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हरियाणा वन विभाग में प्रमोशन घोटाला: नियमों की धज्जियां उड़ा चहेतों को बनाया अफसर, जांच कमेटी गठित

Mon, 22 Jun 2026 02:12 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 22 Jun 2026 02:12 AM IST
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Promotion scam in Haryana Forest Department: Rules flouted to appoint favorites as officers; inquiry committee constituted.
पंचकूला। हरियाणा वन विभाग में पदोन्नति (प्रमोशन) के नाम पर एक बड़े और बेहद गंभीर फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। विभाग के कुछ आला अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने नियमों को पूरी तरह ताक पर रखकर अपने चहेतों को अनुचित लाभ पहुंचाया है। वन मंत्री कार्यालय में पहुंची शिकायत के बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग गए हैं और पूरे महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
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सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी जी रमन ने वन मंत्री को दी गई अपनी शिकायत में इस पूरे घोटाले की परतें खोली हैं। आरोप है कि वरिष्ठ अधिकारियों ने मिलीभगत कर उन डिप्टी रेंज अधिकारियों को रेंज ऑफिसर और फिर हरियाणा वन सेवा (एचएफएस) में प्रमोट कर दिया, जिन्होंने अनिवार्य प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) पूरा ही नहीं किया था। शिकायत के अनुसार, पवन कुमार और अनिल कुमार नाम के अधिकारियों को नियमों को दरकिनार कर पदोन्नति का तोहफा दिया गया, जबकि विभाग की प्रशिक्षण शाखा के रिकॉर्ड में उनकी ट्रेनिंग का कहीं कोई नामो-निशान नहीं है।
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शिकायत में केवल दो अधिकारियों का ही नहीं, बल्कि कई कर्मचारियों का पर्दाफाश किया गया है। इसमें तरुण गागत, देवेंद्र राणा, संजीव कुमार को भी गलत तरीके से प्रमोट करने का आरोप है। शिकायतकर्ता ने स्पष्ट मांग की है कि इन सभी को तत्काल प्रभाव से इनके मूल पद पर वापस (रिवर्ट) भेजा जाए। यह खुलासा चौंकाने वाला है कि किस तरह से आधिकारिक फाइलों के साथ छेड़छाड़ की गई और सरकार को अंधेरे में रखकर पदोन्नति का यह खेल खेला गया।
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आला अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध
शिकायत ने वन विभाग के शीर्ष स्तर पर बैठे अधिकारियों को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। आरोप है कि इस पूरे षड्यंत्र में तत्कालीन प्रधान मुख्य वन संरक्षक विनीत कुमार गर्ग, एपीसीसीएफ घनश्याम शुक्ला और आईएफएस नवदीप सिंह की भूमिका सीधे तौर पर संदिग्ध है। आरोप है कि इन वरिष्ठ अधिकारियों ने न केवल तथ्यों को छिपाया, बल्कि सरकार को गुमराह करने के लिए रिकॉर्ड में हेरफेर तक की। इतना ही नहीं, शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया है कि इस घोटाले के आरोपी वरिष्ठ अधिकारी जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं और जांच समिति के सदस्यों पर अपनी रिपोर्ट बदलने का दबाव बनाया जा रहा है।


15 दिन में रिपोर्ट का अल्टीमेटम
मामले की गंभीरता को देखते हुए वन मंत्री कार्यालय की डायरी संख्या 2751 4 जून 2026 के तहत तुरंत प्रभाव से तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन कर दिया गया है। इसमें अतुल सिरसिकर (आईएफएस), आर. आनंद (आईएफएस) और सुंदर लाल (आईएफएस) को शामिल किया गया है। यह समिति पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच करेगी और 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट मुख्यालय को सौंपेगी।
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