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Mohali News: एसएफजे फंडिंग मामले में रिंकू की जमानत याचिका खारिज, अदालत ने आरोपों को गंभीर बताया
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मोहाली। प्रतिबंधित संगठन सिख्स फॉर जस्टिस (एसएफजे) से जुड़े फंडिंग मामले में आरोपी सुखदेव सिंह उर्फ रिंकू की जमानत याचिका खारिज हो गई है। जिला एवं सत्र न्यायालय ने आरोपों को प्रथम दृष्टया गंभीर माना है। अदालत ने कहा कि जमानत देने से मामले की जांच और साक्ष्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अदालत ने सरकारी और बचाव पक्ष की दलीलें सुनीं। मामले में दर्ज एफआईआर गुप्त सूचना के आधार पर दर्ज की गई थी।
इसमें सुखदेव सिंह उर्फ रिंकू को विशेष रूप से नामजद किया गया था। जांच के दौरान सह-आरोपियों के कब्जे से रेफरेंडम-2020 से संबंधित पोस्टर और आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई थी। अभियोजन के अनुसार, यह सामग्री राज्य में शांति भंग करने और अलगाववादी प्रचार के उद्देश्य से इस्तेमाल होनी थी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सह-आरोपी गुरविंदर सिंह को विदेश में बैठे राष्ट्रविरोधी तत्वों से कथित रूप से फंडिंग मिल रही थी। आरोपी रेफरेंडम-2020 के प्रचार अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। ऐसे में आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जमानत देना उचित नहीं होगा। अदालत ने यह भी कहा कि मामले में अभी गवाहों के बयान होने बाकी हैं। यदि आरोपी को इस चरण पर रिहा किया जाता है, तो उसके द्वारा साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका है। गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका से भी इन्कार नहीं किया जा सकता। अदालत ने उल्लेख किया कि आरोपी की पूर्व में दायर जमानत याचिकाएं भी खारिज हो चुकी हैं। इसलिए वर्तमान याचिका में कोई नया आधार नहीं पाया गया।
मामले की पृष्ठभूमि
एसएसओसी के सब-इंस्पेक्टर मनप्रीत सिंह को गुप्त सूचना मिली थी। गुरविंदर सिंह, जगविंदर सिंह, सुखदेव सिंह और जगजीत सिंह मांगट विभिन्न क्षेत्रों में पोस्टर लगा रहे थे। ये पोस्टर ''पंजाब रेफरेंडम-2020'' लिखे हुए थे। आरोप है कि गुरपतवंत सिंह पन्नू और अन्य विदेश से इन गतिविधियों के लिए कथित रूप से फंडिंग कर रहे थे। जांच के दौरान पुलिस ने गुरविंदर सिंह, सुखदेव सिंह और जगविंदर सिंह को गिरफ्तार किया था।
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इसमें सुखदेव सिंह उर्फ रिंकू को विशेष रूप से नामजद किया गया था। जांच के दौरान सह-आरोपियों के कब्जे से रेफरेंडम-2020 से संबंधित पोस्टर और आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई थी। अभियोजन के अनुसार, यह सामग्री राज्य में शांति भंग करने और अलगाववादी प्रचार के उद्देश्य से इस्तेमाल होनी थी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सह-आरोपी गुरविंदर सिंह को विदेश में बैठे राष्ट्रविरोधी तत्वों से कथित रूप से फंडिंग मिल रही थी। आरोपी रेफरेंडम-2020 के प्रचार अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। ऐसे में आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जमानत देना उचित नहीं होगा। अदालत ने यह भी कहा कि मामले में अभी गवाहों के बयान होने बाकी हैं। यदि आरोपी को इस चरण पर रिहा किया जाता है, तो उसके द्वारा साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका है। गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका से भी इन्कार नहीं किया जा सकता। अदालत ने उल्लेख किया कि आरोपी की पूर्व में दायर जमानत याचिकाएं भी खारिज हो चुकी हैं। इसलिए वर्तमान याचिका में कोई नया आधार नहीं पाया गया।
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मामले की पृष्ठभूमि
एसएसओसी के सब-इंस्पेक्टर मनप्रीत सिंह को गुप्त सूचना मिली थी। गुरविंदर सिंह, जगविंदर सिंह, सुखदेव सिंह और जगजीत सिंह मांगट विभिन्न क्षेत्रों में पोस्टर लगा रहे थे। ये पोस्टर ''पंजाब रेफरेंडम-2020'' लिखे हुए थे। आरोप है कि गुरपतवंत सिंह पन्नू और अन्य विदेश से इन गतिविधियों के लिए कथित रूप से फंडिंग कर रहे थे। जांच के दौरान पुलिस ने गुरविंदर सिंह, सुखदेव सिंह और जगविंदर सिंह को गिरफ्तार किया था।
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