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Mohali News: छठे दिन जनरेटर हुआ फेल, पानी को तरसते रहे 30 हजार, टैंकरों से करना पड़ा गुजारा
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खरड़/मोहाली। न्यू सन्नी एनक्लेव में छठे दिन भी लोग पेयजल संकट से जूझते रहे। करीब 30 हजार लोगों को टैंकर के पानी से गुजारा करना पड़ रहा है। छठे दिन बाजवा डेवलपर ने जनरेटर लगाकर ट्यूबवेल चलाने का प्रयास किया लेकिन जनरेटर ही नहीं चल पाया। इससे लोगों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। नाराज लोगों का कहना है कि डेवलपर वर्षों से पानी की उचित व्यवस्था का झूठा भरोसा देता रहा लेकिन असल में हालात दिन-ब-दिन बदतर होते जा रहे हैं। करीब पांच दिन पहले बिजली विभाग ने कुंडी कनेक्शन काटकर ट्यूबवेल बंद कर दिए थे। इसके बाद जनरेटर लाने की बात कही गई थी। मगर सोमवार को जैसे ही जनरेटर चालू किया गया, वह चलने के बजाय मात्र दिखावा साबित हुआ। समस्या का समाधान नहीं हुआ तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
अभी तक पानी संकट मुख्य रूप से तीन और चार हजार सीरीज नंबर वाले घरों में अधिक था। अब आठ हजार सीरीज नंबरों वाली गलियों में भी पानी न आने की समस्या शुरू हो चुकी है। इससे स्पष्ट है कि समस्या बेहद व्यापक हो चुकी है। पाइपलाइन व वैकल्पिक सप्लाई की कोई योजना सफल नहीं हुई है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि कई बार शिकायतों के बावजूद न तो डेवलपर और न ही प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कदम उठाया गया है। कुछ घरों में पिछले 10-15 दिनों से एक बूंद पानी तक नहीं पहुंचा। लोगों को अपने खर्च पर महंगे दामों पर टैंकर मंगवाने पड़ रहे हैं।
वैकल्पिक बिजली व्यवस्था बहाल हो
पार्षद हरिंदर पाल सिंह जोली ने बताया कि वे अब बुधवार को बिजली विभाग के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। उनसे मांग की जाएगी कि फिलहाल ट्यूबवेल को सुचारू रूप से चलाने के लिए वैकल्पिक बिजली व्यवस्था तुरंत बहाल की जाए। जब तक स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक पानी के टैंकरों पर ही गुजारा करना पड़ेगा। टैंकर भी पूरे क्षेत्र की जरूरतें पूरी करने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
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प्रशासन और डेवलपर होंगे जिम्मेदार
आरडब्ल्यू के सदस्य पवित्र पाल सिंह बराड़ ने बताया कि अब लोग खुलकर प्रशासन और डेवलपर पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि समस्या को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि यह स्वास्थ्य व मानव अधिकार से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। यदि आने वाले दिनों में भी स्थिति में नहीं सुधार हुआ तो निवासी बड़े स्तर पर प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे।
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अभी तक पानी संकट मुख्य रूप से तीन और चार हजार सीरीज नंबर वाले घरों में अधिक था। अब आठ हजार सीरीज नंबरों वाली गलियों में भी पानी न आने की समस्या शुरू हो चुकी है। इससे स्पष्ट है कि समस्या बेहद व्यापक हो चुकी है। पाइपलाइन व वैकल्पिक सप्लाई की कोई योजना सफल नहीं हुई है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि कई बार शिकायतों के बावजूद न तो डेवलपर और न ही प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कदम उठाया गया है। कुछ घरों में पिछले 10-15 दिनों से एक बूंद पानी तक नहीं पहुंचा। लोगों को अपने खर्च पर महंगे दामों पर टैंकर मंगवाने पड़ रहे हैं।
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वैकल्पिक बिजली व्यवस्था बहाल हो
पार्षद हरिंदर पाल सिंह जोली ने बताया कि वे अब बुधवार को बिजली विभाग के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। उनसे मांग की जाएगी कि फिलहाल ट्यूबवेल को सुचारू रूप से चलाने के लिए वैकल्पिक बिजली व्यवस्था तुरंत बहाल की जाए। जब तक स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक पानी के टैंकरों पर ही गुजारा करना पड़ेगा। टैंकर भी पूरे क्षेत्र की जरूरतें पूरी करने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
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प्रशासन और डेवलपर होंगे जिम्मेदार
आरडब्ल्यू के सदस्य पवित्र पाल सिंह बराड़ ने बताया कि अब लोग खुलकर प्रशासन और डेवलपर पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि समस्या को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि यह स्वास्थ्य व मानव अधिकार से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। यदि आने वाले दिनों में भी स्थिति में नहीं सुधार हुआ तो निवासी बड़े स्तर पर प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे।