभाग ने दस हजार पेड़ लगाए गए थे। साथ ही देवेंद्र संधू द्वारा बनाया गया मुख्य द्वार एवं सड़क को जेसीबी मशीन के द्वारा गिरा दिया था। देवेंद्र संधू ने मामले की शिकायत वीडियो के साथ उच्च स्तर तक की थी। उसमें विजिलेंस ब्यूरो की जांच के बाद कार्रवाई की मांग की गई है।
क्या है पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम की धारा 4 एवं 5
इस अधिनियम की धारा 3 के तहत सरकार किसी भी इलाके में मिट्टी के कटाव को रोकने एवं पानी के उचित बहाव को बरकरार रखने के लिए किसी जमीन या जमीन के हिस्से पर इस अधिनियम को लागू कर सकती है। यह स्थायी या अस्थायी तौर पर हो सकता है । इस अधिनियम की धारा 4 सरकार को उस जमीन पर मिट्टी एवं पेड़ों के कटाव को रोकने का अधिकार देती है। वही धारा 5 एवं 5 ए के तहत नोटिफाई जमीन पर उल्लंघन के खिलाफ किसी भी व्यक्ति पर कार्रवाई का अधिकार देती है।