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Mohali News: घरेलू हिंसा का मामला दबाने का मामला राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य के सामने भी उठा, पीड़ित महिला ने लगाए आरोप, कहा-

Tue, 18 Nov 2025 11:48 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 18 Nov 2025 11:48 PM IST
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The issue of suppressing domestic violence cases was also raised before a member of the National Commission for Women, the victim made allegations and said-
मोहाली। हाईकोर्ट के आदेश पर 2022 में सोहाना थाने में दर्ज घरेलू हिंसा के मामले को दबाने का आरोप पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू, मेयर जीती सिद्धू, डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर, डीएसपी सिटी-2 हरसिमरन सिंह बल और सात पुलिस कर्मचारियों पर लगा है। पीड़ित महिला परनीत कौर ने मंगलवार को यह मामला राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य ममता कुमारी के सामने रखा। पीड़िता का कहना है कि 2019 से अब तक उनके केस को 20 से अधिक पुलिस अधिकारियों को मार्क किया गया, लेकिन कार्रवाई आगे बढ़ने की बजाय फाइल बार-बार रोक दी गई। उनका आरोप है कि कई अधिकारियों ने ‘सेटलमेंट मॉडल’ अपनाकर जांच को गुमराह किया और राजनीतिक दबाव में केस को जानबूझकर लंबा खींचा गया। शिकायत सुनने के बाद ममता कुमारी ने कहा कि फिलहाल मामले की जांच एसआईटी कर रही है। यदि पीड़िता एसआईटी की जांच रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं होती, तो वह इसे दोबारा चुनौती दे सकती हैं।
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इससे पहले महिला ने बताया कि यह मामला पंजाब मानवाधिकार आयोग भी पहुंचा। यहां जांच में सामने आया कि डीएसपी बल और सात पुलिसकर्मियों ने लापरवाही और पक्षपात कर इस केस को जानबूझकर रोका। शिकायतों पर समय पर कार्रवाई न करना, फाइल को बार-बार अलग अधिकारियों को मार्क करना और जांच लंबित रखना आयोग के अनुसार योजनाबद्ध देरी के संकेत हैं। आयोग ने सभी के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की, लेकिन पीड़िता के अनुसार कोई कदम नहीं उठाया गया, जिससे मामला चार साल दबा रहा। संवाद
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इस पुलिस कर्मचारियों पर भी है आरोप
महिला ने एएसआई ओम प्रकाश, हेड कांस्टेबल इंद्रप्रीत सिंह, हेड कांस्टेबल मुकेश कुमार, कांस्टेबल जतिंदर, एएसआई केवल कुमार, एसआई नायब सिंह, एएसआई बलबीर सिंह पर भी आरोप लगाए गए हैं। परनीत कौर ने 2019 में ससुराल पक्ष पर घरेलू हिंसा के आरोप लगाए थे। उन्होंने सोहाना थाने में तीन बार शिकायतें दीं, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। महिला का आरोप है कि कुछ पुलिसकर्मियों ने उनके साथ बदतमीजी की और शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया। 2021 में जब उनके ससुराल पक्ष ने दोबारा मारपीट की, तब भी पुलिस दो घंटे तक मौके पर नहीं पहुंची। हाईकोर्ट के आदेश के तीन महीने बाद 2022 में सोहाना थाने में मामला दर्ज हुआ। इसकी जांच एसपी सिटी मोहाली की निगरानी में हुई और एसपी ने लखविंदर सिंह सहित आरोपियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। लेकिन पीड़िता का आरोप है कि आरोपी पक्ष ने एसएसपी मोहाली और डीआईजी रोपड़ को आवेदन देकर जांच रुकवाने की कोशिश की। उनका कहना है कि तत्कालीन डीआईजी हरचरण भुल्लर ने एसपी द्वारा जांच पूरी होने के बावजूद केस को दूसरे डीएसपी को मार्क कर दिया, जो डीजीपी के एसओपी और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के खिलाफ था।
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नए डीआईजी ने की एसआईटी गठित
मामले में पीड़िता ने सीबीआई जांच की मांग की है। नए डीआईजी नानक सिंह ने जांच के लिए एसआईटी गठित की है। यह उन सभी बिंदुओं की दोबारा पड़ताल करेगी, जिन पर पहले कार्रवाई नहीं हुई या जानबूझकर रोक दी गई थी।
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