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मोहाली की सड़कें और पार्क पढ़ाते हैं देश पर मिटने का पाठ
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वाईपीएस चौक का ले बिक्रमजीत सिंह के नाम पर रखा गया है नाम।
- फोटो : MOHALI
मोहाली। वीआईपी शहर केवल बड़ी इमारतों, क्रिकेट स्टेडियम या आईटी कंपनियों से अपनी पहचान नहीं रखता है, बल्कि देश की एकता और अखंडता को कायम रखने भी अग्रणी है। यहां की सड़कें और पार्क जहां लोगों को देशभक्ति का पाठ पढ़ाते हैं, वहीं, नामी संस्थान से सेना के तीनों अंगों को होनहार अफसर मिलते हैं। इतना ही नहीं देश के कई सैन्य अधिकारी भी इलाके की शान हैं। सभी का यही मानना है जब भी हमारी जरूरत अपने देश को होगी, वह अपना सबकुछ समर्पित करने के लिए तैयार रहेंगे।
इलाके के युवाओं के अंदर देशप्रेम की भावना पैदा करने व अपने शहीदों को सम्मान दिलाने के लिए इलाके के अधिकतर पार्क व चौराहों को शहीदों के नाम पर रखा गया है। चंडीगढ़ की तरफ से आते ही जिसे पहले वीपीएसईए चौक कहते थे, अब उसे शहीद लेफ्टिनेंट कर्नल बिक्रमजीत सिंह शौर्य चक्र चौक कहा जाता है। इस संबंधी नामकरण पटिकाएं लगाई गई हैं। इसके अलावा तिरंगे के आकार की कलाकृति बनाई गई है। फेज-6 वेरका चौक के पास दारा स्टूडियो था, अब वहां उनकी एक प्रतिमा स्थापित की गई। उन्होंने कई कुश्ती मुकाबले जीते थे। इसी तरह फेज-3बी1 रोज गार्डन का नाम शहीद जतिंदर पाल सिंह गार्डन व बोगनविलिया का नाम स्कवॉर्डन लीडर अनिल शर्मा पार्क शामिल है। इसी तरह फेज-6 के सरकारी कॉलेज का नाम मेजर हरमिंदर पाल सिंह कॉलेज व कुछ स्कूलों के नाम शहीदों के नाम पर है। इसके अलावा कारगिल पार्क भी यहां की शान है।
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दस साल में सेना को दिए 162 अफसर
साल 2010 तक सेना में मात्र दो फीसदी पंजाबी अधिकारी बचे। उस समय राज्य सरकार ने महाराजा रणजीत सिंह आर्म्ड फोर्स संस्थान खोलने का फैसला लिया था। 11 साल के अद्भुत सफर में देश को 162 जांबाज सैन्य अधिकारी दिए हैं। इनमें से 69 अधिकारी देश की सेनाओं में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। शेष की सेना की अकादमियों में ट्रेनिंग चल रही है। जल्द ही ये भी सेना का हिस्सा होंगे।
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पहले सरहद संभाली, अब पूर्व फौजियों को दिला रहे हैं हक
77 वर्षीय रिटायर्ड कर्नल एसएस सोही ने अपना पूूरा जीवन देश की रक्षा में बिताया है। अब रिटायरमेंट के बाद पूर्व फौजियों व उनके परिवारों को इंसाफ दिलाने में लगे हुए हैं। कर्नल सोही बताते हैं कि उन्होंने एक्स सर्विसमैन ग्रीवासेंस सेल के नाम संस्था बनाई है। अब तक चार हजार फौजियों को इंसाफ दिलाया है। साढ़े चार सौ को तो पेंशन दिलवा चुके हैं। कोरोना काल में उन्होंने देशभर के पूर्व फौजियों की इलाज में दिक्कत न आएं, इसके लिए सरकार से तालमेल कर सुविधाएं दिलाईं।
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इलाके के युवाओं के अंदर देशप्रेम की भावना पैदा करने व अपने शहीदों को सम्मान दिलाने के लिए इलाके के अधिकतर पार्क व चौराहों को शहीदों के नाम पर रखा गया है। चंडीगढ़ की तरफ से आते ही जिसे पहले वीपीएसईए चौक कहते थे, अब उसे शहीद लेफ्टिनेंट कर्नल बिक्रमजीत सिंह शौर्य चक्र चौक कहा जाता है। इस संबंधी नामकरण पटिकाएं लगाई गई हैं। इसके अलावा तिरंगे के आकार की कलाकृति बनाई गई है। फेज-6 वेरका चौक के पास दारा स्टूडियो था, अब वहां उनकी एक प्रतिमा स्थापित की गई। उन्होंने कई कुश्ती मुकाबले जीते थे। इसी तरह फेज-3बी1 रोज गार्डन का नाम शहीद जतिंदर पाल सिंह गार्डन व बोगनविलिया का नाम स्कवॉर्डन लीडर अनिल शर्मा पार्क शामिल है। इसी तरह फेज-6 के सरकारी कॉलेज का नाम मेजर हरमिंदर पाल सिंह कॉलेज व कुछ स्कूलों के नाम शहीदों के नाम पर है। इसके अलावा कारगिल पार्क भी यहां की शान है।
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दस साल में सेना को दिए 162 अफसर
साल 2010 तक सेना में मात्र दो फीसदी पंजाबी अधिकारी बचे। उस समय राज्य सरकार ने महाराजा रणजीत सिंह आर्म्ड फोर्स संस्थान खोलने का फैसला लिया था। 11 साल के अद्भुत सफर में देश को 162 जांबाज सैन्य अधिकारी दिए हैं। इनमें से 69 अधिकारी देश की सेनाओं में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। शेष की सेना की अकादमियों में ट्रेनिंग चल रही है। जल्द ही ये भी सेना का हिस्सा होंगे।
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पहले सरहद संभाली, अब पूर्व फौजियों को दिला रहे हैं हक
77 वर्षीय रिटायर्ड कर्नल एसएस सोही ने अपना पूूरा जीवन देश की रक्षा में बिताया है। अब रिटायरमेंट के बाद पूर्व फौजियों व उनके परिवारों को इंसाफ दिलाने में लगे हुए हैं। कर्नल सोही बताते हैं कि उन्होंने एक्स सर्विसमैन ग्रीवासेंस सेल के नाम संस्था बनाई है। अब तक चार हजार फौजियों को इंसाफ दिलाया है। साढ़े चार सौ को तो पेंशन दिलवा चुके हैं। कोरोना काल में उन्होंने देशभर के पूर्व फौजियों की इलाज में दिक्कत न आएं, इसके लिए सरकार से तालमेल कर सुविधाएं दिलाईं।