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Mohali News: पीएसआईईसी प्लॉट आवंटन घोटाले में वांछित आरोपी उप-मंडल इंजीनियर स्वतेज का कोर्ट में आत्मसमर्पण
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मोहाली। औद्योगिक प्लॉटों के आवंटन में अनियमितताएं बरतने के मामले में वांछित आरोपी पंजाब लघु उद्योग व निर्यात निगम (पीएसआईईसी) के उप-मंडल इंजीनियर (एसडीई) स्वतेज सिंह ने मंगलवार को जिला अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया है। इसकी जानकारी अदालत ने विजिलेंस को दे दी है। इसके बाद विजिलेंस की टीम मौके पर पहुंची और स्वतेज सिंह को गिरफ्तार कर लिया। अदालत ने आरोपी को विजिलेंस के पास तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
स्वतेज सिंह पर आरोप है कि उक्त दोषी ने जाली दस्तावेजों का उपयोग करके गुरतेज सिंह के नाम पर मैसर्स गुरतेज इंडस्ट्रीज नाम की फर्जी फर्म बनाई। इसके बाद उसने अपने पुत्र मनरूप सिंह और अन्य रिश्तेदारों के खातों में पैसे (पीएसआईईसी) को ट्रांसफर करके उक्त फर्म के नाम पर प्लॉट नंबर-ए-394 औद्योगिक फोकल पॉइंट अमृतसर में आवंटित कर दिया था।
बता दें कि पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने 8 मार्च 2024 को पंजाब लघु उद्योग और निर्यात निगम (पीएसआईईसी) के छह अधिकारियों एसपी सिंह मुख्य महाप्रबंधक (सेवानिवृत्त), जसविंदर सिंह रंधावा महाप्रबंधक (सेवानिवृत्त), अमरजीत सिंह काहलों संपदा अधिकारी (सेवानिवृत्त), विजय गुप्ता वरिष्ठ सहायक (सेवानिवृत्त), दर्शन गर्ग सलाहकार (सेवानिवृत्त) और स्वतेज सिंह एसडीओ (सेवानिवृत्त) आदि के खिलाफ आईपीसी की धारा 09, 420, 465, 467, 468, 471, 120-बी तथा 13(1)ए सहित 13(2) के तहत फ्लाइंग स्क्वाड-1 पुलिस स्टेशन मोहाली में केस दर्ज किया था। इन आरोपियों पर आरोप था कि इन अधिकारियों/कर्मचारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए निगम के उक्त अधिकारियों की मिलीभगत से पीएसआईईसी मोहाली के औद्योगिक फोकल प्वाइंट में स्थित 14 भूखंड (प्लॉट संख्या ई-261, सी-210, डी-247, ई-260, सी-211, डी-250, ई-260ए, सी-209, ई-330, सी-177, डी-206, ई-250, 234 और सी-168) का कुल 8,72,71,666 रुपये का राजस्व माफ कर दिया, जिससे सरकार को करोड़ों रुपए का वित्तीय नुकसान हुआ। उन्होंने अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और रिश्तेदारों को गलत तरीके से महंगे औद्योगिक भूखंड आवंटित कर दिए थे। इस घोटाले को दबाने के लिए उक्त आरोपियों ने आपसी मिलीभगत से इन भूखंडों के अवैध आवंटन से संबंधित कुछ सरकारी फाइलें भी गुम कर दी थी। इस मामले में निगम के दो सेवानिवृत्त अधिकारी मुख्य महाप्रबंधक (संपदा) एसपी सिंह और महाप्रबंधक (कार्मिक) जसविंदर सिंह रंधावा को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। आरोपी स्वतेज सिंह फरार था जिसकी विजिलेंस को तलाश थी।
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स्वतेज सिंह पर आरोप है कि उक्त दोषी ने जाली दस्तावेजों का उपयोग करके गुरतेज सिंह के नाम पर मैसर्स गुरतेज इंडस्ट्रीज नाम की फर्जी फर्म बनाई। इसके बाद उसने अपने पुत्र मनरूप सिंह और अन्य रिश्तेदारों के खातों में पैसे (पीएसआईईसी) को ट्रांसफर करके उक्त फर्म के नाम पर प्लॉट नंबर-ए-394 औद्योगिक फोकल पॉइंट अमृतसर में आवंटित कर दिया था।
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बता दें कि पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने 8 मार्च 2024 को पंजाब लघु उद्योग और निर्यात निगम (पीएसआईईसी) के छह अधिकारियों एसपी सिंह मुख्य महाप्रबंधक (सेवानिवृत्त), जसविंदर सिंह रंधावा महाप्रबंधक (सेवानिवृत्त), अमरजीत सिंह काहलों संपदा अधिकारी (सेवानिवृत्त), विजय गुप्ता वरिष्ठ सहायक (सेवानिवृत्त), दर्शन गर्ग सलाहकार (सेवानिवृत्त) और स्वतेज सिंह एसडीओ (सेवानिवृत्त) आदि के खिलाफ आईपीसी की धारा 09, 420, 465, 467, 468, 471, 120-बी तथा 13(1)ए सहित 13(2) के तहत फ्लाइंग स्क्वाड-1 पुलिस स्टेशन मोहाली में केस दर्ज किया था। इन आरोपियों पर आरोप था कि इन अधिकारियों/कर्मचारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए निगम के उक्त अधिकारियों की मिलीभगत से पीएसआईईसी मोहाली के औद्योगिक फोकल प्वाइंट में स्थित 14 भूखंड (प्लॉट संख्या ई-261, सी-210, डी-247, ई-260, सी-211, डी-250, ई-260ए, सी-209, ई-330, सी-177, डी-206, ई-250, 234 और सी-168) का कुल 8,72,71,666 रुपये का राजस्व माफ कर दिया, जिससे सरकार को करोड़ों रुपए का वित्तीय नुकसान हुआ। उन्होंने अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और रिश्तेदारों को गलत तरीके से महंगे औद्योगिक भूखंड आवंटित कर दिए थे। इस घोटाले को दबाने के लिए उक्त आरोपियों ने आपसी मिलीभगत से इन भूखंडों के अवैध आवंटन से संबंधित कुछ सरकारी फाइलें भी गुम कर दी थी। इस मामले में निगम के दो सेवानिवृत्त अधिकारी मुख्य महाप्रबंधक (संपदा) एसपी सिंह और महाप्रबंधक (कार्मिक) जसविंदर सिंह रंधावा को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। आरोपी स्वतेज सिंह फरार था जिसकी विजिलेंस को तलाश थी।
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