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Mohali News: रामलीला में मंचित हुए रावण अहंकार, श्रवण वध, श्रीराम जन्म
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सेक्टर-70 के श्री सत्यनारायण मंदिर के मैदान में रविवार को किया गया रामलीला का मंचन
संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। सेक्टर-70 के श्री सत्यनारायण मंदिर के मैदान में रविवार को रामलीला का मंचन किया गया। इसमें रावण की तपस्या से लेकर भगवान श्रीराम के जन्म तक की लीलाएं प्रस्तुत की गईं। कलाकारों ने रामायण की प्रमुख घटनाओं को दर्शकों के सामने जीवंत किया। रामलीला में रावण, कुंभकर्ण और विभीषण की कठोर तपस्या दिखाई गई। उन्होंने भगवान शिव को प्रसन्न किया, जिससे रावण को चंद्रहास तलवार मिली। इसके बाद रावण के बढ़ते अहंकार और शक्ति का दुरुपयोग दर्शाया गया। रावण द्वारा काल को बंदी बनाने का प्रसंग भी मंचित हुआ। इन दृश्यों ने शक्ति के दुरुपयोग और अहंकार के पतन का संदेश दिया। पृथ्वी पर बढ़ते अत्याचारों से परेशान धरती की करुण पुकार का मंचन किया गया। देवताओं ने अधर्म के प्रभाव पर चिंता जताई, जिससे धर्म की स्थापना की आवश्यकता सामने आई। रामलीला में श्रवण कुमार के वध का मार्मिक दृश्य भी प्रस्तुत किया गया। यह घटना राजा दशरथ से अनजाने में हुई थी। इसके बाद अयोध्या में भगवान श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के जन्म की लीला का मंचन हुआ। चारों भाइयों के जन्म से अयोध्या में खुशियों का माहौल दिखाया गया। रामलीला के माध्यम से धर्म, मर्यादा और कर्तव्य के मार्ग पर चलने का संदेश दिया गया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। सेक्टर-70 के श्री सत्यनारायण मंदिर के मैदान में रविवार को रामलीला का मंचन किया गया। इसमें रावण की तपस्या से लेकर भगवान श्रीराम के जन्म तक की लीलाएं प्रस्तुत की गईं। कलाकारों ने रामायण की प्रमुख घटनाओं को दर्शकों के सामने जीवंत किया। रामलीला में रावण, कुंभकर्ण और विभीषण की कठोर तपस्या दिखाई गई। उन्होंने भगवान शिव को प्रसन्न किया, जिससे रावण को चंद्रहास तलवार मिली। इसके बाद रावण के बढ़ते अहंकार और शक्ति का दुरुपयोग दर्शाया गया। रावण द्वारा काल को बंदी बनाने का प्रसंग भी मंचित हुआ। इन दृश्यों ने शक्ति के दुरुपयोग और अहंकार के पतन का संदेश दिया। पृथ्वी पर बढ़ते अत्याचारों से परेशान धरती की करुण पुकार का मंचन किया गया। देवताओं ने अधर्म के प्रभाव पर चिंता जताई, जिससे धर्म की स्थापना की आवश्यकता सामने आई। रामलीला में श्रवण कुमार के वध का मार्मिक दृश्य भी प्रस्तुत किया गया। यह घटना राजा दशरथ से अनजाने में हुई थी। इसके बाद अयोध्या में भगवान श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के जन्म की लीला का मंचन हुआ। चारों भाइयों के जन्म से अयोध्या में खुशियों का माहौल दिखाया गया। रामलीला के माध्यम से धर्म, मर्यादा और कर्तव्य के मार्ग पर चलने का संदेश दिया गया।