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जिन लोगों ने उड़ाई थी आवाज, वह भी सरकार के आदेशों के विरोध में आए

Mon, 06 Jun 2022 01:51 AM IST
Mohali Bureau मोहाली ब्‍यूरो
Updated Mon, 06 Jun 2022 01:51 AM IST
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Those who raised their voice, now they also came out against the order of the government
मुल्लांपुर (नयागांव)। फाइनेंशियल कमिश्नर रेवेन्यू पंजाब (एफसीआर) अनुराग अग्रवाल ने एक जून को आदेश पारित कर पांच गांवों की 3603 एकड़ 3 कनाल 13 मरले जमीन को हिस्सेदारों से हटाकर ग्राम पंचायत के नाम कर दिया था। जिन लोगों ने इस जमीन के खिलाफ पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को शिकायत दी थी, वह भी एफसीआर के इस फैसले के खिलाफ खड़े हो गए हैं। वही ग्रामीणों ने विधायक पर आरोप लगाए हैं कि उनकी तरफ से मामले में कोई सहयोग नहीं मिल रहा है।
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फारेस्ट मैनेजमेंट सोसायटी माजरी की तरफ से मुख्यमंत्री दरबार में इस जमीन संबंधी शिकायत दी गई थी। इस पर कार्यवाही करते हुए एफसीआर की ओर से यह आदेश पारित किए गए थे। जबकि सोसायटी के सदस्यों का कहना है कि एफसीआर की ओर से 1992 में हुए इंतकाल नंबर 2026 को रद्द किया गया है। जो कि गलत है। हमारी ओर से उन्हें जो शिकायत दी गई थी कि वह इंतकाल नंबर 4895 को लेकर थी। जो 27 दिसंबर 2017 को किया गया था। इसमें उस समय के नायब तहसीलदार धीरेंद्र सिंह धुत की मिलीभगत से हिस्सेदारी में गड़बड़ी की गई थी। काफी ऐसे लोगो को हिस्सेदार बना दिया था जो यहाँ रहते ही नहीं थे। सोसाइटी की तरफ से इस इंतकाल की जांच संबंधी शिकायत दी थी।
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वही ग्रामीणों में एफसीआर के आदेश के खिलाफ गुस्सा है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर यह आदेश निरस्त नहीं किया जाता है, तो सरकार के खिलाफ बहुत बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। ग्रामीणों ने बताया कि वह इस मामले संबंधी इलाके की विधायक के पास भी गए थे। लेकिन कई बार जाने के बाद भी उनकी तरफ से कोई संतुष्टि पूर्ण जवाब नहीं मिला है। ऐसे में सिर्फ आंदोलन का ही विकल्प है।
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सरकार का फैसला गलत
सरकार की ओर से गलत फैसला लिया गया है। हमने मुख्यमंत्री को इंतकाल नंबर 4895 की जांच संबंधी शिकायत दी थी। लेकिन सरकार ने यह फैसला बिना सोचे समझे लिया है। हमारी सोसायटी ग्रामीणों के साथ खड़ी है। -सुच्चा राम, प्रधान फॉरेस्ट मैनेजमेंट सोसायटी मांजरी
विधायक का नहीं मिल रहा साथ
विधायक से कई बार मिलने के बाद भी विधायक ने कोई संतुष्टि पूर्ण जवाब नहीं दिया है। ऐसे में ग्रामीणों के पास सिर्फ आंदोलन का ही विकल्प है। -गरजा राम निवासी कसौली
सरकार के खिलाफ करेंगे प्रदर्शन
सरकार को यह फैसला वापस लेना पड़ेगा। अगर सरकार फैसला वापस नहीं लेती है, तो कई गांव के लोग इकट्ठे होकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। -कृष्ण सिंह, निवासी गुडा

नहीं है कोई पंचायती जमीन
पांचों गांव में कोई भी पंचायती जमीन नहीं है। इसका प्रस्ताव पंचायतों की ओर से पहले ही रेवेन्यू विभाग को भेज दिया गया है। यह जमीन हमारे बुजुर्गों की जमीन है। -राम लाल, फॉरेस्ट मैनेजमेंट सोसायटी मांजरी
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