{"_id":"614b9b3a8ebc3efacc74e592","slug":"retired-asi-convicted-in-29-year-old-case-punishment-will-be-done-today-mohali-news-pkl427695925","type":"story","status":"publish","title_hn":"29 साल पुराने मामले में सेवानिवृत्त एएसआई दोषी करार, सजा होगी आज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
29 साल पुराने मामले में सेवानिवृत्त एएसआई दोषी करार, सजा होगी आज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मोहाली। 29 साल पुराने अपहरण और अवैध रूप से कस्टडी में रखने के आरोप में सीबीआई की विशेष अदालत ने पंजाब पुलिस के एक रिटायर असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर (एएसआई) अमरीक सिंह को दोषी ठहराया है। अदालत ने वीरवार को उसे दोषी करार देकर जेल भेज दिया है। जबकि इस मामले के एक अन्य आरोपी वासन सिंह की पहले ही मौत हो चुकी है।
जानकारी के मुुुताबिक यह मामला 21 जुलाई, 1991 का है। उस समय वासन सिंह थाना ब्यास के इंचार्ज थे। आरोप है कि 21/22 जुलाई 1992 की रात को एएसआई अमरीक सिंह ने जालंधर का दौरा किया और चनण सिंह और उसके बेटे गुरबिंदर सिंह को जबरन उठा लिया। हालांकि बाद में चनण सिंह को छोड़ दिया, लेकिन बेटे को नहीं छोड़ा था। अगले दिन चनण सिंह थाने गया और बेटे के बारे में पूछा तो जवाब मिला कि वह पुलिस मुकाबले में मारा गया है। उसकी अस्थियां श्मशान घाट में पड़ी हैं। इसके बाद चन्नण सिंह श्मशानघाट पहुंचा और वहां से अस्थियां उठाई। इसके बाद वह इस मामले में पुलिस के सीनियर अधिकारियों से मिला। साथ ही इंसाफ की गुहार लगाई, लेकिन पुलिस ने उसकी कोई सुनवाई नहीं की। उसकी दलील थी कि यह फर्जी पुलिस मुकाबला है। साथ ही उसके बेटे को गलत तरीके से मौत के घाट उतारा गया ह्रै।
इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई की और साथ ही इस मामले की जांच का जिम्मेदारी सीबीआई को सौंपी गई। इसके बाद सीबीआई ने मामले की जांच की। साथ ही प्रत्येक व्यक्ति से मुलाकात की। इस दौरान जब आरोप तय किए तो अदालत ने एसआई वासन सिंह (अब मृत) पर आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और 34 (कई लोगों द्वारा सामान्य इरादे से किए गए कार्य) के तहत आरोप लगाए थे। जबकि दूसरे पर अपहरण और अवैध कस्टडी पर रखने का मामला दर्ज किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
जानकारी के मुुुताबिक यह मामला 21 जुलाई, 1991 का है। उस समय वासन सिंह थाना ब्यास के इंचार्ज थे। आरोप है कि 21/22 जुलाई 1992 की रात को एएसआई अमरीक सिंह ने जालंधर का दौरा किया और चनण सिंह और उसके बेटे गुरबिंदर सिंह को जबरन उठा लिया। हालांकि बाद में चनण सिंह को छोड़ दिया, लेकिन बेटे को नहीं छोड़ा था। अगले दिन चनण सिंह थाने गया और बेटे के बारे में पूछा तो जवाब मिला कि वह पुलिस मुकाबले में मारा गया है। उसकी अस्थियां श्मशान घाट में पड़ी हैं। इसके बाद चन्नण सिंह श्मशानघाट पहुंचा और वहां से अस्थियां उठाई। इसके बाद वह इस मामले में पुलिस के सीनियर अधिकारियों से मिला। साथ ही इंसाफ की गुहार लगाई, लेकिन पुलिस ने उसकी कोई सुनवाई नहीं की। उसकी दलील थी कि यह फर्जी पुलिस मुकाबला है। साथ ही उसके बेटे को गलत तरीके से मौत के घाट उतारा गया ह्रै।
विज्ञापन
इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई की और साथ ही इस मामले की जांच का जिम्मेदारी सीबीआई को सौंपी गई। इसके बाद सीबीआई ने मामले की जांच की। साथ ही प्रत्येक व्यक्ति से मुलाकात की। इस दौरान जब आरोप तय किए तो अदालत ने एसआई वासन सिंह (अब मृत) पर आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और 34 (कई लोगों द्वारा सामान्य इरादे से किए गए कार्य) के तहत आरोप लगाए थे। जबकि दूसरे पर अपहरण और अवैध कस्टडी पर रखने का मामला दर्ज किया था।
विज्ञापन