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Mohali News: छह साल से प्लॉट ट्रांसफर के लिए भटक रहे मोहाली निवासी को राहत, इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट पर एक लाख हर्जाना
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उपभोक्ता आयोग ने 30 दिन में 400 वर्ग गज का प्लॉट ट्रांसफर करने और नो ड्यूज सर्टिफिकेट जारी करने के दिए आदेश
मोहाली। लुधियाना इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट की ओर से प्लॉट ट्रांसफर नहीं करने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, मोहाली ने शिकायतकर्ता को राहत दी है। आयोग ने ट्रस्ट को 30 दिन के भीतर 400 वर्ग गज का प्लॉट शिकायतकर्ता के नाम ट्रांसफर करने और नो ड्यूज सर्टिफिकेट जारी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मानसिक परेशानी और मुकदमेबाजी के खर्च के लिए एक लाख रुपये अदा करने का आदेश दिया है। खास बात यह है कि स्थानीय निकाय विभाग के विशेष सचिव ने नौ मार्च 2017 को भी प्लॉट ट्रांसफर करने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।
वर्ष 2000 में खरीदा था प्लॉट
मोहाली के सेक्टर-117 निवासी गुरमुख सिंह ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्होंने लुधियाना की शहीद भगत सिंह नगर की 475 एकड़ विकास योजना के तहत प्लॉट नंबर 428-एफ, जिसका क्षेत्रफल 400 वर्ग गज है, जसबीर सिंह चहल से 20 सितंबर 2000 को खरीदा था। प्लॉट का मूल आवंटन 18 जुलाई 1990 को हुआ था और इसकी रजिस्ट्री 20 दिसंबर 1999 को कराई गई थी। खरीद के बाद उन्होंने प्लॉट अपने नाम ट्रांसफर करवाने के लिए ट्रस्ट में आवेदन किया, लेकिन वर्षों तक कार्रवाई नहीं हुई।
17.43 लाख रुपये जमा कराने के बाद भी नहीं हुआ ट्रांसफर
शिकायतकर्ता के अनुसार, ट्रस्ट ने 17 मई 1999 के पत्र के माध्यम से प्लॉट पर निर्माण नहीं करने का जुर्माना माफ कर दिया था। इसके बावजूद प्लॉट ट्रांसफर नहीं किया गया। वर्ष 2017 में स्थानीय निकाय विभाग के विशेष सचिव ने भी ट्रस्ट को प्लॉट ट्रांसफर कर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए थे।
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शिकायतकर्ता ने बताया कि बकाया राशि की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने नौ अक्तूबर 2025 को 17,43,710 रुपये जमा करा दिए। इसके बाद भी प्लॉट उनके नाम नहीं किया गया। वहीं, ट्रस्ट ने आयोग में दलील दी कि गैर-निर्माण जुर्माने के 71,50,159 रुपये और अतिरिक्त कीमत के 1,07,380 रुपये अभी बकाया हैं।
आयोग ने माना, सेवाओं में रही कमी
आयोग के अध्यक्ष एसके अग्रवाल और सदस्य परमजीत कौर की पीठ ने ट्रस्ट की ओर से शिकायत की समय-सीमा को लेकर उठाई गई आपत्ति खारिज कर दी। आयोग ने माना कि प्लॉट ट्रांसफर नहीं होने से शिकायतकर्ता को लगातार परेशानी झेलनी पड़ी। सरकारी स्तर पर निर्देश जारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं करना भी आयोग के संज्ञान में आया।
आयोग ने आदेश की मुफ्त प्रमाणित प्रति मिलने के 30 दिन के भीतर प्लॉट शिकायतकर्ता के नाम ट्रांसफर करने और नो ड्यूज सर्टिफिकेट जारी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही एक लाख रुपये मुआवजे और मुकदमेबाजी के खर्च के रूप में देने का आदेश दिया है। आयोग ने शिकायत को आंशिक रूप से मंजूर किया है।
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मोहाली। लुधियाना इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट की ओर से प्लॉट ट्रांसफर नहीं करने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, मोहाली ने शिकायतकर्ता को राहत दी है। आयोग ने ट्रस्ट को 30 दिन के भीतर 400 वर्ग गज का प्लॉट शिकायतकर्ता के नाम ट्रांसफर करने और नो ड्यूज सर्टिफिकेट जारी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मानसिक परेशानी और मुकदमेबाजी के खर्च के लिए एक लाख रुपये अदा करने का आदेश दिया है। खास बात यह है कि स्थानीय निकाय विभाग के विशेष सचिव ने नौ मार्च 2017 को भी प्लॉट ट्रांसफर करने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।
वर्ष 2000 में खरीदा था प्लॉट
मोहाली के सेक्टर-117 निवासी गुरमुख सिंह ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्होंने लुधियाना की शहीद भगत सिंह नगर की 475 एकड़ विकास योजना के तहत प्लॉट नंबर 428-एफ, जिसका क्षेत्रफल 400 वर्ग गज है, जसबीर सिंह चहल से 20 सितंबर 2000 को खरीदा था। प्लॉट का मूल आवंटन 18 जुलाई 1990 को हुआ था और इसकी रजिस्ट्री 20 दिसंबर 1999 को कराई गई थी। खरीद के बाद उन्होंने प्लॉट अपने नाम ट्रांसफर करवाने के लिए ट्रस्ट में आवेदन किया, लेकिन वर्षों तक कार्रवाई नहीं हुई।
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17.43 लाख रुपये जमा कराने के बाद भी नहीं हुआ ट्रांसफर
शिकायतकर्ता के अनुसार, ट्रस्ट ने 17 मई 1999 के पत्र के माध्यम से प्लॉट पर निर्माण नहीं करने का जुर्माना माफ कर दिया था। इसके बावजूद प्लॉट ट्रांसफर नहीं किया गया। वर्ष 2017 में स्थानीय निकाय विभाग के विशेष सचिव ने भी ट्रस्ट को प्लॉट ट्रांसफर कर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए थे।
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शिकायतकर्ता ने बताया कि बकाया राशि की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने नौ अक्तूबर 2025 को 17,43,710 रुपये जमा करा दिए। इसके बाद भी प्लॉट उनके नाम नहीं किया गया। वहीं, ट्रस्ट ने आयोग में दलील दी कि गैर-निर्माण जुर्माने के 71,50,159 रुपये और अतिरिक्त कीमत के 1,07,380 रुपये अभी बकाया हैं।
आयोग ने माना, सेवाओं में रही कमी
आयोग के अध्यक्ष एसके अग्रवाल और सदस्य परमजीत कौर की पीठ ने ट्रस्ट की ओर से शिकायत की समय-सीमा को लेकर उठाई गई आपत्ति खारिज कर दी। आयोग ने माना कि प्लॉट ट्रांसफर नहीं होने से शिकायतकर्ता को लगातार परेशानी झेलनी पड़ी। सरकारी स्तर पर निर्देश जारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं करना भी आयोग के संज्ञान में आया।
आयोग ने आदेश की मुफ्त प्रमाणित प्रति मिलने के 30 दिन के भीतर प्लॉट शिकायतकर्ता के नाम ट्रांसफर करने और नो ड्यूज सर्टिफिकेट जारी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही एक लाख रुपये मुआवजे और मुकदमेबाजी के खर्च के रूप में देने का आदेश दिया है। आयोग ने शिकायत को आंशिक रूप से मंजूर किया है।