{"_id":"606ef0e3efd4e739f4130ac6","slug":"teacher-of-mohali-took-online-classes-from-icu","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"कोरोना वॉरियर : आईसीयू से ले रहीं ऑनलाइन क्लास, मोहाली की इस शिक्षिका के डॉक्टर्स भी फैन ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना वॉरियर : आईसीयू से ले रहीं ऑनलाइन क्लास, मोहाली की इस शिक्षिका के डॉक्टर्स भी फैन
Thu, 08 Apr 2021 05:33 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 08 Apr 2021 05:33 PM IST
सार
- मोहाली की शिक्षक सुमन आईसीयू से ले रही हैं ऑनलाइन क्लास
- पिछले साल करवाई थी ओपन हार्ट सर्जरी
- फेफड़ों में संक्रमण के कारण आईसीयू में करना पड़ा भर्ती
विज्ञापन
आईसीयू से ऑनलाइन क्लास लेतीं सुमन।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
शिक्षक होना महज एक रोजगार नहीं है, यह एक जिम्मेदारी है, भविष्य के निर्माण की। हालात कैसे भी हों, हर सूरत में इस जिम्मेदारी को निभाना ही शिक्षक होने को सार्थक करता है। ऐसी ही शिक्षक हैं सुमन विज। मोहाली के फेज 4 में रहने वाली सुमन एक निजी स्कूल में पढ़ाती हैं। वे कोरोना से संक्रमित हैं लेकिन इसके बावजूद वे बच्चों को ऑनलाइन पढ़ा रही हैं। सुमन पिछले 15 साल से अध्यापन कर रही हैं।
विज्ञापन
पिछले सप्ताह सेहत खराब होने पर उन्होंने कोरोना जांच करवाई। सोमवार को आई जांच रिपोर्ट में वह पॉजिटिव पाई गई। पिछले साल ही सुमन की ओपन हार्ट सर्जरी हुई थी। अब कोरोना पॉजिटिव आने के बाद जब विस्तृत जांच हुई तो फेफड़ों में निमोनिया की शिकायत मिली। सांस लेने में भी उन्हें दिक्कत हो रही है।
विज्ञापन
मोहाली के एक निजी अस्पताल के आईसीयू वार्ड में उनका इलाज चल रहा है। इतनी दिक्कत होने के बावजूद सुमन ने नन्हे बच्चों की शिक्षा से समझौता नहीं किया। अस्पताल के आईसीयू वार्ड से ही वह सुबह शाम बच्चों की ऑनलाइन क्लास ले रही हैं।
विज्ञापन
अपने काम के प्रति सजग हैं सुमन
सुमन पूरी तरह सकारात्मक हैं और अपने काम के प्रति सजग हैं। यही वजह है कि जब डाक्टर्स ने उन्हें अस्पताल में भर्ती होने के लिए कहा, तो वह अपने साथ किताबें व अन्य शैक्षणिक सामग्री लेकर अस्पताल पहुंची। हालांकि संक्रमण से सुरक्षा के मद्देनजर डाक्टर्स ने कोविड आईसीयू वार्ड में उन्हें किताबें ले जाने की अनुमति नहीं दी।
सुमन कहती हैं कि इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। वह कहती हैं कि पिछले 15 सालों से पढ़ाती आ रही हैं, लिहाजा उन्हें पता है कि बच्चों को क्या पढ़ाना है और कैसे सिखाना है। एक शिक्षक के तौर पर सुमन की प्रतिबद्धता देख डाक्टर्स ही नहीं अन्य मरीज भी उनके मुरीद हो गए हैं।
सुमन कहती हैं कि इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। वह कहती हैं कि पिछले 15 सालों से पढ़ाती आ रही हैं, लिहाजा उन्हें पता है कि बच्चों को क्या पढ़ाना है और कैसे सिखाना है। एक शिक्षक के तौर पर सुमन की प्रतिबद्धता देख डाक्टर्स ही नहीं अन्य मरीज भी उनके मुरीद हो गए हैं।