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संघर्षरत पीटीआई शिक्षक दलजीत सिंह की डेंगू से मौत
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मोहाली। जिले में पिछले 32 दिन से अपनी मांगों को लेकर एयरपोर्ट रोड पर संघर्ष पर बैठक बेरोजगार पीटीआई टीचर यूनियन के एक शिक्षक की डेंगू बुखार की चपेट में आ जाने से मौत हो गई। मृतक की पहचान दलजीत सिंह (32) निवासी मानसा के रूप में हुई है, जिसका पूरे रीति रिवाज के साथ परिजनों की ओर से अंतिम संस्कार कर दिया गया है। दूसरी ओर, बेरोजगार पीटीआई टीचर यूनियन ने दलजीत सिंह की मौत का जिम्मेदार पंजाब सरकार को ठहरा रही, जो पिछले 32 दिन से एयरपोर्ट रोड पर धरना लगा रहे हैं और सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के पास इतना समय नहीं कि उनकी एक बार बात सुन सकें।
जानकारी के मुताबिक, बीती 14 अक्तूबर को बेरोजगार पीटीआई टीचर यूनियन ने अपनी मांगों को लेकर गुरुद्वारा श्री सिंह शहीदां से खरड़ जाने वाली एयरपोर्ट रोड पर धरना लगाकर रोष प्रदर्शन शुरू किया। प्रदर्शनकारियों की सीएम चरणजीत सिंह चन्नी से यही मांग की थी कि 2011 में पीटीआई की भर्ती की गई थी, लेकिन सरकार ने इसमें लिखित परीक्षा की शर्त लगाकर उन्हें बेरोजगार कर दिया। इसके बाद पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई के बाद पंजाब सरकार की ओर से लगाई गई इस शर्त को खारिज करते हुए बेरोजगार पीटीआई टीचर की भर्तियों को मेरिट के आधार पर भरने के निर्देश दिए थे। लेकिन पंजाब की राज्य सरकार ने हर बार टाल मटोल का रवैया अपनाकर उन्हें बेरोजगार करने का काम किया है।
आज 11 साल बीत जाने के बाद भी बेरोजगार टीचर यूनियन के सदस्य पिछले 32 दिन से एयरपोर्ट रोड पर धरना लगाकर बैठे थे, जिनमें से यूनियन के एक सदस्य दलजीत सिंह की तबीयत अचानक खराब हो गई और दो दिन पहले उन्हें घर भेज दिया गया था। लेकिन शनिवार की रात करीब 1 बजे दलजीत ने अंतिम सांस ली।
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5-6 दिन पहले हुआ था बुखार
बेरोजगार पीटीआई टीचर यूनियन के प्रधान गुरलाभ सिंह ने बताया कि दलजीत सिंह उर्फ काका ने उनके संघर्ष में आगे रहकर भूमिका अदा की और बीते 5 से 6 दिन से उसकी तबीयत अचानक खराब हो गई। दलजीत को तेज बुखार हुआ, जिसके चलते टेस्ट करवाया तो डेंगू पॉजिटिव पाया गया। यूनियन ने फैसला लेकर दलजीत सिंह को घर भेज दिया, जिससे वह ठीक होकर वापस संघर्ष में लौट सकें। लेकिन दलजीत की तबीयत डेंगू बुखार के कारण ज्यादा खराब हो गई और शनिवार रात 1 बजे उसने अंतिम सांस ली। मृतक दलजीत सिंह अपने परिवार में पत्नी और 8 साल का बेटा छोड़ गया है, जिसकी मौत के लिए यूनियन सदस्यों ने पंजाब सरकार को जिम्मेदार ठहराया है और पंजाब सरकार को इसके लिए मृतक दलजीत सिंह की पत्नी को सरकारी नौकरी और 20 लाख रुपये देने की मांग की है। संवाद
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जानकारी के मुताबिक, बीती 14 अक्तूबर को बेरोजगार पीटीआई टीचर यूनियन ने अपनी मांगों को लेकर गुरुद्वारा श्री सिंह शहीदां से खरड़ जाने वाली एयरपोर्ट रोड पर धरना लगाकर रोष प्रदर्शन शुरू किया। प्रदर्शनकारियों की सीएम चरणजीत सिंह चन्नी से यही मांग की थी कि 2011 में पीटीआई की भर्ती की गई थी, लेकिन सरकार ने इसमें लिखित परीक्षा की शर्त लगाकर उन्हें बेरोजगार कर दिया। इसके बाद पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई के बाद पंजाब सरकार की ओर से लगाई गई इस शर्त को खारिज करते हुए बेरोजगार पीटीआई टीचर की भर्तियों को मेरिट के आधार पर भरने के निर्देश दिए थे। लेकिन पंजाब की राज्य सरकार ने हर बार टाल मटोल का रवैया अपनाकर उन्हें बेरोजगार करने का काम किया है।
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आज 11 साल बीत जाने के बाद भी बेरोजगार टीचर यूनियन के सदस्य पिछले 32 दिन से एयरपोर्ट रोड पर धरना लगाकर बैठे थे, जिनमें से यूनियन के एक सदस्य दलजीत सिंह की तबीयत अचानक खराब हो गई और दो दिन पहले उन्हें घर भेज दिया गया था। लेकिन शनिवार की रात करीब 1 बजे दलजीत ने अंतिम सांस ली।
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5-6 दिन पहले हुआ था बुखार
बेरोजगार पीटीआई टीचर यूनियन के प्रधान गुरलाभ सिंह ने बताया कि दलजीत सिंह उर्फ काका ने उनके संघर्ष में आगे रहकर भूमिका अदा की और बीते 5 से 6 दिन से उसकी तबीयत अचानक खराब हो गई। दलजीत को तेज बुखार हुआ, जिसके चलते टेस्ट करवाया तो डेंगू पॉजिटिव पाया गया। यूनियन ने फैसला लेकर दलजीत सिंह को घर भेज दिया, जिससे वह ठीक होकर वापस संघर्ष में लौट सकें। लेकिन दलजीत की तबीयत डेंगू बुखार के कारण ज्यादा खराब हो गई और शनिवार रात 1 बजे उसने अंतिम सांस ली। मृतक दलजीत सिंह अपने परिवार में पत्नी और 8 साल का बेटा छोड़ गया है, जिसकी मौत के लिए यूनियन सदस्यों ने पंजाब सरकार को जिम्मेदार ठहराया है और पंजाब सरकार को इसके लिए मृतक दलजीत सिंह की पत्नी को सरकारी नौकरी और 20 लाख रुपये देने की मांग की है। संवाद