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अब कोरोना से लड़ने को ली जाएगी पल्स ऑक्सीमीटर की मदद
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मोहाली। जिले में बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के मामलोें को देखते हुए सेहत विभाग ने पल्स ऑक्सीमीटर खरीदे हैं। जिसे शुरूआत में जिले के सभी सरकारी अस्पतालों, डिस्पेंसिरियों में मुहैया कवराया जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इसे आशा वर्करों और होम क्वारंटीन में रहने वाले लोगों को भी दिया जा सकता है।
पहले चरण में जिला सेहत विभाग ने डेढ़ सौ पल्स आक्सीमीटर खरीदे हैं।डेराबस्सी की मौजूदा एसएमओ संगीता जैन ने बताया कि इस समय अस्पताल में 10 से 12 पल्स ऑक्सीमीटर से काम लिया जा रहा है। पल्स ऑक्सीमीटरों को कोरोना फ्लू कॉर्नर में ज्यादा और इमरजेंसी वार्ड में भी इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने बताया कि इन ऑक्सीमीटर को इस्तेमाल करने से हमें कोरोना का इलाज करने में बहुत फायदा है, जिसमें अगर किसी मरीज के ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है। डॉक्टर को ऑक्सीजन के स्तर का पता नहीं चलता है तो ऐसे में प्लस ऑक्सीमीटर एक मिनट में ही मरीज में ऑक्सीजन की मात्रा का पता लगा देता है। डेराबस्सी में इस समय सभी डॉक्टर्स को पल्स ऑक्सीमीटर दिए गए हैं।
बता दें कि कई राज्यों में कुछ समय में ही कोरोना के ऐसे मरीज सामने आए हैं, जिनमें कोरोना की पहचान के लिए किसी तरह के लक्षण नहीं थे। कई रोगी ऐसे भी थे, जिनमें शारीरिक तौर पर ऑक्सीजन का स्तर कम हुआ और उनकी मौत हो गई।
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ऐसे काम करता है पल्स ऑक्सीमीटर
इस डिवाइस में मरीज की उंगली रखने के बाद इसमें रीडिंग आएगी। यह बिना दर्द वाला टेस्ट है। डिवाइस मरीज के खून में ऑक्सीजन के लेवल को जांचेंगी। इतना ही नहीं, यह डिवाइस शरीर में होने वाले छोटे से छोटे उतार-चढ़ाव का भी पता लगा सकेगी। इससे पता लग सकेगा कि मरीज का दिल ठीक से काम कर रहा है या नहीं। क्योंकि दिल की पंपिंग के जरिये ही पूरे शरीर में ऑक्सीजन का फ्लो होता है।
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पहले चरण में जिला सेहत विभाग ने डेढ़ सौ पल्स आक्सीमीटर खरीदे हैं।डेराबस्सी की मौजूदा एसएमओ संगीता जैन ने बताया कि इस समय अस्पताल में 10 से 12 पल्स ऑक्सीमीटर से काम लिया जा रहा है। पल्स ऑक्सीमीटरों को कोरोना फ्लू कॉर्नर में ज्यादा और इमरजेंसी वार्ड में भी इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने बताया कि इन ऑक्सीमीटर को इस्तेमाल करने से हमें कोरोना का इलाज करने में बहुत फायदा है, जिसमें अगर किसी मरीज के ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है। डॉक्टर को ऑक्सीजन के स्तर का पता नहीं चलता है तो ऐसे में प्लस ऑक्सीमीटर एक मिनट में ही मरीज में ऑक्सीजन की मात्रा का पता लगा देता है। डेराबस्सी में इस समय सभी डॉक्टर्स को पल्स ऑक्सीमीटर दिए गए हैं।
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बता दें कि कई राज्यों में कुछ समय में ही कोरोना के ऐसे मरीज सामने आए हैं, जिनमें कोरोना की पहचान के लिए किसी तरह के लक्षण नहीं थे। कई रोगी ऐसे भी थे, जिनमें शारीरिक तौर पर ऑक्सीजन का स्तर कम हुआ और उनकी मौत हो गई।
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ऐसे काम करता है पल्स ऑक्सीमीटर
इस डिवाइस में मरीज की उंगली रखने के बाद इसमें रीडिंग आएगी। यह बिना दर्द वाला टेस्ट है। डिवाइस मरीज के खून में ऑक्सीजन के लेवल को जांचेंगी। इतना ही नहीं, यह डिवाइस शरीर में होने वाले छोटे से छोटे उतार-चढ़ाव का भी पता लगा सकेगी। इससे पता लग सकेगा कि मरीज का दिल ठीक से काम कर रहा है या नहीं। क्योंकि दिल की पंपिंग के जरिये ही पूरे शरीर में ऑक्सीजन का फ्लो होता है।