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छह साल पहले पुडा ने प्रोजेक्ट का नाम रखा था गेटवे सिटी, हालत गांव से भी बदतर
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मोहाली। पंजाब अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (पुडा) की ओर से नेशनल हाईवे-5 (चंडीगढ़--खरड़ हाईवे) पर करीब 6 साल पहले गेटवे सिटी रिहायशी प्रोजेक्ट बसाया गया था। यहां के अलॉटियों ने लाखों रुपये खर्च कर अपने सपनों के मकान बनाए थे, लेकिन अभी तक भी अलॉटी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस इलाके की हालत पिछड़े हुए गांव से भी बदतर है। घरों तक पहुंचने के लिए सीधी सड़क तक नहीं बनी है। मार्केट की बात तो हवा में ही है। सफाई का भी बुरा हाल है। वहीं, इलाके के पास से बहने वाली पटियाला की राव नदी भी लोगों के लिए सिरदर्दी बनी हुई है। इसको लेकर बहुत से अलॉटी लंबे समय से संबंधित विभागों के साथ पत्राचार कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। मजबूरी में कुछ लोगों ने अपने प्लॉट सरेंडर कर दिए हैं या बेचकर चले गए हैं।
जानकारी के मुताबिक पुडा ने वर्ष-2015 में गेटवे सिटी प्रोजेक्ट शुरू किया था और यहां पर 417 रिहायशी प्लॉटों की स्कीम निकाली थी। सितंबर 2016 में अलॉटियों को अलाटमेंट पत्र जारी किए गए थे। साथ ही डेढ़ साल के अंदर यहां सभी मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाने का दावा किया गया था। लेकिन गमाडा यह चीज नहीं कर पाया। लोगों ने बताया कि करीब 40 से ज्यादा घर बनकर तैयार हो चुके हैं। लेकिन सीवरेज के कनेक्शन न होने से लोगों को दिक्कत उठानी पड़ रही है। क्योंकि गमाडा ने सीवरेज की लाइन बिछा दी है। अभी तक निकासी का प्रबंध नहीं किया गया है। क्योंकि पंचायत विभाग से जमीन के लेकर विवाद चल रहा था। इस वजह से इस काम में देरी हो रही थी। अब यहां के अलॉटियों का कहना है कि उन्हें पता नहीं है कि आखिर उनके इलाके में कब विकास कार्य होंगे। जबकि उन्होंने अपनी पूरी कमाई यहां प्लॉट खरीदकर मकान बनाने में लगा दी है। इसके अलावा ब्याज सहित बैंकों की किस्तें तक भर रहे हैं।
पटियाला की राव नदी बनी मुसीबत
गेटवे-सिटी के लोगों को पटियाला की राव नदी से काफी दिक्कत है। क्योंकि इसमें कई जगह पर अवैध कब्जे हैं और बहुत से कबाडी इस नदी की जमीन पर प्लास्टिक का सामान तारें वगैरह जलाकर तांबा निकालते हैं। इस वजह से जहां प्रदूषण फैलता होता है। वहीं दूसरी होर पटियाला की राव नदी का प्राकृतिक बहाव बदल रहा है, जिसमें पानी के रास्ते में रुकावट के कारण यह रिहायशी इलाके की तरफ बह रही है। कई बार पुडा और प्रदूषण विभाग को लिखा गया है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। मजबूरी में कई अलॉटी यहां पर घर तक नहीं बना रहे हैं। इसमें पुडा को चाहिए कि इसका चैनलाइनेशन किया जाए, और इस दिक्कत को दूर करे। - राम बजाज, अलॉटी गेटवे सिटी।
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सफाई का बुरा हाल, ट्रांसफार्मर दे रहे हादसों को न्योता
इलाके में रोड गलियों के ढक्कन गायब हैं। कई प्लाटों तक पहुंचने के लिए रास्ते तक नहीं हैं। दूसरा बलौंगी गांव के लोग भी गेटवे सिटी से गुजरते हैं। उन्होंने दीवार तोड़कर रास्ते बनाए हुए हैं। सफाई की उचित व्यवस्था न होने से यहां गंदगी के ढेर लगे हैं। यहां प्लान के मुताबिक कुछ नहीं किया गया है। बिजली के ट्रांसफार्मर टूट कर लटक रहे हैं। इस तरफ ध्यान देने की जरूरत है। - मनमोहन सिंह, अलॉटी गेटवे सिटी।
सुविधाएं नहीं मिलने से लोग सरेंडर कर रहे प्लॉट
गेटवे सिटी में बलौंगी गांव की कॉलोनी की ओर से निकलती पटियाला की राव नदी का गंदा पानी यहां पर सही निकासी न होने के कारण प्लॉटों में आकर जमा हो जाता है। कई प्लॉट धारक जिनके प्लाटों तक जाने के लिए रास्ता तक नहीं है और न ही विकास कार्य हुए हैं, ऐसे में वह प्लॉट सरेंडर करके या अन्य लोगों को बेच रहे हैं। - हरचरनजीत सिंह, अलॉटी गेटवे सिटी।
बस प्लॉट बेचे और कुछ नहीं किया
गेटवे सिटी के अलॉटियोें को पुडा ने प्लॉट पर कब्जा तो दे दिया लेकिन यहां पर विकास के नाम पर कुछ नहीं किया। जगह-जगह सड़कों के किनारे बड़ी घास उगी हुई है। गेटवे के लिए टीडीआई सिटी से सिर्फ एक ही एंट्री है। गेटवे सिटी के लिए, अगर टीडीआई सिटी ने अपना रास्ता बंद कर दिया तो गेटवे सिटी में रहने वाले लोग अपने घरों में ही बंद हो जाएंगे। - गुरजीत सिंह कंबोज, अलॉटी गेटवे सिटी।
पूरे किए जाएं ब्रॉशर में दिए लिखित वायदे
गेटवे सिटी बसाने की जब योजना निकाली थी, उस समय इस तरह का ब्रॉशर और विज्ञापन बनाया गया था कि जो भी इस प्रोजेक्ट के बारे में सुनता था, तो वह यहां पर बसाना चाहता था। लेकिन इस प्रोजेक्ट की असलियत तो एलओआई जारी होने के बाद लोगों के सामने आई। इस प्रोजेक्ट को लेकर जो वायदे किए थे, वह तुरंत पूरे किए जाने चाहिए। - श्रीराम सैनी, अलॉटी गेटवे सिटी।
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जानकारी के मुताबिक पुडा ने वर्ष-2015 में गेटवे सिटी प्रोजेक्ट शुरू किया था और यहां पर 417 रिहायशी प्लॉटों की स्कीम निकाली थी। सितंबर 2016 में अलॉटियों को अलाटमेंट पत्र जारी किए गए थे। साथ ही डेढ़ साल के अंदर यहां सभी मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाने का दावा किया गया था। लेकिन गमाडा यह चीज नहीं कर पाया। लोगों ने बताया कि करीब 40 से ज्यादा घर बनकर तैयार हो चुके हैं। लेकिन सीवरेज के कनेक्शन न होने से लोगों को दिक्कत उठानी पड़ रही है। क्योंकि गमाडा ने सीवरेज की लाइन बिछा दी है। अभी तक निकासी का प्रबंध नहीं किया गया है। क्योंकि पंचायत विभाग से जमीन के लेकर विवाद चल रहा था। इस वजह से इस काम में देरी हो रही थी। अब यहां के अलॉटियों का कहना है कि उन्हें पता नहीं है कि आखिर उनके इलाके में कब विकास कार्य होंगे। जबकि उन्होंने अपनी पूरी कमाई यहां प्लॉट खरीदकर मकान बनाने में लगा दी है। इसके अलावा ब्याज सहित बैंकों की किस्तें तक भर रहे हैं।
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पटियाला की राव नदी बनी मुसीबत
गेटवे-सिटी के लोगों को पटियाला की राव नदी से काफी दिक्कत है। क्योंकि इसमें कई जगह पर अवैध कब्जे हैं और बहुत से कबाडी इस नदी की जमीन पर प्लास्टिक का सामान तारें वगैरह जलाकर तांबा निकालते हैं। इस वजह से जहां प्रदूषण फैलता होता है। वहीं दूसरी होर पटियाला की राव नदी का प्राकृतिक बहाव बदल रहा है, जिसमें पानी के रास्ते में रुकावट के कारण यह रिहायशी इलाके की तरफ बह रही है। कई बार पुडा और प्रदूषण विभाग को लिखा गया है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। मजबूरी में कई अलॉटी यहां पर घर तक नहीं बना रहे हैं। इसमें पुडा को चाहिए कि इसका चैनलाइनेशन किया जाए, और इस दिक्कत को दूर करे। - राम बजाज, अलॉटी गेटवे सिटी।
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सफाई का बुरा हाल, ट्रांसफार्मर दे रहे हादसों को न्योता
इलाके में रोड गलियों के ढक्कन गायब हैं। कई प्लाटों तक पहुंचने के लिए रास्ते तक नहीं हैं। दूसरा बलौंगी गांव के लोग भी गेटवे सिटी से गुजरते हैं। उन्होंने दीवार तोड़कर रास्ते बनाए हुए हैं। सफाई की उचित व्यवस्था न होने से यहां गंदगी के ढेर लगे हैं। यहां प्लान के मुताबिक कुछ नहीं किया गया है। बिजली के ट्रांसफार्मर टूट कर लटक रहे हैं। इस तरफ ध्यान देने की जरूरत है। - मनमोहन सिंह, अलॉटी गेटवे सिटी।
सुविधाएं नहीं मिलने से लोग सरेंडर कर रहे प्लॉट
गेटवे सिटी में बलौंगी गांव की कॉलोनी की ओर से निकलती पटियाला की राव नदी का गंदा पानी यहां पर सही निकासी न होने के कारण प्लॉटों में आकर जमा हो जाता है। कई प्लॉट धारक जिनके प्लाटों तक जाने के लिए रास्ता तक नहीं है और न ही विकास कार्य हुए हैं, ऐसे में वह प्लॉट सरेंडर करके या अन्य लोगों को बेच रहे हैं। - हरचरनजीत सिंह, अलॉटी गेटवे सिटी।
बस प्लॉट बेचे और कुछ नहीं किया
गेटवे सिटी के अलॉटियोें को पुडा ने प्लॉट पर कब्जा तो दे दिया लेकिन यहां पर विकास के नाम पर कुछ नहीं किया। जगह-जगह सड़कों के किनारे बड़ी घास उगी हुई है। गेटवे के लिए टीडीआई सिटी से सिर्फ एक ही एंट्री है। गेटवे सिटी के लिए, अगर टीडीआई सिटी ने अपना रास्ता बंद कर दिया तो गेटवे सिटी में रहने वाले लोग अपने घरों में ही बंद हो जाएंगे। - गुरजीत सिंह कंबोज, अलॉटी गेटवे सिटी।
पूरे किए जाएं ब्रॉशर में दिए लिखित वायदे
गेटवे सिटी बसाने की जब योजना निकाली थी, उस समय इस तरह का ब्रॉशर और विज्ञापन बनाया गया था कि जो भी इस प्रोजेक्ट के बारे में सुनता था, तो वह यहां पर बसाना चाहता था। लेकिन इस प्रोजेक्ट की असलियत तो एलओआई जारी होने के बाद लोगों के सामने आई। इस प्रोजेक्ट को लेकर जो वायदे किए थे, वह तुरंत पूरे किए जाने चाहिए। - श्रीराम सैनी, अलॉटी गेटवे सिटी।