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Mohali News: 15 करोड़ से ज्यादा पहुंची जुर्माने की रकम, पर नहीं रुक रहा सुखना चो का प्रदूषण

Sun, 25 May 2025 01:14 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 25 May 2025 01:14 AM IST
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The fine amount has reached more than 15 crores, but the pollution of Sukhna Cho is not stopping
घग्गर में जाती सीवर की गंदगी। संवाद 
जीरकपुर। सुखना चो में अनट्रीटेड सीवर का पानी मिक्स होने और अन्य पर्यावरण प्रदूषित करने वाली गतिविधियों पर रोक न लगाने के कारण हर महीने 15 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा रहा है। पिछले साढ़े आठ साल से इसका भुगतान न होने से जुर्माने की यह रकम 15 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है।
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इसके बावजूद न तो नगर परिषद पर्यावरण को क्षति पहुंचाने वाली गतिविधियों पर रोक लगाने में सफल हो रही है और न ही जुर्माने की रकम चुकाने में सफल हो सकी है।
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दरअसल जीरकपुर से होकर बहने वाली सुखना चो में लगातार अनट्रीटेड सीवर का पानी मिक्स हो रहा है। यह गंदा पानी आगे जाकर घग्गर नदी में मिक्स हो जाता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से बार-बार चेतावनी देने के बावजूद नगर परिषद के अधिकारियों ने इस पर नियंत्रण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। जिसके बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से नगर परिषद पर जुर्माना लगाया गया था। नगर परिषद जीरकपुर पर पर्यावरण को क्षति पहुंचाने को लेकर हर महीने 15 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा रहा है। पर्यावरण क्षतिपूर्ति के रूप में नगर परिषद पर यह जुर्माना पिछले करीब 8 साल से लग रहा है।
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पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की ओर से सुखना चो, सिंह नाला, गाजीपुर ड्रेन में बायो रेमेडिएशन न लगाने पर 5 लाख रुपये हर महीने और एसटीपी स्थापित न करने पर 10 लाख रुपए हर महीने पर्यावरण क्षतिपूर्ति के रूप में जुर्माना लगाया जा रहा है। पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक नगर परिषद जीरकपुर ने पिछले करीब साढ़े 8 साल में कुछ भी जमा नहीं करवाया है। इस कारण जुर्माना हर महीने बढ़ता जा रहा है।
नगर परिषद के अधिकारी इसको लेकर गंभीर नहीं है। उनका कहना है कि पर्यावरण क्षतिपूर्ति के रूप में जुर्माना पंजाब के लगभग सभी नगर निगमों और नगर परिषदों पर लगा हुआ है।




साढ़े आढ वर्ष में कई करोड़ रुपए हुई जुर्माने की रकम

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नगर परिषद पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति (जुर्माना) लगाया था लेकिन नगर परिषद ने आज तक जुर्माना नहीं भरा। एक साल का पर्यावरण क्षतिपूर्ति 1 करोड़ 80 लाख रुपये बनती है। हर महीने पर्यावरण क्षतिपूर्ति लगने से यह रकम 15 करोड़ से अधिक पहुंच गई है। जुर्माना राशि लगातार बढ़ती जा रही है और नगर परिषद के अधिकारी इसको गंभीरता से नहीं ले रहे है। न ही खामियों को दूर कर रहे है।



जहां हो रही है अनदेखी

बलटाना एरिया में कई पाइंटों से दूषित पानी और कूड़ा चो में गिराया जा रहा है। बिशनपुरा और गाजीपुर के नजदीक चो के ऊपर से सीवरेज लाइन बनाई हुई है जिसमे ढकोली एरिया की सोसाइटियों का सीवर जुड़ा है। यह सीवर लाइन ओवरफ्लो हो रही है और कई जगहों से टूटी हुई है। जिसका सारा गंदा पानी सीधा चो में गिर रहा है। इसके अलावा बिशनपुरा की तरफ बनी सोसाइटियों के सीवर का पानी भी चो में जा रहा है।




कई सालों से नहीं लग सके एसटीपी

शहर में सीवरेज को ट्रीट करने के लिए सिंहपुरा में एसटीपी लगा हुआ है जिसकी क्षमता 17 मिलियन लीटर डिस्चार्ज प्रतिदिन की है। जबकि शहर में हर रोज करीब 30 से 40 एमएलडी से ज्यादा सीवरेज निकल रहा है। ऐसे में पूरा सीवरेज ट्रीट नहीं हो पा रहा है। शहर में पिछले कई सालों से नए एसटीपी लगने की बातें चल रही हैं लेकिन अभी तक एसटीपी लग नहीं सके।

हाल ही में सनौली गांव में लगने वाले एसटीपी के लिए जगह की पैमाइश की गई है। शताबगढ़ के नजदीक लगने वाले एसटीपी के लिए जगह की पैमाइश बाकी है। गांव सनौली में डीपीएस स्कूल के पिछली तरफ एसटीपी प्लांट लगेगा जिसकी कैपेसिटी 35 एमएलडी होगी। इसके अलावा शताबगढ़ के नजदीक 4 एकड़ जगह में एसटीपी लगेगा।
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