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Mohali News: अगले पराली सीजन पर तीन लाख मीट्रिक टन खपत क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य

Tue, 09 Jan 2024 01:54 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 09 Jan 2024 01:54 AM IST
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Target to increase consumption capacity by three lakh metric tons in the next stubble season
मोहाली। विशेष रूप से डिजाइन किए गए बॉयलरों के माध्यम से उद्योगों में पराली की खपत के लिए अग्रिम तैयारी करते हुए जिला प्रशासन ने अपनी क्षमता को सालाना चार लाख मीट्रिक टन तक बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। इस संबंध में जानकारी देते हुए डीसी आशिका जैन ने बताया कि जिले की अपनी पराली 1.98 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष है, लेकिन पड़ोसी जिलों के बारे में भी सोच रहे हैं। उन्होंने आगामी धान की कटाई के मौसम में प्रस्तावित अतिरिक्त 0.3 लाख मीट्रिक टन के साथ धान की पराली का उपयोग जीवाश्म ईंधन के रूप में कर सकेंगे। डीसी ने मौजूदा क्षमता की समीक्षा करते हुए कहा कि इसमें सालाना एक लाख मीट्रिक टन का योगदान देने वाली पांच इकाइयां शामिल हैं और दो अन्य साझेदार चंडीगढ़ डिस्टीलरीज और नाहर इंडस्ट्रीज धान के पराली ईंधन आधारित बॉयलर स्थापित करने पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे मौजूदा क्षमता बढ़कर चार लाख मीट्रिक टन हो जाएगी। इसके अलावा, ईंट-भट्ठों को पराली आधारित पैलेट सप्लाई करने के लिए जिले में जल्द ही 3300 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की क्षमता वाली एक नई इकाई स्थापित की जा रही है।
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बॉयलर इकाइयों की क्षमता के अनुसार बेलरों की कमी को पूरा करने के लिए जिले को पर्याप्त संख्या में बेलिंग मशीनों की सप्लाई देने की मांग की जाएगी। उन्होंने कृषि एवं किसान कल्याण विभाग और एडीसी (ग्रामीण विकास) को अतिरिक्त अनुमानित संख्या में बेलर मशीनें तैयार करने को कहा। यद्यपि जिले में कृषि क्षेत्र अन्य जिलों की तुलना में कम है, लेकिन राज्य में उपभोग क्षमता अधिक है, इसलिए मुख्य जोर समय पर आवश्यक मशीनरी की व्यवस्था करने पर होना चाहिए।
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पराली आधारित बॉयलर स्थापित करने की प्रक्रिया में लगे औद्योगिक प्रतिनिधियों को आश्वासन देते हुए डीसी ने कहा कि जिला प्रशासन पहले से ही पराली के स्टॉक को स्टोर करने के लिए भूमि बैंकों की व्यवस्था करने के अलावा, नए उद्योगों में पराली आधारित बॉयलरों को बढ़ावा देने के लिए राज्य द्वारा घोषित सब्सिडी के मामलों के जल्दी निपटारे के लिए प्रतिबद्ध है। पराली जलाने के कारणों की जांच के लिए आने वाले दिनों में सबसे ज्यादा पराली जलाने वाले गांवों और न जलाने वाले गांवों को दौरा करेंगे।
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इस बैठक में औद्योगिक नुमाइंदों के अलावा मौजूद अधिकारियों में एडीसी (ग्रामीण विकास) सोनम चौधरी, एसी (अंडर ट्रेनिंग) डेवी गोयल, डीडीपीओ अमनिंदर पाल सिंह चौहान, डीआर सहकारी गुरबीर सिंह ढिल्लों, कार्यकारी इंजीनियर पीपीसीबी गुरशरन दास और जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक डाॅ. नवरीत कौर शामिल रहीं।
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